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राजधानी की 23 फीसदी किशोरियों में खून की कमी

Tue, 04 Jun 2019 01:20 AM IST
manoj tiwari न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: manoj tiwari Updated Tue, 04 Jun 2019 01:20 AM IST
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23 percent teenage girls are anemic in lucknow
anemic
लखनऊ। राजधानी की 23.33 फीसदी किशोरियों में खून की कमी है। स्कूल न जाने वाली 11 से 14 वर्ष उम्र की किशोरियों में 28.11 फीसदी और स्कूल जाने वाली किशोरियों में 18.56 फीसदी में खून की कमी पाई गई है। यह खुलासा हुआ है स्वास्थ्य विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में। अब इन किशोरियों को पोषण देने और एनीमिया की समस्या दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाएगा। इसके तहत हर एएनएम सेंटर में किशोरियों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम शुरू हो रहे हैं।
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राजधानी में कुल 317 एएनएम उपकेंद्र हैं। आठ से 22 मार्च 2019 के बीच अभियान चलाकर किशोरियों की जांच की गई थी। इस दौरान स्कूल न जाने वाली 11 से 14 वर्ष की 1736 किशोरियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। इसी तरह 1174 किशोरियों की एनीमिया व बीएमआई की जांच की गई। इसमें 330 यानी करीब 28.11 फीसदी में एनीमिया पाया गया। स्कूल जाने वाली 5845 किशोरियों में से 1085 यानी 18.56 फीसदी में एनीमिया पाया गया। इन किशोरियों को पोषण देने के लिए आठ जुलाई से अभियान चलाया जाएगा। राज्य पोषण मिशन की महानिदेशक मोनिका एस गर्ग के निर्देश के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को तैयारी शुरू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत किशोरियों की ऊंचाई एवं वजन नापा जाएगा। उनका हेल्थ कार्ड बनेगा, जिसमें बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की गणना की जाएगी। इसके बाद किशोरियों को एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ओर से स्वास्थ्य, स्वच्छता व पोषण के संबंध में सलाह दी जाएगी। इस दौरान हीमोग्लोबिन की जांच भी होगी।
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अभियान के तहत यहां चलेंगे कार्यक्रम
इस अभियान के तहत हर माह की आठ तारीख को किशोरी दिवस मनाया जाएगा, जिसमें किशोरियों को 18 वर्ष के बाद ही विवाह करने का महत्व समझाया जाएगा। इस दौरान साप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरक कार्यक्रम के तहत स्कूल जाने वाली किशोरियों को साप्ताहिक आयरन की गोलियां दी जाएंगी। स्कूल न जाने वाली किशोरियों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोलियां देंगी।
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बताया जाएगा मोटे अनाज का महत्व
सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि बाहर के बजाय घर की बनी खाद्य सामग्री और मोटे अनाज में भरपूर पोषक तत्व होते हैं, लेकिन लोग इसके महत्व को समझ नहीं पा रहे। स्वास्थ्य कार्यकर्ता किशोरियों को एनीमिया की रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी देंगी। उन्हें घर की बनी और मोटे अनाज के सेवन की सलाह दी जाएगी। आयरन की गोलियां खाने का तरीके बताएंगी। आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मेथी, पालक, बथुआ, गुड़ व अन्य पौष्टिक खानपान की सलाह दी जाएगी। अंकुरित दालों को हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ खाने, विटामिन सी युक्त आहार में नींबू, संतरा, आंवला आदि का सेवन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

दवाओं के साथ खानपान का रखें ध्यान
आठ वर्ष की उम्र के बाद लड़कियों को अपनी सेहत का खासतौर से ध्यान रखने की जरूरत होती है। क्योंकि मासिक धर्म शुरू होते ही उनमें कई तरह के बदलाव आते हैं। ऐसी स्थिति में शरीर को आयरन, फॉलिक एसिड और रक्त में विटामिन बी 12 की कमी होना खतरनाक होता है। यही एनीमिया का कारण बनता है। यह कहना है डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के मेडिसिन विभाग के डॉ. विक्रम सिंह का। उन्होंने बताया कि मानव का शरीर लाल रुधिर कणिकाओं का उत्पादन करने के लिए आयरन का उपयोग करता है और रक्त, हीमोग्लोबिन की मदद से पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

ये हैं एनीमिया के लक्षण
एनीमिया होने पर थकावट लगने लगती है। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द, चक्कर जैसे लक्षण नजर आते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। खुद से कोई दवा प्रयोग नहीं करनी चाहिए। एनीमिया में ज्यादा दवा की जरूरत नहीं पड़ती है। बस खानपान दुरुस्त रखना पड़ता है। इसमें चना और गुड़, पत्तेदार सब्जियां सबसे कारगर मानी गई हैं।


सुबह से शाम तक रखें खानपान का ध्यान
केजीएमयू में कार्यरत डायटीशियन सेल्वी वर्मा ने बताया कि एनीमिक किशोरी को सुबह उठते ही एक गिलास नींबू पानी और फिर 10 ग्राम गुड़ लेना चाहिए। क रीब आधे घंटे बाद बिस्कुट के साथ चाय देना फायदेमंद रहता है। नाश्ते में एक गिलास दूध, करीब 50 ग्राम वेज दलिया या पोहा या ओट्स या इडली आदि ले सकते हैं। इसके बाद अंकुरित चना, सोयाबीन और किशमिश लेना चाहिए। मध्याह्न में 100 से दो सौ ग्राम तक अनार, संतरा, पपीता, केला, सेब, तरबूज आदि ले सकते हैं। फल मिक्स भी लिया जा सकता है और अलग-अलग दिन अलग फल का भी सेवन कर सकते हैं। इसके बाद चार चम्मच सत्तू पानी में घोलकर पीना फायदेमंद रहता है। दोपहर के भोजन में एक कटोरी दाल, 100 ग्राम चावल, तीन या चार रोटी, हरी सब्जी के साथ सलाद जरूर लेना चाहिए। शाम करीब चार बजे नाश्ते के रूप में अंडे की सफेदी अथवा पनीर लेना चाहिए। इसके बाद एक कप सब्जियों का सूप अथवा पालक या टमाटर का सूप लिया जा सकता है। इसी तरह रात को दोपहर में लिए गए भोजन की अपेक्षा कम मात्रा में भोजन लेना चाहिए। सोते समय एक गिलास दूध (200 एमएल) करीब 25 से 50 ग्राम गुड़ के साथ लिया जा सकता है।
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