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विधानसबा--व्यापारियों को तीन के बजाय अब तीन महीने में भरना होगा रिटर्न

Thu, 20 Dec 2018 11:32 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Dec 2018 11:32 PM IST
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विधानसबा--व्यापारियों को तीन के बजाय अब तीन महीने में भरना होगा रिटर्न
व्यापारियों को मासिक के स्थान पर अब तीन महीने में भरना होगा रिटर्न
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पेनल्टी जमा न करने पर पकड़ा गया माल 14 दिन में किया जाएगा सीज
‘उप्र माल एवं सेवा कर (संशोधित) विधेयक-2018’ पारित
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। जीएसटी प्रणाली में पंजीकृत प्रदेश के व्यापारियों को बड़ी सहूलियत देने के लिए सरकार की ओर से पेश ‘उप्र माल एवं सेवा कर (संशोधित) विधेयक-2018’ को विधानमंडल के दोनों सदनों में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इससे 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले व्यापारियों को अब मासिक के स्थान तिमाही रिटर्न भरने की सुविधा मिलेगी।
साथ ही कंपोजिशन (समाधान) की अधिकतम सीमा एक करोड़ से बढ़कर 1.50 करोड़ रुपये हो जाएगी। रेस्टोरेंट समेत उन प्रतिष्ठानों को भी कंपोजिशन की सुविधा दी जाएगी, जिन्हें अभी यह सुविधा नहीं मिलती थी। पंजीकृत व्यापारियों को अपंजीकृत व्यापारियों से खरीदे गए सिर्फ उन वस्तुओं पर ही कर देना होगा, जो वस्तु सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में शामिल होगी। अब तक सभी वस्तुओं पर कर देने की जिम्मेदारी क्रेता व्यापारी की थी। इसी तरह पकड़े गए माल को सीज करने के लिए निर्धारित समय सीमा को 7 दिन से बढ़ाकर 14 दिन कर दिया गया है। इस अवधि में व्यापारी द्वारा पेनल्टी नहीं जमा करने पर ही माल को सीज किया जा सकेगा।
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जांच में पुष्टि के बाद ही रद्द होगा व्यापारियों का पंजीकरण
अब किसी भी व्यापारी का रजिस्ट्रेशन तब तक रद्द नहीं किया जाएगा, जब तक जांच में पुष्ट न हो जाए कि रजिस्ट्रेशन रद्द करने योग्य है। मौजूदा व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन रद्द करने के बाद जांच होती थी। कर से संबंधित विवाद की अपील करने से संबंधित प्रावधान को भी सरल किया गया है। व्यापारियों को अब अपील करते समय विवादित कर राशि का 10 प्रतिशत या अधिकतम 25 करोड़ रुपये ही जमा करने होंगे। पहले विवादित कर राशि का 10 प्रतिशत जमा करने की व्यवस्था थी। बड़े मामलों में यह राशि जमा करने में व्यापारियों को परेशानी होती थी।
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