2013 बैच कलेक्टर बनने को बेकरार, अभी इनसे पहले के 70 आईएएस अफसरों को इंतजार
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प्रदेश में 2013 बैच के आईएएस अधिकारी कलेक्टर बनने का बेेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, कलेक्टर पोस्टिंग की दूसरी तस्वीर ये है कि अभी इनसे पहले के 2005 से 2012 बैच के करीब 70 आईएएस अधिकारी इस सपने के सच होने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें कई डायरेक्ट आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।
कई जिलों में डीएम लंबे समय से तैनात हैं और कई के खिलाफ जनप्रतिनिधियों की शिकायतें आम हैं। इधर पंचायत चुनाव कुछ दिनों के लिए टाले जाने की सुगबुगाहट है लेकिन इसके पहले प्रशासनिक फेरबदल पक्का माना जा रहा है। 2012 बैच के आईएएस अफसरों को फरवरी 2019 से ही कलेक्टर पद पर तैनाती मिलनी शुरू हो गई थी।
माना जा रहा है कि कोविड-19 महामारी न आती तो 2013 बैच के अफसरों की पोस्टिंग की शुरुआत हो जाती। ऐसे में आगे फील्ड में जब भी बड़े फेरबदल की शुरुआत होगी, 2013 बैच के कई अफसरों की पोस्टिंग तय मानी जा रही है। मगर, इस तबादले-पोस्टिंग की एक तस्वीर ये है कि लगभग हर वर्ष एक नए बैच के लिए कलेक्टरशिप की राह खुलती है और पीछे के बैच के तमाम अफसर इस होड़ से बाहर हो जाते हैं।
मसलन, 2005 बैच के आईएएस अधिकारी अगले वर्ष जनवरी में सचिव स्तर के अधिकारी बन जाएंगे। एक प्रमोटी अधिकारी ऐसे हैं जो लगभग सात वर्ष की आईएएस में सेवा पूरी करने वाले हैं लेकिन अब तक इस कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए हैं। अगले वर्ष मई में उनका रिटायरमेंट भी है।
बाहर से आने वालों के भी सपने अधूरे
इसी तरह 2006 बैच के चार ऐसे अफसर हैं जिन्हें डीएम की कुर्सी तक पहुंचने का अभी तक मौका नहीं मिला है। इनमें दो डायरेक्ट हैं तो दो प्रमोटी। बताया जा रहा है कि 2005 से 2012 बैच के बीच जिन 70 आईएएस अफसरों को कलेक्टर बनने का इंतजार है, उनमें 8 डायरेक्ट और 62 प्रमोटी शामिल हैं। 2007 बैच में यूपी में कार्यरत हर अफसर या तो कलेक्टर है या रह चुका है। 2013 बैच के 25 आईएएस अधिकारी हैं। इससे कलेक्टर के लिए चयन में पीछे छूटे कई अफसरों की राह और कठिन होने वाली है।
दूसरे काडर के कई अफसर अपने गृह राज्य में अंतर्राज्यीय प्रतिनियुक्ति पर तय समय के लिए आते हैं। इनमें कई अपने प्रदेश में फील्ड में काम की मंशा के साथ आते हैं। वरना, जिस राज्य से वह चयनित हुए, वहां तो उन्हें हर तरह के अवसर होते ही हैं। मगर, इनमें कई अफसरों के लिए लंबा समय बीतने के बावजूद यह सपना अधूरा ही है। वे शासन में इधर से उधर पोस्टिंग पर समय बिता रहे हैं। कुछ लंबा-लंबा समय भी पाने में सफल रहे हैं।
सर्वश्रेष्ठ व समीकरण समेत साइडलाइन के कई कारण
सरकार की सफलता और विफलता काफी हद तक अच्छे अफसरों की तैनाती पर निर्भर करती है। अधिकारी अधिक और पद कम होने की वजह से सरकार के पास सर्वश्रेष्ठ चयन का अच्छा विकल्प होता है और इस वजह से कई लोग होड़ से बाहर छूट सकते हैं। मगर, पिछले डेढ़-दो दशक से इस कुर्सी के लिए पारिवारिक बैकग्राउंड, सियासी संपर्क, बड़ों की वंदना और कई बार जातीय समीकरण की छौंक जिस तरह नजर आती है, उसने सर्वश्रेष्ठ की धारणा को कमजोर किया है। वह शासन में तैनात कई डायरेक्ट व प्रमोटी अफसरों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि इनकी योग्यता, ईमानदारी, सर्विस रिकॉर्ड व परफॉर्मेंस फील्ड में तैनात कई अफसरों से बहुत बेहतर है। मगर, समीकरण में सेट न होने से ये बार-बार चूक जाते हैं।
इन्हें अभी भी कलेक्टर की कुर्सी का इंतजार
बैच वर्ष संख्या
2005 1
2006 4
2007 --
2008 4
2009 7
2010 9
2011 5
2012 40