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Lucknow News: जमीन और लोन के नाम पर 40 लाख ऐंठे
Sun, 01 Dec 2024 06:14 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 01 Dec 2024 06:14 PM IST
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लखनऊ। जालसाजों ने प्रॉपर्टी डीलर को जमीन और कारोबारी को लाेन दिलाने के नाम पर करीब 40 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ितों ने गुडंबा और गोमतीनगर विस्तार थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
इंदिरानगर के फरीदी नगर निवासी एएम अंसारी इशल कंस्ट्रक्शन के मालिक हैं। उनको दो साल पहले कुर्सी रोड पर जमीन की तलाश थी। इस दौरान ही उनकी मुलाकात गुडंबा निवासी रूपचंद यादव व उसके दो बेटों संजय और राजेश से हुई। तीनों ने जमीन दिखाई, जिसकी कीमत 48 लाख थी। रूपचंद ने जमीन का इकरारनामा प्रॉपर्टी डीलर की फर्म के नाम कर दिया और तीस लाख बयाना ले लिया। कुछ दिन बाद पीड़ित को पता चला कि जमीन विवादित है, जिसके कई मुकदमे विभिन्न कोर्ट में विचाराधीन हैं।
गोमतीनगर विस्तार स्थित अलकनंदा अपार्टमेंट निवासी समीर आनंद के मुताबिक कंस्ट्रक्शन के काम के लिए लोन चाहिए था। परिचित संभल के बृजेश यादव ने कहा कि उसका आगरा निवासी दोस्त अमन लवानिया उन्हें तीन साल के कम ब्याज पर लोन दिला देगा। हामी भरने पर बृजेश ने अमन की मुलाकात समीर से कराई। दोनों ने औपचारिकताओं के नाम पर पीड़ित से 9.90 लाख रुपये ले लिए। कुछ समय बाद उनको बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक के ई-मेल भेज दिए। संदेह होने पर बैंक से जानकारी ली तो पता चला कि सारे मेल जाली थे।
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इंदिरानगर के फरीदी नगर निवासी एएम अंसारी इशल कंस्ट्रक्शन के मालिक हैं। उनको दो साल पहले कुर्सी रोड पर जमीन की तलाश थी। इस दौरान ही उनकी मुलाकात गुडंबा निवासी रूपचंद यादव व उसके दो बेटों संजय और राजेश से हुई। तीनों ने जमीन दिखाई, जिसकी कीमत 48 लाख थी। रूपचंद ने जमीन का इकरारनामा प्रॉपर्टी डीलर की फर्म के नाम कर दिया और तीस लाख बयाना ले लिया। कुछ दिन बाद पीड़ित को पता चला कि जमीन विवादित है, जिसके कई मुकदमे विभिन्न कोर्ट में विचाराधीन हैं।
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गोमतीनगर विस्तार स्थित अलकनंदा अपार्टमेंट निवासी समीर आनंद के मुताबिक कंस्ट्रक्शन के काम के लिए लोन चाहिए था। परिचित संभल के बृजेश यादव ने कहा कि उसका आगरा निवासी दोस्त अमन लवानिया उन्हें तीन साल के कम ब्याज पर लोन दिला देगा। हामी भरने पर बृजेश ने अमन की मुलाकात समीर से कराई। दोनों ने औपचारिकताओं के नाम पर पीड़ित से 9.90 लाख रुपये ले लिए। कुछ समय बाद उनको बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक के ई-मेल भेज दिए। संदेह होने पर बैंक से जानकारी ली तो पता चला कि सारे मेल जाली थे।
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