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मकान-प्लॉट के नाम पर तीन करोड़ 80 लाख रुपए हड़पे
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लखनऊ। आवास विकास में प्लॉट-मकान के नाम पर पीजीआई की वृंदावन कॉलोनी में स्थित इन्फ्रा बिल्ड प्रॉ. लि. से दंपती ने करीब तीन करोड़ 80 लाख रुपये हड़प लिए। रुपये हड़पने का अहसास होने पर इन्फ्रा बिल्ड कंपनी की डायरेक्टर पद्मजा सिंह ने स्थानीय थाने में शुक्रवार को केस दर्ज कराया है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
पीजीआई थाना प्रभारी निरीक्षक आनंद प्रकाश शुक्ला के मुताबिक, पद्मजा सिंह की तहरीर पर गायत्री शुक्ला और जगतनारायण शुक्ला के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। जांच शुरू कर दी गई है। पद्मजा के मुताबिक, वृंदावन कॉलोनी में उनका दफ्तर है। वहीं एक साल पहले से वीरेंद्र यादव के साथ जगत नारायण शुक्ला आया करता था। इसी बीच वीरेंद्र ने कहा कि जगत नारायण व उनकी पत्नी की मां दुर्गा बिल्डर्स के नाम से मेसर्स है। इनकी मेसर्स के नाम आवास विकास के 10 से 15 प्लॉट व मकान मिलने वाले हैं। इसके बाद वह दोनों चले गए।
कुछ दिन बाद आए तो कुछ दस्तावेज लेकर आए और दिखाने लगे जोकि आवास विकास से जुडे़ थे। उन कागजों पर पद्मजा और उनके पति राजीव ने विश्वास कर लिए। इसके बाद जगत नारायण और उनकी पत्नी आईं और सभी प्लॉट और दुकानों की कीमत 5 करोड़ रुपये तय कर एडवांस देने को कहा। पद्मजा ने कंपनी की चेक पर एक करोड़ रुपये दे दिया। उसके कुछ दिनों बाद कई बार में कुल तीन करोड़ 80 लाख रुपये दिए। साथ ही वीरेंद्र को सौदा कराने के लिए 13 लाख रुपये भी दे दिया। कुछ दिन बाद पद्मजा को शक हुआ तो उन्होंने आवास विकास जाकर जानकारी की और जगत नारायण के दिए गए दस्तावेज दिखाए। वहां से जानकारी हुई कि सारे दस्तावेज फर्जी हैं। उसके व उसकी मेसर्स के नाम पर कोई भी प्लॉट व मकान नहीं मिलने वाला है। पद्मजा और उसके पति राजीव ने रकम वापस करने के लिए कहा तो वे दोनों टाल-मटोल करने लगे। इसके बाद शुक्रवार को केस दर्ज कराया।
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पीजीआई थाना प्रभारी निरीक्षक आनंद प्रकाश शुक्ला के मुताबिक, पद्मजा सिंह की तहरीर पर गायत्री शुक्ला और जगतनारायण शुक्ला के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। जांच शुरू कर दी गई है। पद्मजा के मुताबिक, वृंदावन कॉलोनी में उनका दफ्तर है। वहीं एक साल पहले से वीरेंद्र यादव के साथ जगत नारायण शुक्ला आया करता था। इसी बीच वीरेंद्र ने कहा कि जगत नारायण व उनकी पत्नी की मां दुर्गा बिल्डर्स के नाम से मेसर्स है। इनकी मेसर्स के नाम आवास विकास के 10 से 15 प्लॉट व मकान मिलने वाले हैं। इसके बाद वह दोनों चले गए।
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कुछ दिन बाद आए तो कुछ दस्तावेज लेकर आए और दिखाने लगे जोकि आवास विकास से जुडे़ थे। उन कागजों पर पद्मजा और उनके पति राजीव ने विश्वास कर लिए। इसके बाद जगत नारायण और उनकी पत्नी आईं और सभी प्लॉट और दुकानों की कीमत 5 करोड़ रुपये तय कर एडवांस देने को कहा। पद्मजा ने कंपनी की चेक पर एक करोड़ रुपये दे दिया। उसके कुछ दिनों बाद कई बार में कुल तीन करोड़ 80 लाख रुपये दिए। साथ ही वीरेंद्र को सौदा कराने के लिए 13 लाख रुपये भी दे दिया। कुछ दिन बाद पद्मजा को शक हुआ तो उन्होंने आवास विकास जाकर जानकारी की और जगत नारायण के दिए गए दस्तावेज दिखाए। वहां से जानकारी हुई कि सारे दस्तावेज फर्जी हैं। उसके व उसकी मेसर्स के नाम पर कोई भी प्लॉट व मकान नहीं मिलने वाला है। पद्मजा और उसके पति राजीव ने रकम वापस करने के लिए कहा तो वे दोनों टाल-मटोल करने लगे। इसके बाद शुक्रवार को केस दर्ज कराया।
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