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तीन राज्यों में हार के बाद कांग्रेसी किलों की घेराबंदी में जुटी भाजपा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 14 Dec 2018 01:31 AM IST
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कांग्रेस-
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मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सत्ता छिन जाने की चिंता के बीच भाजपा ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेसी किलों रायबरेली और अमेठी के साथ अन्य विपक्षी सूरमाओं की घेराबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी नेतृत्व ने इसके लिए विकास के साथ सरोकारों के एजेंडे पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। पर्दे के पीछे से तो इन किलों पर भाजपा का झंडा फहराने की रणनीति पर काम पहले ही शुरू हो गया था। पर, अब जब अगले साल लोकसभा का चुनावी समर सजना है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रणनीति को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है।
मोदी इसकी शुरुआत 16 दिसंबर को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के क्षेत्र रायबरेली से करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री उस दिन रायबरेली में कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। साथ ही सभा भी करेंगे। मोदी की सभा एक तरह से लोकसभा चुनाव के अभियान की शुरुआत होगी।
गढ़ के साथ जड़ पर भी नजर
सोनिया के पुत्र और कांग्रेस के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र में तो फिलहाल मोदी का अभी कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। पर, पार्टी के एक उच्चपदस्थ नेता का दावा है कि जल्द ही उनका अमेठी का भी कार्यक्रम तय हो सकता है। वैसे भी अमेठी में मोदी ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पहले से ही सक्रिय कर रखा है। वह विकास के मुद्दे पर लगातार राहुल को घेर रही हैं। अभी पिछले दिनों ही अमेठी में बड़ा कार्यक्रम करके ईरानी कई कामों की शुरुआत करा चुकी हैं।
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ऐसा माना जाता है कि रायबरेली की सभा में प्रधानमंत्री के निशाने पर किसी न किसी रूप में अमेठी भी रहेगी। रायबरेली के बाद मोदी प्रयागराज जाएंगे। प्रयागराज को फिलहाल कांग्रेस का गढ़ तो नहीं कहा जा सकता लेकिन कांग्रेस की जड़ों से जुड़ा होेने के कारण मोदी का एक ही दिन रायबरेली व प्रयागराज जाना सिर्फ संयोग भर नहीं है। इसके पीछे कहीं न कहीं सियासी समीकरण भी हैं। मोदी रायबरेली में सियासी संग्राम की शुरुआत करेंगे तो प्रयागराज में अगले महीने शुरू होने वाले कुंभ के मद्देनजर कई कामों की शुरुआत और सभा कर सियासी चौसर पर हिंदुत्व के सरोकारों के समीकरण सजाएंगे।
यह है वजह
राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो हिंदी हृदयस्थल के इन तीन प्रदेशों में सत्ता छिन जाना भाजपा के लिए बड़ा झटका है। साथ ही भाजपा के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ नारे के लिए बड़ी चुनौती है। भाजपा के रणनीतिकारों की कोशिश है कि इन तीन राज्यों में भाजपा की पराजय से उत्साहित सोनिया और राहुल उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ अभियान तेज करें, उससे पहले ही इन दोनों को उनके क्षेत्रों में ही घेर लिया जाए। मोदी का रायबरेली दौरा उसी रणनीति का हिस्सा लगता है। भले ही यह दौरा चुनाव परिणाम आने से पहले तय हो चुका हो। पिछले दिनों रायबरेली में भाजपा की तरफ से यह कहते हुए हमला बोला जा चुका है कि लंबे समय से कांग्रेस की सत्ता होने के बावजूद रायबरेली में एक विश्वविद्यालय और बड़ा स्टेडियम तक नहीं बन पाया। लोगों के रोजगार पर भी ध्यान नहीं दिया गया और पहले से स्थापित फैक्टरियां, कारखाने और अन्य संस्थान दम तोड़ गए।
विकास के सहारे समीकरण साधने की कोशिश
भाजपा के रणनीतिकारों ने विकास के एजेंडे के सहारे विपक्षी सूरमाओं के गढ़ों में घुसपैठ को मजबूूत बनाने की तैयारी की है। केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य अरुण जेटली ने रायबरेली को नोडल जिला बनाकर सोनिया गांधी की घेराबंदी की है। मतलब जेटली की निधि से रायबरेली में विकास कार्य कराए जाएंगे। जेटली के सांसद प्रतिनिधि हीरो वाजपेयी पिछले दिनों रायबरेली मेें विश्वविद्यालय और स्टेडियम बनवाने की घोषणा कर चुके हैं। इससे पहले अगस्त में रायबरेली में एम्स की ओपीडी शुरू होते वक्त भाजपा ने कांग्रेस और सपा को घेरा था।
विपक्ष के अन्य सूरमाओं के गढ़ों पर भी नजर
आजमगढ़, बदायूं, मैनपुरी, कन्नौज और फिरोजाबाद पर भाजपा ने अभी से सियासी घेराबंदी शुरू कर दी है। इन स्थानों की जिम्मेदारी भी जल्द ही पार्टी के किसी न किसी बड़े चेहरे को सौंपने का फैसला किया गया है। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और शिवप्रताप शुक्ल भी शामिल हैं। दोनों लोग उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य भी हैं। आजमगढ़ से पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, बदायूं से मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव, कन्नौज से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव, मैनपुरी से तेजप्रताप सिंह यादव और फिरोजाबाद से मुलायम के भतीजे और प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव सांसद हैं। भाजपा ने इन सभी स्थानों पर अपने राज्यसभा सदस्यों को जुटाने की रणनीति बनाई है। उत्तर प्रदेश से भाजपा के 11 राज्यसभा सदस्य हैं।
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मोदी इसकी शुरुआत 16 दिसंबर को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के क्षेत्र रायबरेली से करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री उस दिन रायबरेली में कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। साथ ही सभा भी करेंगे। मोदी की सभा एक तरह से लोकसभा चुनाव के अभियान की शुरुआत होगी।
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गढ़ के साथ जड़ पर भी नजर
सोनिया के पुत्र और कांग्रेस के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र में तो फिलहाल मोदी का अभी कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। पर, पार्टी के एक उच्चपदस्थ नेता का दावा है कि जल्द ही उनका अमेठी का भी कार्यक्रम तय हो सकता है। वैसे भी अमेठी में मोदी ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पहले से ही सक्रिय कर रखा है। वह विकास के मुद्दे पर लगातार राहुल को घेर रही हैं। अभी पिछले दिनों ही अमेठी में बड़ा कार्यक्रम करके ईरानी कई कामों की शुरुआत करा चुकी हैं।
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ऐसा माना जाता है कि रायबरेली की सभा में प्रधानमंत्री के निशाने पर किसी न किसी रूप में अमेठी भी रहेगी। रायबरेली के बाद मोदी प्रयागराज जाएंगे। प्रयागराज को फिलहाल कांग्रेस का गढ़ तो नहीं कहा जा सकता लेकिन कांग्रेस की जड़ों से जुड़ा होेने के कारण मोदी का एक ही दिन रायबरेली व प्रयागराज जाना सिर्फ संयोग भर नहीं है। इसके पीछे कहीं न कहीं सियासी समीकरण भी हैं। मोदी रायबरेली में सियासी संग्राम की शुरुआत करेंगे तो प्रयागराज में अगले महीने शुरू होने वाले कुंभ के मद्देनजर कई कामों की शुरुआत और सभा कर सियासी चौसर पर हिंदुत्व के सरोकारों के समीकरण सजाएंगे।
यह है वजह
राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो हिंदी हृदयस्थल के इन तीन प्रदेशों में सत्ता छिन जाना भाजपा के लिए बड़ा झटका है। साथ ही भाजपा के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ नारे के लिए बड़ी चुनौती है। भाजपा के रणनीतिकारों की कोशिश है कि इन तीन राज्यों में भाजपा की पराजय से उत्साहित सोनिया और राहुल उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ अभियान तेज करें, उससे पहले ही इन दोनों को उनके क्षेत्रों में ही घेर लिया जाए। मोदी का रायबरेली दौरा उसी रणनीति का हिस्सा लगता है। भले ही यह दौरा चुनाव परिणाम आने से पहले तय हो चुका हो। पिछले दिनों रायबरेली में भाजपा की तरफ से यह कहते हुए हमला बोला जा चुका है कि लंबे समय से कांग्रेस की सत्ता होने के बावजूद रायबरेली में एक विश्वविद्यालय और बड़ा स्टेडियम तक नहीं बन पाया। लोगों के रोजगार पर भी ध्यान नहीं दिया गया और पहले से स्थापित फैक्टरियां, कारखाने और अन्य संस्थान दम तोड़ गए।
विकास के सहारे समीकरण साधने की कोशिश
भाजपा के रणनीतिकारों ने विकास के एजेंडे के सहारे विपक्षी सूरमाओं के गढ़ों में घुसपैठ को मजबूूत बनाने की तैयारी की है। केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य अरुण जेटली ने रायबरेली को नोडल जिला बनाकर सोनिया गांधी की घेराबंदी की है। मतलब जेटली की निधि से रायबरेली में विकास कार्य कराए जाएंगे। जेटली के सांसद प्रतिनिधि हीरो वाजपेयी पिछले दिनों रायबरेली मेें विश्वविद्यालय और स्टेडियम बनवाने की घोषणा कर चुके हैं। इससे पहले अगस्त में रायबरेली में एम्स की ओपीडी शुरू होते वक्त भाजपा ने कांग्रेस और सपा को घेरा था।
विपक्ष के अन्य सूरमाओं के गढ़ों पर भी नजर
आजमगढ़, बदायूं, मैनपुरी, कन्नौज और फिरोजाबाद पर भाजपा ने अभी से सियासी घेराबंदी शुरू कर दी है। इन स्थानों की जिम्मेदारी भी जल्द ही पार्टी के किसी न किसी बड़े चेहरे को सौंपने का फैसला किया गया है। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और शिवप्रताप शुक्ल भी शामिल हैं। दोनों लोग उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य भी हैं। आजमगढ़ से पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, बदायूं से मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव, कन्नौज से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव, मैनपुरी से तेजप्रताप सिंह यादव और फिरोजाबाद से मुलायम के भतीजे और प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव सांसद हैं। भाजपा ने इन सभी स्थानों पर अपने राज्यसभा सदस्यों को जुटाने की रणनीति बनाई है। उत्तर प्रदेश से भाजपा के 11 राज्यसभा सदस्य हैं।