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रजिस्ट्री नहीं कराने पर निरस्त होगा 200 भवनों का आवंटन
Updated Mon, 30 Apr 2018 11:49 PM IST
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रजिस्ट्री नहीं कराने पर निरस्त होगा 200 भवनों का आवंटन
रायबरेली। शहर में आवासों का आवंटन कराने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं कराने वाले 200 आवंटियों पर आरडीए ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अपर मुख्य सचिव के आदेश पर आवंटियों को नोटिस जारी किया जा रहा है। जल्द से जल्द आवासों की रजिस्ट्री कराने के आदेश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर आवास का आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी गई है।
आरडीए ने आवासीय योजना में अमरेशपुरी कॉलोनी, मलिकमऊ योजना संख्या-8, इंदिरा नगर योजना, इंदिरा नगर विस्तार योजना, स्वराजनगर योजना, जवाहर विहार योजना, प्रगति पुरम योजना, गंधावा व्यवसायिक कांप्लेक्स आदि कॉलोनियों को विकसित कराकर अधिकांश आवंटियों को आवास के आवंटन कर दिए हैं। वर्तमान में प्राधिकरण द्वारा एकता विहार व अमोल विहार को विकसित करने का काम किया जा रहा है।
पिछले सप्ताह ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के अपर मुख्य सचिव मो. इफ्तेखारुद्दीन ने आरडीए का निरीक्षण किया था। अभिलेखों की जांच में करीब 200 ऐसे आवंटी मिले थे, जिन्होंने आवंटन के बाद आज तक आवासों की रजिस्ट्री नहीं कराई। इससे अपर मुख्य सचिव ने करोड़ों की स्टांप चोरी का का मामला पकड़ा था।
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अपर मुख्य सचिव ने आरडीए के अधिकारियों को आवासों की रजिस्ट्री का काम जल्द से जल्द पूरा कराने के आदेश दिए थे। इस पर आरडीए की ओर से सभी आवंटियों को नोटिस भेजकर भवनों की रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। सभी को चेतावनी दी जा रही है कि रजिस्ट्री नहीं कराने पर आवास का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
आरडीए से भवनों का आवंटन कराने के बाद तमाम आवंटियों ने पावर ऑफ एटार्नी देकर स्टांप चोरी करने का प्रयास किया। रजिस्ट्री नहीं होने के कारण आरडीए को राजस्व का नुकसान हो रहा है। तमाम आवंटी जिले से बाहर ही रहते हैं। उनके भवनों में दूसरे व्यक्ति ही रह रहे हैं। ये मामला अपर मुख्य सचिव के संज्ञान में आने के बाद आरडीए गंभीर हो गया है। भवनों के असली मालिकों का पता लगाया जा रहा है। आरडीए के हरकत में आने से आवंटियों में हड़कंप मच गया है।
वर्ष 2017-18 में विकास प्राधिकरण को फ्री होल्ड/लीजरेंट से आय मद में 85 लाख रुपये कमाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन इसके सापेक्ष आरडीए मात्र 22.63 लाख रुपये की आय ही जुटा पाया। हालांकि अपर मुख्य सचिव के आदेश पर आय बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है।
आरडीए के अधिशासी अभियंता एके राय ने बताया कि, जिन भवनों के आवंटियों ने अब तक रजिस्ट्री नहीं कराई है, उन्हें नोटिस देकर एक महीने का समय दिया जा रहा है। इसके बाद भी यदि रजिस्ट्री नहीं कराई जाती है तो भवनों के आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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रायबरेली। शहर में आवासों का आवंटन कराने के बाद भी रजिस्ट्री नहीं कराने वाले 200 आवंटियों पर आरडीए ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अपर मुख्य सचिव के आदेश पर आवंटियों को नोटिस जारी किया जा रहा है। जल्द से जल्द आवासों की रजिस्ट्री कराने के आदेश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर आवास का आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी गई है।
आरडीए ने आवासीय योजना में अमरेशपुरी कॉलोनी, मलिकमऊ योजना संख्या-8, इंदिरा नगर योजना, इंदिरा नगर विस्तार योजना, स्वराजनगर योजना, जवाहर विहार योजना, प्रगति पुरम योजना, गंधावा व्यवसायिक कांप्लेक्स आदि कॉलोनियों को विकसित कराकर अधिकांश आवंटियों को आवास के आवंटन कर दिए हैं। वर्तमान में प्राधिकरण द्वारा एकता विहार व अमोल विहार को विकसित करने का काम किया जा रहा है।
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पिछले सप्ताह ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के अपर मुख्य सचिव मो. इफ्तेखारुद्दीन ने आरडीए का निरीक्षण किया था। अभिलेखों की जांच में करीब 200 ऐसे आवंटी मिले थे, जिन्होंने आवंटन के बाद आज तक आवासों की रजिस्ट्री नहीं कराई। इससे अपर मुख्य सचिव ने करोड़ों की स्टांप चोरी का का मामला पकड़ा था।
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अपर मुख्य सचिव ने आरडीए के अधिकारियों को आवासों की रजिस्ट्री का काम जल्द से जल्द पूरा कराने के आदेश दिए थे। इस पर आरडीए की ओर से सभी आवंटियों को नोटिस भेजकर भवनों की रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। सभी को चेतावनी दी जा रही है कि रजिस्ट्री नहीं कराने पर आवास का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
आरडीए से भवनों का आवंटन कराने के बाद तमाम आवंटियों ने पावर ऑफ एटार्नी देकर स्टांप चोरी करने का प्रयास किया। रजिस्ट्री नहीं होने के कारण आरडीए को राजस्व का नुकसान हो रहा है। तमाम आवंटी जिले से बाहर ही रहते हैं। उनके भवनों में दूसरे व्यक्ति ही रह रहे हैं। ये मामला अपर मुख्य सचिव के संज्ञान में आने के बाद आरडीए गंभीर हो गया है। भवनों के असली मालिकों का पता लगाया जा रहा है। आरडीए के हरकत में आने से आवंटियों में हड़कंप मच गया है।
वर्ष 2017-18 में विकास प्राधिकरण को फ्री होल्ड/लीजरेंट से आय मद में 85 लाख रुपये कमाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन इसके सापेक्ष आरडीए मात्र 22.63 लाख रुपये की आय ही जुटा पाया। हालांकि अपर मुख्य सचिव के आदेश पर आय बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है।
आरडीए के अधिशासी अभियंता एके राय ने बताया कि, जिन भवनों के आवंटियों ने अब तक रजिस्ट्री नहीं कराई है, उन्हें नोटिस देकर एक महीने का समय दिया जा रहा है। इसके बाद भी यदि रजिस्ट्री नहीं कराई जाती है तो भवनों के आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।