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मासूम की मौत पर जिला अस्पताल में हंगामा
Updated Sat, 30 Jun 2018 11:48 PM IST
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मासूम की मौत पर जिला अस्पताल में हंगामा
बाराबंकी। जिला अस्पताल में शनिवार को एक मासूम की मौत पर परिवारीजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया।
चिकित्सकों ने मृत बच्चे के परिवारीजनों को समझाकर शांत कराया व पीड़ित परिवार की मांग पर उन्हें शव वाहन उपलब्ध कराकर घर भेज दिया।
फतेहपुर कस्बा के मौलवीगंज निवासी सत्यनारायण शर्मा का डेढ़ वर्षीय पुत्र कुंदन 20 दिन से बुखार से पीड़ित था। शनिवार को हालत बिगड़ने पर उसे सीएचसी फतेहपुर में भर्ती कराया गया।
जहां चिकित्सकों ने कुंदन का प्राथमिक इलाज कर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचते ही कुंदन की मौत हो गई।
पीड़ित पिता का आरोप है कि जब बच्चा अस्पताल पहुंचा तो वहां मौजूद चिकित्सक उसे देखने तक नहीं आए, इसी वजह से उसकी मौत हो गई।
वहीं, ईएमओ डॉ. बीरेंद्र सिंह का कहना है कि शाम 05:55 बजे जब बच्चा आया था तो वहां मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएन मौर्य ने तुरंत उसे देखा था। मगर बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी।
परिवारीजनों ने शव वाहन की मांग की तो उन्हें बताया गया कि भर्ती मरीजों की मौत होने पर ही ये सेवा दी जाती है।
इस पर वह लोग भड़क गए और हंगामा करने लगे। बवाल बढ़ता देख पीड़ित परिवार को शव वाहन उपलब्ध कराकर भेज दिया गया।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके शुक्ल का कहना है कि, बच्चे को परिवारीजन मृत अवस्था में एंबुलेंस से लेकर आए थे। इलाज में किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। बच्चा एनीमिक था। शव वाहन से सभी को भेजा गया है।
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बाराबंकी। जिला अस्पताल में शनिवार को एक मासूम की मौत पर परिवारीजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया।
चिकित्सकों ने मृत बच्चे के परिवारीजनों को समझाकर शांत कराया व पीड़ित परिवार की मांग पर उन्हें शव वाहन उपलब्ध कराकर घर भेज दिया।
फतेहपुर कस्बा के मौलवीगंज निवासी सत्यनारायण शर्मा का डेढ़ वर्षीय पुत्र कुंदन 20 दिन से बुखार से पीड़ित था। शनिवार को हालत बिगड़ने पर उसे सीएचसी फतेहपुर में भर्ती कराया गया।
जहां चिकित्सकों ने कुंदन का प्राथमिक इलाज कर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचते ही कुंदन की मौत हो गई।
पीड़ित पिता का आरोप है कि जब बच्चा अस्पताल पहुंचा तो वहां मौजूद चिकित्सक उसे देखने तक नहीं आए, इसी वजह से उसकी मौत हो गई।
वहीं, ईएमओ डॉ. बीरेंद्र सिंह का कहना है कि शाम 05:55 बजे जब बच्चा आया था तो वहां मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएन मौर्य ने तुरंत उसे देखा था। मगर बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी।
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परिवारीजनों ने शव वाहन की मांग की तो उन्हें बताया गया कि भर्ती मरीजों की मौत होने पर ही ये सेवा दी जाती है।
इस पर वह लोग भड़क गए और हंगामा करने लगे। बवाल बढ़ता देख पीड़ित परिवार को शव वाहन उपलब्ध कराकर भेज दिया गया।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके शुक्ल का कहना है कि, बच्चे को परिवारीजन मृत अवस्था में एंबुलेंस से लेकर आए थे। इलाज में किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। बच्चा एनीमिक था। शव वाहन से सभी को भेजा गया है।
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