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ट्रॉमा सेंटर में 50 स्ट्रेचर और बढ़ाए गए
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 06 May 2014 09:54 AM IST
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केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर से अब मरीजों को बिना इलाज नहीं लौटना पड़ेगा। कुलपति प्रो. रविकांत ने सोमवार सुबह ट्रॉमा सेंटर का दौराकर ये निर्देश जारी किए हैं।
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अमर उजाला में सोमवार को ‘ब्रेन हैमरेज के मरीज को बिना इलाज लौटाया’ शीर्षक से छपी खबर प्रकाशित होने के बाद अचानक ट्रॉमा सेंटर के दौरे पर पहुंचे कुलपति ने यह निर्णय लिया है।
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इसके अलावा उन्होंने ट्रॉमा सेंटर में 50 स्ट्रेचर भी तत्काल प्रभाव से बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
ट्रॉमा सेंटर में बेड और स्ट्रेचर की कमी के कारण अब मरीजों को वापस नहीं लौटाया जाएगा।
सोमवार सुबह आठ बजे ट्रॉमा सेंटर का औचक निरीक्षण करने पहुंचे कुलपति प्रो. रविकांत के निर्देश के बाद ये व्यवस्था लागू कर दी गई।
अमर उजाला में खबर छपने के बाद कुलपति अचानक ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।
उन्होंने वहां सर्जरी और आर्थोपैडिक विभाग की इमरजेंसी का निरीक्षण किया। अचानक कुलपति के पहुंचने से ट्रॉमा सेंटर में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में वहां वरिष्ठ चिकित्सक भी पहुंच गए।
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कुलपति ने सर्जरी इमरजेंसी की स्थिति देखकर नाराजगी जताई। इसके बाद वह आर्थोपैडिक वार्ड में पहुंच गए। यहां भी मरीजों की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई।
इसके बाद उन्होंने ट्रॉमा सेंटर के प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत 50 स्ट्रेचर बढ़ाने के निर्देश दिए। जिससे मरीजों को बेड न मिले तो कम से कम उनका स्ट्रेचर पर ही कुछ इलाज हो सके।
कुलपति ने सभी विभागों के चिकित्सकों को ड्यूटी के अनुसार ट्रॉमा सेंटर में मौजूद रहने के निर्देश भी दिए।
गौरतलब है कि ट्रॉमा में 280 बेड हैं। इसके अलावा लगभग 70 स्ट्रेचर भी वहां उपलब्ध कराए गए हैं।
लेकिन मरीजों की अधिक आमद के कारण ट्रॉमा से गंभीर मरीजों को आए दिन लौटा दिया जाता है। अब 50 स्ट्रेचर बढ़ जाने से मरीजों को बिना इलाज लौटाए जाने की संभावना नहीं रहेगी।