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नर्सों की मनमानी से रात्रिकालीन चिकित्सा व्यवस्था बेपटरी
Updated Tue, 24 Apr 2018 10:16 PM IST
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बसखारी (अंबेडकरनगर)। बसखारी सीएचसी में महिला कर्मचारियों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। नर्सों की मनमानी से रात्रिकालीन चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। अस्पताल पर व्याप्त इस मनमानी से मरीजों को खासी दिक्कत हो रही है।
बसखारी सीएचसी क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन इस अस्पताल में ओपीडी व इमरजेंसी में करीब 400 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ओपीडी का संचालन तो किसी तरह से हो रहा है, लेकिन रात्रिकालीन ड्यूटी में कर्मचारी खूब मनमानी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा शिकायत महिला कर्मचारी स्टाफ नर्सों की आ रही है। सीएचसी में एक स्थायी व 8 संविदा स्टाफ नर्सों की तैनाती है। बताया जाता है कि रात्रि में तीन नर्सों की ड्यूटी लगती है। यह नर्स प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को सिर्फ भर्ती कराने तक ही अपनी जिम्मेदारी समझती हैं। इसके बाद उनका रुख अपने आवासों की तरफ हो जाता है। इसके बाद यदि गर्भवती महिलाओं की तबियत खराब होती है, तो तीमारदारों को इधर उधर भटकना पड़ता है। मामला गंभीर होने पर व तीमारदारों के आक्रोशित होने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है, और अन्यत्र जाने का सलाह दे दिया जाता है।
लापरवाही के चलते इन नौनिहालों ने दम तोड़ा
महिला कर्मचारियों की इस मनमानी कई नौनिहालों का जान भी ले चुकी है। बीते दिनों बसखारी निवासी हसीबुल्लाह ने अपनी गर्भवती पुत्री को अस्पताल में भर्ती कराया था। रात में स्टाफ नर्सों की लापरवाही से बच्चे की मौत हो गई। महिला के पेट में दर्द बढ़ने पर परिवारीजनों ने आक्रोश जाहिर किया तो उन्हें रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच की तो पता चला कि पेट में ही बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके अलावा मार्ग दुर्घटना में घायल खुशबू निवासी जैनुद्दीनपुर व नीरज ने भी इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। सीएचसी अधीक्षक मारकंडेय प्रसाद ने कहा कि अब तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि इस तरह की मनमानी हो रही है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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बसखारी सीएचसी क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन इस अस्पताल में ओपीडी व इमरजेंसी में करीब 400 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ओपीडी का संचालन तो किसी तरह से हो रहा है, लेकिन रात्रिकालीन ड्यूटी में कर्मचारी खूब मनमानी कर रहे हैं। सबसे ज्यादा शिकायत महिला कर्मचारी स्टाफ नर्सों की आ रही है। सीएचसी में एक स्थायी व 8 संविदा स्टाफ नर्सों की तैनाती है। बताया जाता है कि रात्रि में तीन नर्सों की ड्यूटी लगती है। यह नर्स प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को सिर्फ भर्ती कराने तक ही अपनी जिम्मेदारी समझती हैं। इसके बाद उनका रुख अपने आवासों की तरफ हो जाता है। इसके बाद यदि गर्भवती महिलाओं की तबियत खराब होती है, तो तीमारदारों को इधर उधर भटकना पड़ता है। मामला गंभीर होने पर व तीमारदारों के आक्रोशित होने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है, और अन्यत्र जाने का सलाह दे दिया जाता है।
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लापरवाही के चलते इन नौनिहालों ने दम तोड़ा
महिला कर्मचारियों की इस मनमानी कई नौनिहालों का जान भी ले चुकी है। बीते दिनों बसखारी निवासी हसीबुल्लाह ने अपनी गर्भवती पुत्री को अस्पताल में भर्ती कराया था। रात में स्टाफ नर्सों की लापरवाही से बच्चे की मौत हो गई। महिला के पेट में दर्द बढ़ने पर परिवारीजनों ने आक्रोश जाहिर किया तो उन्हें रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच की तो पता चला कि पेट में ही बच्चे की मौत हो चुकी है। इसके अलावा मार्ग दुर्घटना में घायल खुशबू निवासी जैनुद्दीनपुर व नीरज ने भी इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। सीएचसी अधीक्षक मारकंडेय प्रसाद ने कहा कि अब तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि इस तरह की मनमानी हो रही है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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