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काफिले से अलग हो गए हैं, सिलसिले से अलग हो गए हैं...

Sun, 25 Mar 2018 11:16 PM IST
Updated Sun, 25 Mar 2018 11:16 PM IST
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काफिले से अलग हो गए हैं, सिलसिले से अलग हो गए हैं...
महमूदाबाद (सीतापुर)। संकटा देवी मंदिर में आयोजित वासंतिक नवरात्र के 15 दिवसीय मेले के सांस्कृतिक मंच पर कवि सम्मेलन में कवियों ने काव्य पाठ किया। सम सामयिक रचनाएं सुनाकर न सिर्फ श्रोताओं को लोटपोट किया, बल्कि उनकी जमकर तालियां भी बटोरीं। मंदिर समिति ने कानपुर से पधारे वरिष्ठ रचनाकार केके अग्निहोत्री को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। अतिथियों व कवियों ने स्थानीय रचनाकार कवि विनोद की काव्य कृति युगाख्यायिका का विमोचन किया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुर्सी क्षेत्र के विधायक साकेंद्र वर्मा ने कहा कि कविता प्राचीन काल से जनमानस व शासन को जगाने का कार्य करती आ रही है। कवि सम्मेलनों के माध्यम से लोगों को साहित्य के क्षेत्र में हो रहे प्रयोगों की भी जानकारी मिलती है। कवियों का सम्मान होना जरूरी है। कवि सम्मेलन का शुभारंभ लखनऊ की कवियत्री व्यंजना शुक्ल की वाणी वंदना ‘जिन चरणों की रज छूकर, तर गई अहिल्या नारी, उन चरणों की पुजारन बन मैं फिरती मारी-मारी’ से हुआ। कवि सम्मेलन में धारा 370, वंदे मातरम के महात्म्य को लेकर छंदों की रचना करने वाले प्रसिद्ध ओज के छंद लिखने वाले अतुल वाजपेयी ने ‘शांतिदूत कहलाकर श्वेत कपोत उड़ाकर चले गए, मेरे छोटे फोड़े को नासूर बनाकर चले गए’ सुनाकर श्रोताओं में देशभक्ति का संचार किया। कानपुर के व्यंग्यकार हास्य कवि डॉ. कमलेश द्विवेदी ने ‘पहले थे जंगल के बाबा, अब हैं न्यू मॉडल के बाबा, बाडी से हैं भारी भरकम, कैरेक्टर से हल्के बाबा’ जैसी पंक्तियां सुनाकर खूब हंसाकर तालियां बटोरीं। देश की ज्वलंत राजनीति व केंद्र में सत्तारूढ़ दल के महानायक आडवाणी के दर्द को अपनी पंक्तियों में कुछ इस प्रकार से बयां करते हुए कानपुर से आए प्रसिद्ध रचनाकार केके अग्निहोत्री ने सुनाया कि ‘काफिले से अलग हो गए हैं, सिलसिले से अलग हो गए हैं। जब गवाहों की सूची बनी, तो मामले से अलग हो गए। वीर रस के लखनऊ से आए रचनाकार प्रमोद द्विवेदी ने देश के सैनिकों को समर्पित करते हुए कहा कि ‘हम सच में हैं महाशक्ति, यह जग को बोध कराना है। पावन स्वप्न अब विश्व गुरू का, सच करके दिखलाना है’। मंच से स्थानीय कवि, साहित्यकार व मनीषी विनोद गुप्त व निवेदन मिश्र ने भी कविता पाठ किया। इससे पूर्व मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष आरके वाजपेयी, संरक्षिका डॉ. एमणि मिश्रा, त्रिलोकी नाथ मौय, अशोक नाग, अनूप सूरज, राजेंद्र राठौर, डॉ. महाराज सिंह, उमेश वर्मा आदि पदाधिकारियों ने कवियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। संचालन कवि रामकिशोर तिवारी ने किया। इस मौके पर उमाशंकर जैन, सत्यनरायन पुरवार, भाजपा नेता मोहन बारी, गोपी चन्द्र रस्तोगी, अशोक जैन, राजाराम यादव, अल्पना त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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