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बाढ़ के पानी में डूबकर 24 की जा चुकी जान
Updated Sun, 20 Aug 2017 11:03 PM IST
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बहराइच/श्रावस्ती। बाढ़ के कहर में अब तक बहराइच व श्रावस्ती जिलों में 24 लोगों की जान जा चुकी है। श्रावस्ती में दो शवों की पहचान नहीं हो सकी है।
बहराइच में घाघरा नदी प्रतिवर्ष जनपद के चार तहसील क्षेत्रों में तबाही मचाती है। सबसे अधिक महसी और कैसरगंज तहसील प्रभावित होती है। तो वहीं घाघरा और सरयू की आंशिक चपेट में आकर नानपारा और मोतीपुर तहसील के गांव भी बाढ़ प्रभावित हो जाते हैं। प्रशासनिक आंकड़ों पर गौर करें तो बीते एक सप्ताह के अंदर एक मासूम समेत तीन लोगों की बाढ़ में डूबकर मौत हो गई है। जिसके चलते अब बाढ़ में मरने वालों की संख्या 15 के करीब पहुंच गई है। अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय का कहना है कि बाढ़ में मरने वाले सभी लोगों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। किसी के भी लापता होने की सूचना नहीं आई है। सभी पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता मुहैया करायी जा रही है।
वहीं रावस्ती में राप्ती नदी के तांडव का निशान जिले भर में दिखाई दे रहे हैं। बाढ़ के दौरान जिले में नौ लाशें सड़ी हुई स्थिति में मिलीं। इनमें से डेहरिया निवासी बनवासी (30) पुत्र बहादुर, जानकी नगर खुर्द निवासी प्रहलाद (45) पुत्र रामउजागर, सेमरी तरहर निवासी राकेश (30) पुत्र कोयली, मसहाकला के मजरा लोनियनपुरवा निवासी कुन्ने (30) पुत्र मन्नीलाल, घुमना निवासी रामकिशन यादव (4) पुत्र छोटकऊ, मनिकापुर निवासी आयाराम वर्मा (28) पुत्र रामनारायण वर्मा तथा सोनपुर निवासी राचंदर (42) पुत्र बुधराम की पहचान उनके परिवारीजनों ने की। उधर कसियापुर व नारायणपुर के पास दो अज्ञात लोगों के शव मिले। वहीं जेल के पीछे बाढ़ के दौरान बहती हुई लाश देखी गई। उसे जब तक निकाला जाता तब तक वह आगे बह गई। वहीं ककरदरी निवासी गोली भुज बाढ़ देखने गया था। इस दौरान राप्ती नदी में गिर गया, उसका आज तक पता नहीं चला है।
बाक्स में-
नेपाल में भी कहर बनी नदी
नदी का कहर नेपाल के कई गांवों में भी रहा। बांके जिला स्थित गांव सोनबरसा, चौकेरी, गंगापुर, मटहिया, उदरबेटवा, भोज भगवानपुर, मटहिया, गजराज भगड़ा में भी राप्ती ने अपना कहर बरपाया था। इस क्षेत्र से 76 लोग बाढ़ के दौरान गायब हो गए। कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि वह राप्ती में बहकर भारतीय क्षेत्र में चले गए हैं। बाढ़ खत्म होने के बाद उदरबेटवा गांव के शेर सिंह, नंदलाल, मुंशी, तेजराम व अशरफ सहित कुछ अन्य ग्रामीण उनकी तलाश में जमुनहा सहित भिनगा क्षेत्र में आए थे।
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बहराइच में घाघरा नदी प्रतिवर्ष जनपद के चार तहसील क्षेत्रों में तबाही मचाती है। सबसे अधिक महसी और कैसरगंज तहसील प्रभावित होती है। तो वहीं घाघरा और सरयू की आंशिक चपेट में आकर नानपारा और मोतीपुर तहसील के गांव भी बाढ़ प्रभावित हो जाते हैं। प्रशासनिक आंकड़ों पर गौर करें तो बीते एक सप्ताह के अंदर एक मासूम समेत तीन लोगों की बाढ़ में डूबकर मौत हो गई है। जिसके चलते अब बाढ़ में मरने वालों की संख्या 15 के करीब पहुंच गई है। अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय का कहना है कि बाढ़ में मरने वाले सभी लोगों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है। किसी के भी लापता होने की सूचना नहीं आई है। सभी पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता मुहैया करायी जा रही है।
वहीं रावस्ती में राप्ती नदी के तांडव का निशान जिले भर में दिखाई दे रहे हैं। बाढ़ के दौरान जिले में नौ लाशें सड़ी हुई स्थिति में मिलीं। इनमें से डेहरिया निवासी बनवासी (30) पुत्र बहादुर, जानकी नगर खुर्द निवासी प्रहलाद (45) पुत्र रामउजागर, सेमरी तरहर निवासी राकेश (30) पुत्र कोयली, मसहाकला के मजरा लोनियनपुरवा निवासी कुन्ने (30) पुत्र मन्नीलाल, घुमना निवासी रामकिशन यादव (4) पुत्र छोटकऊ, मनिकापुर निवासी आयाराम वर्मा (28) पुत्र रामनारायण वर्मा तथा सोनपुर निवासी राचंदर (42) पुत्र बुधराम की पहचान उनके परिवारीजनों ने की। उधर कसियापुर व नारायणपुर के पास दो अज्ञात लोगों के शव मिले। वहीं जेल के पीछे बाढ़ के दौरान बहती हुई लाश देखी गई। उसे जब तक निकाला जाता तब तक वह आगे बह गई। वहीं ककरदरी निवासी गोली भुज बाढ़ देखने गया था। इस दौरान राप्ती नदी में गिर गया, उसका आज तक पता नहीं चला है।
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नेपाल में भी कहर बनी नदी
नदी का कहर नेपाल के कई गांवों में भी रहा। बांके जिला स्थित गांव सोनबरसा, चौकेरी, गंगापुर, मटहिया, उदरबेटवा, भोज भगवानपुर, मटहिया, गजराज भगड़ा में भी राप्ती ने अपना कहर बरपाया था। इस क्षेत्र से 76 लोग बाढ़ के दौरान गायब हो गए। कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि वह राप्ती में बहकर भारतीय क्षेत्र में चले गए हैं। बाढ़ खत्म होने के बाद उदरबेटवा गांव के शेर सिंह, नंदलाल, मुंशी, तेजराम व अशरफ सहित कुछ अन्य ग्रामीण उनकी तलाश में जमुनहा सहित भिनगा क्षेत्र में आए थे।
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