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पचदेवरी गांव डूबने के कगार पर
Updated Wed, 30 Aug 2017 10:32 PM IST
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महसी (बहराइच)। घाघरा नदी खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गई है। गांवों से बाढ़ का पानी भी खिसक रहा है। लेकिन कटान काफी तेज हो गई है। महसी तहसील का पचदेवरी-चुरईपुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गया है।
गांव में तीन तरफ से घाघरा कटान कर रही है। सामने बाढ़ का पानी भरा हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव में 23 परिवारों के 210 लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। प्रशासन ने गांव खाली करने के निर्देश दे दिए हैं।
एनडीआरफ की टीम को ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने को कहा गया है। गांव में अफरातफरी की स्थिति बनी हुई है। इस बार रिकॉर्ड 20 दिन बाद घाघरा नदी खतरे के निशान से बुधवार दोपहर नीचे पहुंची।
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नदी का जलस्तर 105.886 मीटर रिकॉर्ड हुआ। नदी खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। जलस्तर में कमी के साथ ही महसी और कैसरगंज क्षेत्र से बाढ़ का पानी भी खिसकने लगा है। लेकिन कटान काफी तेज हो गई है।
अभी निचले इलाकों में बसे गांवों में बाढ़ का पानी बरकरार है। महसी तहसील का पचदेवरी गांव नदी के निशाने पर आ गया है। इस गांव में 23 मकान स्थित हैं। इन मकानों में 23 परिवारों के 210 लोग फंसे हुए हैं।
सामने बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिसके कारण रास्ता नहीं है। पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से घाघरा नदी कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ रही हैं। फासला महज 15 मीटर का बचा है। निकलने का रास्ता नहीं है।
इसकी सूचना मिलने के बाद तहसील प्रशासन भी सकते में आ गया। उप जिलाधिकारी नागेंद्र कुमार ने आननफानन में गांव को खाली करने के आदेश दे दिए हैं।
एसडीएम ने बताया कि नदी आधा मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कटान करते हुए बढ़ रही है। ऐसे में गांव पर खतरा मंडरा रहा है। एनडीआरएफ की टीम को ग्रामीणों को गांव से सुरक्षित निकालने के आदेश दिए गए हैं।
तटबंध और सड़क के किनारे बसाए जा रहे लोग
एसडीएम ने बताया कि बाढ़ व कटान प्रभावित इलाकों के लोगों को फिलहाल बेलहा-बेहरौली तटबंध और सड़क के किनारे बसाया जा रहा है।
पुनर्वास के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मुहैया होते ही सभी को आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिनके मकान कटे हैं या कट रहे हैं, उन्हें मुआवजा भी दिया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के इलाज की व्यवस्था के लिए सभी 41 बाढ़ चौकियाें का संचालन किया जा रहा है। लंगर भी चल रहा है।
चार और मकान कटे, 140 बीघा खेत नदी में समाए
महसी क्षेत्र में बाढ़ का पानी भले खिसक रहा है। लेकिन अब भी कैसरगंज और महसी सीमावर्ती क्षेत्र के 41 गांवों में बाढ़ की स्थिति बरकरार है।
कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन में दीनदयाल, बहोरी, राधे और मंशाराम के मकान नदी की भेंट चढ़ गए। दोनों तहसील क्षेत्रों में 140 बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी में समाहित हुई है।
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गांव में तीन तरफ से घाघरा कटान कर रही है। सामने बाढ़ का पानी भरा हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव में 23 परिवारों के 210 लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। प्रशासन ने गांव खाली करने के निर्देश दे दिए हैं।
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एनडीआरफ की टीम को ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने को कहा गया है। गांव में अफरातफरी की स्थिति बनी हुई है। इस बार रिकॉर्ड 20 दिन बाद घाघरा नदी खतरे के निशान से बुधवार दोपहर नीचे पहुंची।
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नदी का जलस्तर 105.886 मीटर रिकॉर्ड हुआ। नदी खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। जलस्तर में कमी के साथ ही महसी और कैसरगंज क्षेत्र से बाढ़ का पानी भी खिसकने लगा है। लेकिन कटान काफी तेज हो गई है।
अभी निचले इलाकों में बसे गांवों में बाढ़ का पानी बरकरार है। महसी तहसील का पचदेवरी गांव नदी के निशाने पर आ गया है। इस गांव में 23 मकान स्थित हैं। इन मकानों में 23 परिवारों के 210 लोग फंसे हुए हैं।
सामने बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिसके कारण रास्ता नहीं है। पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से घाघरा नदी कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ रही हैं। फासला महज 15 मीटर का बचा है। निकलने का रास्ता नहीं है।
इसकी सूचना मिलने के बाद तहसील प्रशासन भी सकते में आ गया। उप जिलाधिकारी नागेंद्र कुमार ने आननफानन में गांव को खाली करने के आदेश दे दिए हैं।
एसडीएम ने बताया कि नदी आधा मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कटान करते हुए बढ़ रही है। ऐसे में गांव पर खतरा मंडरा रहा है। एनडीआरएफ की टीम को ग्रामीणों को गांव से सुरक्षित निकालने के आदेश दिए गए हैं।
तटबंध और सड़क के किनारे बसाए जा रहे लोग
एसडीएम ने बताया कि बाढ़ व कटान प्रभावित इलाकों के लोगों को फिलहाल बेलहा-बेहरौली तटबंध और सड़क के किनारे बसाया जा रहा है।
पुनर्वास के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मुहैया होते ही सभी को आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिनके मकान कटे हैं या कट रहे हैं, उन्हें मुआवजा भी दिया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के इलाज की व्यवस्था के लिए सभी 41 बाढ़ चौकियाें का संचालन किया जा रहा है। लंगर भी चल रहा है।
चार और मकान कटे, 140 बीघा खेत नदी में समाए
महसी क्षेत्र में बाढ़ का पानी भले खिसक रहा है। लेकिन अब भी कैसरगंज और महसी सीमावर्ती क्षेत्र के 41 गांवों में बाढ़ की स्थिति बरकरार है।
कैसरगंज के गोड़हिया नंबर तीन में दीनदयाल, बहोरी, राधे और मंशाराम के मकान नदी की भेंट चढ़ गए। दोनों तहसील क्षेत्रों में 140 बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी में समाहित हुई है।