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2640 किमी सड़क बने, तब खपे साल भर का प्लास्टिक कचरा, 6,600 टन प्लास्टिक कचरा सालभर में निकल रहा

Mon, 17 Jun 2019 01:34 AM IST
सौरभ दिक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: सौरभ दिक्षित Updated Mon, 17 Jun 2019 01:34 AM IST
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2640 kms of roads became then plastic waste all year around
plastic road
शहर में जितना प्लास्टिक कचरा पूरे साल में निकल रहा है, उसे खपाने में करीब 2640 किमी सड़क हर साल बनानी होगी। एलडीए खुद औसतन 300 किमी लंबाई की सड़क इससे बनाएगा। उसकी सभी योजनाओं में अब प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर सड़कें  बनेंगी।
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लेकिन, पूरा प्लास्टिक कचरा खपाने के लिए एलडीए व नगर निगम जैसे विभागों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने के लिए लिंक रोड में भी इसका उपयोग करना होगा। एलडीए अकेले पूरा प्लास्टिक कचरा नहीं खपा सकता है।
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एलडीए के मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह का कहना है कि हमने शुरुआत कर दी है। बसंतकुंज, मोहान रोड, प्रधानमंत्री आवास जैसे प्रोजेक्टों में प्लास्टिक कचरे से सड़कें बनाई जाएंगी। वहीं बाकी विभागों के लिए प्रदेश सरकार को एक प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
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पर्यावरण और विकास के मुद्दे पर होने वाली प्रदेश सरकार की अलग-अलग बैठकों में भी इस प्रस्ताव को रखा जा रहा है। पीडब्ल्यूडी की तरफ से सकारात्मक संकेत प्लास्टिक कचरे का उपयोग सड़क बनाने के लिए हैं। वहीं नगर निगम, आवास विकास परिषद भी इस अभियान में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों के लिए बनने वाली लिंक रोड में भी इसका उपयोग कराने के लिए प्रदेश सरकार को प्रस्ताव दिया जाएगा।

कूड़े में दो प्रतिशत तक प्लास्टिक कचरा
मुख्य अभियंता का कहना है कि प्लास्टिक कचरे की समस्या पर पहले ही सर्वे कराया गया था। शहर में रोज करीब 910 टन कूड़ा निकल रहा है। इसमें दो प्रतिशत प्लास्टिक कचरा ऐसा होता है, जिसका उपयोग सड़क बनाने में किया जा सकता है। यानी रोजाना करीब 18 टन और साल में करीब 6600 टन प्लास्टिक कचरा सड़क बनाने को मिल सकता है। दो लेन की एक किमी लंबी सड़क बनाने में औसतन 2.5 टन प्लास्टिक कचरा लगता है।

एलडीए अकेले नहीं खपा सकता कचरा
एलडीए हर साल 80-100 किमी सड़कें बनाता है। इसमें से अधिकांश दो लेन और चार लेन की हैं। औसत रूप से देखें तो हर साल एक लेन की करीब 300 किमी. सड़क एलडीए बनाता है। एलडीए अपनी सभी भविष्य की योजनाओं को भी शामिल कर लेगा। इसके बाद भी 800-1000 टन प्लास्टिक कचरा ही खपा सकेगा। ऐसे में जरूरी है कि पीडब्ल्यूडी और नगर निगम भी अपनी सड़कों में प्लास्टिक कचरे का उपयोग करे। दोनों विभाग हर साल करीब 400-500 किमी सड़क बनाते हैं। इसमें अगर ग्रामीण इलाकों की सड़कों को भी शामिल कर लिया जाए तो यह लंबाई बढ़कर 1000 किमी को पार कर जाएगी। इनमें दो लेन से लेकर छह लेन तक की सड़कें शामिल होंगी, जहां 60-70 प्रतिशत तक प्लास्टिक कचरा खत्म हो जाएगा।

केशव मौर्या भी दे चुके आदेश
पीडब्ल्यूडी को उपमुख्यमंत्री व विभाग के मुखिया भी सड़कों के निर्माण के लिए प्लास्टिक कचरे के उपयोग का आदेश दे चुके हैं। शनिवार को भी अधिकारियों के साथ बैठक में  उन्होंने नई तकनीक के अपनाने की खुली छूट इंजीनियरों को दी है।


सामान्य सड़क से अधिक मजबूत
एलडीए अधिकारियों का दावा है कि प्लास्टिक का उपयोग कर बनीं सड़कों में बारिश के समय गड्ढे भी नहीं होंगे। तीन से पांच साल तक चलने वाली सड़कों की उम्र 10 साल तक बढ़ सकती है। प्लास्टिकमैन प्रो. राजगोपालन वासुदेवन की इस तकनीक में 10 प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग होता है। प्लास्टिक कचरे को 170 डिग्री पर पिघलाकर गिट्टी और पत्थर पर लेयर बनाई जाती है। बाद में बिटुमिन के मोर्टार को इस पर गिराने से अधिक मजबूत लेयर पूरे माल की बन जाती है। इससे बारिश के समय पानी का असर भी इस पर नहीं होगा।
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