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Lucknow News: लखनऊ विश्वविद्यालय में 62 फीसदी शोधार्थी नहीं जमा कर पाए थीसिस
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लखनऊ। पीएचडी में दाखिले के साथ ही थीसिस जमा करके डिग्री पाना भी अब आसान नहीं रह गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय में पिछले सात साल की अवधि में दाखिला पाने वाले करीब 60 फीसदी शोधार्थी अपनी थीसिस नहीं जमा कर पाए हैं।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक, पीएचडी थीसिस जमा करने की न्यूनतम अवधि तीन और अधिकतम सात साल है। हर साल दाखिला लेने और थीसिस जमा करने का सिलसिला चलता रहता है। इस लिहाज से सात साल की अवधि में होने वाले दाखिले और पीएचडी उपाधि की संख्या लगभग एक समान होनी चाहिए। लखनऊ विश्वविद्यालय में पिछले सात साल की अवधि में विभिन्न विभागों में कुल मिलाकर 4,702 दाखिले हुए हैं। इस अवधि में पीएचडी अवार्ड होने का आंकड़ा सिर्फ 1,760 है। इसका मतलब सिर्फ 37.43 फीसदी शोधार्थियों को ही पीएचडी की उपाधि मिल सकी और करीब 62 फीसदी विभिन्न कारणों से डिग्री नहीं पा सके।
2024 में सबसे कम पीएचडी उपाधि
लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्ष 2024 में हुए दीक्षांत समारोह में 179 पीएचडी डिग्री दी गई थीं। पिछले नाै साल के दाैरान यह संख्या सबसे कम है। दाखिले और पीएचडी अवार्ड दोनों लिहाज से वर्ष 2021-22 का साल अहम रहा। इस साल 1102 दाखिले और 310 पीएचडी डिग्री अवार्ड हुईं।
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दाखिले के लिए कड़ी मशक्कत
किसी भी विश्वविद्यालय में पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा अनिवार्य है। प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी नंबर लाने की अनिवार्यता के साथ ही साक्षात्कार की प्रक्रिया भी तय है। इनसे गुजरने के बाद ही अभ्यर्थी को दाखिला मिल पाता है।
पीएचडी अवार्ड न होने पाने में सामने आईं ये प्रमुख वजह
- जेआरएफ मिलने के बाद सिविल सेवा या फिर किसी अन्य नौकरी की तैयारी और उसमें चयन।
- पीएचडी के नियमों में सख्ती होने की वजह से नियमित रहने की अनिवार्यता।
- साहित्य चोरी संबंधी नियम सख्त होने और आधुनिक साॅफ्टवेयर की वजह से कट-काॅपी-पेस्ट पर रोक लगना।
- पीएचडी के बाद भी नाैकरी की गारंटी न होना।
- राज्य विश्वविद्यालयों में नेट या सामान्य पीजी पास विद्यार्थियों को शोध के दाैरान किसी प्रकार की आर्थिक सहायता न मिल पाना।
- गंभीर शिक्षक और शोधार्थियों का अभाव।
नाै साल के दाैरान पीएचडी प्रवेश व डिग्री अवार्ड की स्थिति
वर्ष दाखिले पीएचडी उपाधि
2015-16 523 268
2016-17 450 295
2017-18 000 286
2018-19 530 288
2019-20 449 192
2020-21 439 262
2021-22 1102 310
2022-23 912 243
2023-24 820 179
कुल- 5225 2323
कोट-
कारणों की पड़ताल करेंगे
शोध की गुणवत्ता के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग बेहद सख्त है। लविवि ने भी आयोग की गाइडलाइन के हिसाब से आर्डिनेंस में बदलाव किया है। यह चिंता का विषय है कि पीएचडी दाखिले में इतनी मारामारी होने के बावजूद आधे से ज्यादा शोधार्थी थीसिस नहीं जमा कर सके। इसके कारणों की पड़ताल की जाएगी।
प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता लविवि
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक, पीएचडी थीसिस जमा करने की न्यूनतम अवधि तीन और अधिकतम सात साल है। हर साल दाखिला लेने और थीसिस जमा करने का सिलसिला चलता रहता है। इस लिहाज से सात साल की अवधि में होने वाले दाखिले और पीएचडी उपाधि की संख्या लगभग एक समान होनी चाहिए। लखनऊ विश्वविद्यालय में पिछले सात साल की अवधि में विभिन्न विभागों में कुल मिलाकर 4,702 दाखिले हुए हैं। इस अवधि में पीएचडी अवार्ड होने का आंकड़ा सिर्फ 1,760 है। इसका मतलब सिर्फ 37.43 फीसदी शोधार्थियों को ही पीएचडी की उपाधि मिल सकी और करीब 62 फीसदी विभिन्न कारणों से डिग्री नहीं पा सके।
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2024 में सबसे कम पीएचडी उपाधि
लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्ष 2024 में हुए दीक्षांत समारोह में 179 पीएचडी डिग्री दी गई थीं। पिछले नाै साल के दाैरान यह संख्या सबसे कम है। दाखिले और पीएचडी अवार्ड दोनों लिहाज से वर्ष 2021-22 का साल अहम रहा। इस साल 1102 दाखिले और 310 पीएचडी डिग्री अवार्ड हुईं।
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दाखिले के लिए कड़ी मशक्कत
किसी भी विश्वविद्यालय में पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा अनिवार्य है। प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी नंबर लाने की अनिवार्यता के साथ ही साक्षात्कार की प्रक्रिया भी तय है। इनसे गुजरने के बाद ही अभ्यर्थी को दाखिला मिल पाता है।
पीएचडी अवार्ड न होने पाने में सामने आईं ये प्रमुख वजह
- जेआरएफ मिलने के बाद सिविल सेवा या फिर किसी अन्य नौकरी की तैयारी और उसमें चयन।
- पीएचडी के नियमों में सख्ती होने की वजह से नियमित रहने की अनिवार्यता।
- साहित्य चोरी संबंधी नियम सख्त होने और आधुनिक साॅफ्टवेयर की वजह से कट-काॅपी-पेस्ट पर रोक लगना।
- पीएचडी के बाद भी नाैकरी की गारंटी न होना।
- राज्य विश्वविद्यालयों में नेट या सामान्य पीजी पास विद्यार्थियों को शोध के दाैरान किसी प्रकार की आर्थिक सहायता न मिल पाना।
- गंभीर शिक्षक और शोधार्थियों का अभाव।
नाै साल के दाैरान पीएचडी प्रवेश व डिग्री अवार्ड की स्थिति
वर्ष दाखिले पीएचडी उपाधि
2015-16 523 268
2016-17 450 295
2017-18 000 286
2018-19 530 288
2019-20 449 192
2020-21 439 262
2021-22 1102 310
2022-23 912 243
2023-24 820 179
कुल- 5225 2323
कोट-
कारणों की पड़ताल करेंगे
शोध की गुणवत्ता के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग बेहद सख्त है। लविवि ने भी आयोग की गाइडलाइन के हिसाब से आर्डिनेंस में बदलाव किया है। यह चिंता का विषय है कि पीएचडी दाखिले में इतनी मारामारी होने के बावजूद आधे से ज्यादा शोधार्थी थीसिस नहीं जमा कर सके। इसके कारणों की पड़ताल की जाएगी।
प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव, प्रवक्ता लविवि