आठ जिलों के मुकाबले तीन गुना है लखनऊ में कोरोना संक्रमण, सैंपलों की जांच रिपोर्ट से सामने आया निष्कर्ष
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लखनऊ में कोरोना की रफ्तार आस-पास के आठ जिलों से करीब तिगुनी है। केजीएमयू में आए सैंपलों की जांच में यह परिणाम सामने आया है। राजधानी में लिए सैंपलों में औसतन 4.88 प्रतिशत में संक्रमण मिला है। वहीं, आठ जिलों में यह औसत करीब 1.64 फीसदी है। राजधानी में आंकड़ा बढ़ने का कारण जमाती, हेल्पलाइन कर्मचारी व जीआरपी-आरपीएफ व पीएसी जवानों का संक्रमित मिलना है। 15 अप्रैल से 15 जून तक आठ जिलों के 62,525 सैंपलों की जांच हुई है, जिनमें 1170 पॉजिटिव निकले हैं। राजधानी के 11912 सैंपलों में से 588 पॉजिटिव निकले हैं।
ज्यादातर जिलों में लिए सैंपलों का औसत 2 से 3 फीसदी के बीच ही है। लॉकडाउन में भी मरीज मिलने का औसत यही रहा। लॉकडाउन खुलने के बाद मरीज के साथ सैंपल भी बढ़े। केजीएमयू में राजधानी के अलावा कन्नौज, हरदोई, मुरादाबाद, बाराबंकी, संभल, शाहजहांपुर, अयोध्या, कानपुर के सैंपल नियमित आते हैं।
वहीं, बरेली, पीलीभीत, मिर्जापुर, बलिया, गोंडा, गोरखपुर सहित अन्य जिलों के नमूने कभी-कभी आते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जिस अनुपात में लॉकडाउन में मरीज मिले हैं, करीब वही स्थिति अब भी है। इतना जरूर है कि एक से 15 मई के बीच मरीज कम मिले, लेकिन 15 मई के बाद फिर से मरीजों का औसत ग्राफ 15 से 30 अप्रैल जैसा ही दिखता है। यही हाल जून में है।
सैंपल व पॉजिटिव मरीजों के मिलने की स्थिति
केजीएमयू मेें 15 से 30 अप्रैल के बीच 9500 सैंपलों की जांच हुई, जिसमें 205 पॉजिटिव निकले। इनमें 2632 सैंपल राजधानी के थे, जिसमें 162 पॉजिटिव थे। एक से 15 मई के बीच 13,183 सैंपल में से 294 पॉजिटिव रहे। इसमें राजधानी के 2529 सैंपलों में 72 पॉजिटिव थे। 16 से 31 मई के बीच 21,281 सैंपल में से 457 पॉजिटिव पाए गए।
इनमें राजधानी के 2655 सैंपलों में 130 पॉजिटिव निकले। एक से 15 जून के बीच 30,473 सैंपलों से 802 पॉजीटिव मिले। इसमें राजधानी के 4096 सैंपलों से 224 पॉजिटिव मिले। इनका औसत देखें तो कुल सैंपल से 2.28 प्रतिशत पॉजिटिव मिले। इसमें से राजधानी का आंकड़ा अलग करने पर अन्य जिलों का औसत 1.64 फीसदी रहा। वहीं, अकेले राजधानी का औसत 4.88 फीसदी है।
सैंपल के साथ बढ़ता जा रहा मरीजों का आंकड़ा
स्वास्थ्य विभाग ने जिस गति से सैंपलिंग बढ़ाई, उसी रफ्तार से मरीजों का आंकड़ा बढ़ा। केजीएमयू के आंकड़े देखें तो 15 से 30 अप्रैल की अपेक्षा एक से 15 मई के बीच 36 प्रतिशत सैंपल बढ़ाए गए। ऐसे में मिलने वाले मरीजों का आंकड़ा 0.89 फीसदी बढ़ गया। 16 से 31 मई के बीच सैंपलिंग का आंकड़ा 80 फीसदी बढ़ा तो मरीजों का ग्राफ 1.63 प्रतिशत बढ़ा।एक से 15 जून के बीच सैंपलिंग 90 फीसदी बढ़ी तो मरीज मिलने का औसत 3.45 फीसदी बढ़ा।
स्वास्थ्य विभाग ने जिस गति से सैंपलिंग बढ़ाई, उसी रफ्तार से मरीजों का आंकड़ा बढ़ा। केजीएमयू के आंकड़े देखें तो 15 से 30 अप्रैल की अपेक्षा एक से 15 मई के बीच 36 प्रतिशत सैंपल बढ़ाए गए। ऐसे में मिलने वाले मरीजों का आंकड़ा 0.89 फीसदी बढ़ गया। 16 से 31 मई के बीच सैंपलिंग का आंकड़ा 80 फीसदी बढ़ा तो मरीजों का ग्राफ 1.63 प्रतिशत बढ़ा। एक से 15 जून के बीच सैंपलिंग 90 फीसदी बढ़ी तो मरीज मिलने का औसत 3.45 फीसदी बढ़ा।
लगातार घूम रही हैं टीमें
- 15 से 30 अप्रैल : 0.60 फीसदी
- 1 से 15 मई : 2.08 फीसदी
- 1 से 15 जून : 2.13 फीसदी
कुल मरीजों का औसत 1.64%
राजधानी में पॉजिटिव मरीजों का प्रतिशत
- 15 से 30 अप्रैल : 6.15 फीसदी
- 1 से 15 मई : 2.88 फीसदी
- 16 से 31 मई : 4.89 फीसदी
- 1 से 15 जून : 5.46 फीसदी
कुल मरीजों का औसत 4.88%
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार मोहल्लों में घूम रही हैं। इससे पॉजिटिव मरीज को तुरंत खोज लिया जा रहा है। उसके आसपास के इलाके की सैंपलिंग करा ली जा रही है। इससे वायरस नहीं फैल रहा। -डॉ. केपी त्रिपाठी, एसीएमओ
निगरानी व्यवस्था चुस्त
राजधानी के मूल मरीजों की स्थिति देखें तो औसत 1.5 से 2 फीसदी ही आएगा। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में बड़ी संख्या में जमाती तो जून में हेल्पलाइन कर्मचारी और जीआरपी-आरपीएफ व पीएसी के जवानों से ग्राफ बढ़ा है।
-डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ