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60 साल की विधवा भी हो सकती है पांच बार प्रेगनेंट?

Thu, 02 Jul 2015 02:01 PM IST
अतुल अवस्थी/अमर उजाला बहराइच
अतुल अवस्थी/अमर उजाला बहराइच Updated Thu, 02 Jul 2015 02:01 PM IST
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60 year widow shown pregnant in papers

दस महीने में एक 60 साल की विधवा ने पांच बच्चों को जन्म दिया...। असंभव है ना, पर जिले के स्वास्थ्य महकमे ने इसे साबित कर दिखाया है। सारा खेल जननी सुरक्षा योजना में हुआ है।

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अब इस पूरे मसले को संज्ञान में लेते हुए सीएमओ ने इसकी जांच एसीएमओ को सौंपी है। अभी तक इस पर कुछ फैसला नहीं आ सका है।

दरअसल एक बुजुर्ग महिला के बैंक खाते में महकमे ने पांच बार जननी सुरक्षा योजना की 14-14 सौ रुपये के पांच चेक जमा किए हैं। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है।
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अपनी कुर्सी फंसते देख सीएमओ ने बौंडी पीएचसी के पांच कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई की है। फिलहाल पूरे जिले में जेएसवाई योजना के तहत घोटाले की पटकथा लिखी जा रही है। अब जिम्मेदारान मामले की जांच का दावा कर रहे हैं।

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जानिए क्या है यह योजना

60 year widow shown pregnant in papers

संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना संचालित है। इसके तहत स्वास्थ्य केंद्रों पर सुरक्षित प्रसव कराने पर लाभार्थी को 14 सौ रुपये का चेक दिया जाता है। यह धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में विभाग हस्तांतरित करता है।

तो वहीं स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव के बाद 48 घंटे ठहरने पर भोजन देने की व्यवस्था है। लेकिन जिले में जननी सुरक्षा योजना व शिशु सुरक्षा कार्यक्रम में करोड़ो रुपये का घोटाला किया जा रहा है। फर्जी तरीके से प्रसव दिखाकर विभाग करोड़ों रुपये की बंदरबाट करने में जुटा है।

तो वहीं प्रसूताओं को भोजन भी नहीं दिया जा रहा है। लेकिन कागजों पर प्रसूताओं को सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। ताजा मामला फखरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत बौंडी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है। यहां बौंडी निवासी ननकई (60) पत्नी स्व ननकऊ को विभाग ने दस महीने में पांच बार जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिया है।

जबकि ननकई को इस बात की जानकारी तक नहीं है। इसी तरह गांव की करीब दो सौ से अधिक महिलाओं को गर्भवती फिर केंद्र पर प्रसव दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।

सरकारी धन जमा कराने के आदेश

60 year widow shown pregnant in papers

सीएमओ ने केंद्र प्रभारी को आदेशित किया है कि जेएसवाई योजना के तहत धन का जो अपव्यय हुआ है, उसे तत्काल राजकीय कोष में जमा करते हुए रसीद उपलब्ध कराई जाए। सीएमओ ने सिर्फ तीन प्रसव को गलत ठहराया है। जबकि विभाग ने पांच मर्तबा योजना का लाभ ननकई को दिया है।

इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की पुष्टि के बावजूद फखरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ प्रताप गौतम पर सिर्फ स्थानांतरण की कार्रवाई की गई है। डॉ प्रताप को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रमवापुर भेजा गया है।

जबकि बौंडी के फार्मासिस्ट सुशील प्रकाश शुक्ला का स्थानांतरण सुजौली पीएचसी पर किया गया है। केंद्र प्रभारी के बिना सहमति व हस्ताक्षर के जेएसवाई का चेक भुगतान नहीं किया जाता है। इसके बावजूद सिर्फ स्थानांतरण की कार्रवाई, सीएमओ को भी कटघरे में खड़ी कर रही है।

सीएमओ डॉ केबी जैन ने जिला स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सूचना अधिकारी एके चौधरी के साथ मंगलवार की शाम ननकई के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया है। ननकई ने प्रसव व लाभ पाने से इंकार कर दिया है।

पांच पर वित्तीय अनियमितता के दोष सिद्ध

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वित्तीय अनियमितता की पुष्टि के बाद सीएमओ डॉ केबी जैन ने बौंडी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ओमकार सिंह, आशा कार्यकत्री प्रेमा देवी, एएनएम देवंदी चौहान, एएनएम कमलेश अवस्थी व बीएचडब्लू आफाक अहमद को निलंबित कर दिया है।

मामले के खुलासे के बाद वृद्ध महिला ननकई के बैंक खाते से एक अप्रैल 2014 व 18 जून 2015 तक जमा व निकासी की डिटेल निकलवाई गई। बैंक डिटेल ने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल कर रख दी है।

20 मई, 14 जून, 29 अक्तूबर 2014 और दो जनवरी व 20 मार्च 2015 को ननकई के बैंक खाते में जननी सुरक्षा योजना की 14-14 सौ रुपये जमा किए गए हैं।

जननी सुरक्षा योजना के तहत फर्जी प्रसव व लाभार्थी के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जा रही है। इस बात को विभाग के अधिकारी भी दबी जबान में स्वीकारते हैं। एक अधिकारी ने नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया कि यदि स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव मामलों की जांच कराई जाए तो बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। इस खेल में आशा कार्यकत्रियों से लेकर उच्च अधिकारी भी शामिल हैं।

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