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राफेल डील पर अमेठी में होर्डिंग
Updated Sat, 08 Sep 2018 12:06 AM IST
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राफेल डील पर सवाल उठाती पर एक होर्डिंग
अमेठी। राफेल डील पर सरकार पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस के गढ़ अमेठी में एक होर्डिंग चर्चा का विषय बन गई है। मुंशीगंज स्थित एचएएल कोरवा के समीप लगी गुमनाम होर्डिंग में राफेल डील पर सरकार पर उठाए जा रहे सवाल पूछे गए हैं। ये सवाल लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
अमेठी में अब पोस्टर, बैनर व होर्डिंगवार शुरू हो गया है। मुंशीगंज स्थित एचएएल कोरवा फैक्ट्री के पास राफेल डील पर लगी एक गुमनाम होर्डिंग चर्चा का विषय बनी है। सड़क के किनारे लगी इस होर्डिंग में केंद्र सरकार पर राफेल डील पर उठाए जा रहे सवाल दर्शाए गए हैं। हालांकि होर्डिंग लगाने वालों का नाम इस पर अंकित नहीं है। पर सवाल लोगों को बरबस आकर्षित कर रहे हैं।
होर्डिंग में सरकार से राफेल जहाज के दाम 526 करोड़ से 1640 करोड़ रुपए करने, डील में एचएएल के 70 वर्ष के अनुभव, महान वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कंपनी के कर्मचारियों का अपमान किए जाने का सवाल उठाया गया है। जहाज बनाने के लिए एचएएल जैसी भरोसेमंद कंपनी को छोड़कर 1114 करोड़ रुपया एक अनाड़ी कंपनी को देने पर भी सरकार से जवाब पूंछा गया है। साथ ही कार्य पायी कंपनी के पास अपनी जमीन नहीं होने व एचएएल को बर्बाद करने का भी सवाल सरकार से पूछा गया है। ये सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हैं।
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अमेठी। राफेल डील पर सरकार पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस के गढ़ अमेठी में एक होर्डिंग चर्चा का विषय बन गई है। मुंशीगंज स्थित एचएएल कोरवा के समीप लगी गुमनाम होर्डिंग में राफेल डील पर सरकार पर उठाए जा रहे सवाल पूछे गए हैं। ये सवाल लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
अमेठी में अब पोस्टर, बैनर व होर्डिंगवार शुरू हो गया है। मुंशीगंज स्थित एचएएल कोरवा फैक्ट्री के पास राफेल डील पर लगी एक गुमनाम होर्डिंग चर्चा का विषय बनी है। सड़क के किनारे लगी इस होर्डिंग में केंद्र सरकार पर राफेल डील पर उठाए जा रहे सवाल दर्शाए गए हैं। हालांकि होर्डिंग लगाने वालों का नाम इस पर अंकित नहीं है। पर सवाल लोगों को बरबस आकर्षित कर रहे हैं।
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होर्डिंग में सरकार से राफेल जहाज के दाम 526 करोड़ से 1640 करोड़ रुपए करने, डील में एचएएल के 70 वर्ष के अनुभव, महान वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कंपनी के कर्मचारियों का अपमान किए जाने का सवाल उठाया गया है। जहाज बनाने के लिए एचएएल जैसी भरोसेमंद कंपनी को छोड़कर 1114 करोड़ रुपया एक अनाड़ी कंपनी को देने पर भी सरकार से जवाब पूंछा गया है। साथ ही कार्य पायी कंपनी के पास अपनी जमीन नहीं होने व एचएएल को बर्बाद करने का भी सवाल सरकार से पूछा गया है। ये सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हैं।
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