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यूपी : 489 मुख्य आरक्षियों को मिला प्रमोशन, बने दरोगा, 59 को इस वजह से नहीं मिली तरक्की
Mon, 17 Jun 2019 01:43 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 17 Jun 2019 01:43 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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डीजीपी मुख्यालय ने 489 मुख्य आरक्षियों को उप निरीक्षक (दरोगा) के पद पर प्रोन्नत कर दिया है। पुलिस मुख्यालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। ये प्रमोशन ज्येष्ठता के आधार पर दिए गए हैं। पिछले दिनों मुख्य आरक्षी से उप निरीक्षक के पदों पर प्रोन्नति के लिए 550 लोगों के नामों पर विचार किया गया।
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इनमें 61 मुख्य आरक्षियों को अनुपयुक्त पाया गया। प्रमोशन पाए 483 उप निरीक्षकों का चयन वर्ष 2018 निर्धारित किया गया है, जबकि पांच का 2017 और एक उप निरीक्षक का चयन वर्ष 2015 निर्धारित किया गया है। उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक और निरीक्षक (नागरिक पुलिस) सेवा नियमावली 2015 के अनुसार प्रमोशन पाए उप निरीक्षकों का प्रोबेशन पीरियड दो साल का होगा।
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प्रमोशन पाए मुख्य आरक्षियों को जल्द ही प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। प्रशिक्षण में सफल होने पर इनकी तैनाती नए सिरे से की जाएगी। प्रशिक्षण में सफल नहीं होने वाले उप निरीक्षक का प्रमोशन निरस्त समझा जाएगा।
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सूची विभागीय वेबसाइट पर अपलोड
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- फोटो : अमर उजाला
पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रमोशन पाने वाले उप निरीक्षकों की सूची विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। साथ ही जिन मुख्य आरक्षियों को प्रमोशन नहीं मिला है, उन 61 मुख्य आरक्षियों की सूची भी अपलोड कर दी गई है।
59 मुख्य आरक्षियों पर हत्या, बलात्कार और लूट तक के मुकदमे
जिन 61 मुख्य आरक्षियों को प्रमोशन नहीं मिला है, उनमें से 59 मुख्य आरक्षी के खिलाफ हत्या, बलात्कार, दहेज उत्पीड़न, लूट और चोरी तक के मामले दर्ज हैं। हत्या के अधिकतर मामले हिरासत में मौत के हैं, जो न्यायालय में विचाराधीन हैं। दो मुख्य आरक्षी अलग-अलग वजहों से निलंबित चल रहे हैं, जिस वजह से उन्हें प्रमोशन का लाभ नहीं मिला है।
59 मुख्य आरक्षियों पर हत्या, बलात्कार और लूट तक के मुकदमे
जिन 61 मुख्य आरक्षियों को प्रमोशन नहीं मिला है, उनमें से 59 मुख्य आरक्षी के खिलाफ हत्या, बलात्कार, दहेज उत्पीड़न, लूट और चोरी तक के मामले दर्ज हैं। हत्या के अधिकतर मामले हिरासत में मौत के हैं, जो न्यायालय में विचाराधीन हैं। दो मुख्य आरक्षी अलग-अलग वजहों से निलंबित चल रहे हैं, जिस वजह से उन्हें प्रमोशन का लाभ नहीं मिला है।