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42 जिलों ने नहीं दिया शिक्षा खर्च का हिसाब
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 12 Sep 2014 03:02 PM IST
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निशक्त बच्चों को शिक्षित करने के लिए शुरू की गई समेकित शिक्षा योजना का भगवान ही मालिक है। जिले इस योजना में मिलने वाले पैसे का हिसाब तक नहीं दे रहे हैं।
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माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से बार-बार पूछने के बाद भी यह नहीं बताया जा रहा है कि इस योजना में मिले पैसे में कितना खर्च हुआ और कितना नहीं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक अवध नरेश शर्मा ने 42 जिलों को हिसाब न देने पर नोटिस देते हुए एक सप्ताह में ब्यौरा तलब किया है। समेकित शिक्षा योजना के तहत निशक्त बच्चों को शिक्षा देने की व्यवस्था है।
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माध्यमिक शिक्षा निदेशालय जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से इसके लिए बजट देता है। शिक्षाधिकारी ऐसे बच्चों को चिह्नित करते हुए शिक्षित कराते हैं।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने कहा है कि लखनऊ, अमरोहा, अलीगढ़, औरैया, बागपत, बिजनौर, हरदोई, कासगंज, मैनपुरी, सीतापुर, श्रावस्ती, उन्नाव, आगरा, देवरिया, गौतमबुद्धनगर, गोरखपुर, जौनपुर, मुरादाबाद, संतकबीर नगर, बांदा, रायबरेली, इटावा, आजमगढ़, बरेली, इलाहाबाद, मिर्जापुर व कानपुर नगर आदि जिलों से हिसाब नहीं मिल रहा है।
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