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डालीगंज स्टेशन पर खुदाई में मिली 189 साल पुरानी सुरंग

Mon, 11 Apr 2016 09:00 AM IST
नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ
नीरज ‘अम्बुज’/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 11 Apr 2016 09:00 AM IST
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189 years old cave found in Lucknow.
सुरंग का एक दृश्य - फोटो : amar ujala

डालीगंज स्टेशन पर अमान परिवर्तन के लिए हो रही खुदाई में 189 साल पुरानी सुरंग मिली है। इतिहासकारों का दावा है कि यह सुरंग अवध के आठवें शासक नसीरुद्दीन हैदर के जमाने में बनवाई गई है, जो शिया कॉलेज के पीछे स्थित कर्बला को गोमती नदी से जोड़ती है।

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सुरंग करीब 5 मीटर चौड़ी व सात मीटर गहरी है, जिसमें से घोड़े आसानी से गुजर सकते हैं। सुरंग मिलने के बाद फिलहाल खोदाई का काम रोक दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, इतिहासकारों व आम आदमियों के लिए यह सुरंग दिलचस्पी का केंद्र बन गई है। पूर्वोत्तर रेलवे के ऐशबाग सीतापुर रेलखंड पर मीटरगेज की पटरियों को उखाड़कर ब्रॉडगेज की लाइन बिछाने के लिए खोदाई का काम चल रहा है।
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खुदाई के दौरान ही जब मशीन ऐतिहासिक सुरंग की ईंटों से टकराई तो कर्मचारियों की उत्सुकता बढ़ गई। कुछ और खुदाई होने पर सुरंग ऊपर से करीब दो फीट टूट गई और गड्ढा हो गया। कर्मचारियों ने इसकी सूचना रेलवे अफसरों को दी जिसके बाद काम रोक दिया गया है।

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कर्बला के लिए गोमती से लाते थे पानी

189 years old cave found in Lucknow.
ये इतिहासकारों के लिए भी बड़ा आकर्षण बन गई - फोटो : amar ujala

इतिहासकार रोशनी तकी ने बताया कि शिया कॉलेज स्थित कर्बला 1834 से 1836 में बनी। इसमें शासक नसीरुद्दीन अपनी बीवी कुदसिया बेगम के साथ दफन हैं।

चूंकि, लखनऊ में करीब आठ महीने गर्मी पड़ती है, इसलिए यह सुरंग बनवाई गई ताकि कर्बला को गोमती नदी से जोड़ा जा सके और लोग आसानी से वहां तक का रास्ता तय कर सकें। सुरंग शिया कॉलेज के दूसरी ओर स्थित कर्बला से भी जुड़ती है। यानी इसकी लंबाई करीब 3.5 किमी हो सकती है।

अंग्रेजों ने वर्ष 1902 में कराई थी मरम्मत
सुरंग में 114 साल पुरानी यानी 1902 की बनी ईंटें मिली हैं। रोशन तकी बताते हैं कि सुरंग नसीरुद्दीन के जमाने में ही बनी, लेकिन जब अंग्रेजों की हुकूमत आई तो उन्होंने अपनी सहूलियत के हिसाब से ट्रंक के रूप में इसका इस्तेमाल किया। इसके लिए 1902 में इसकी मरम्मत हुई। आजादी के बाद जब सुरंगों को बंद किया गया तो इसे भी ढक दिया गया।

जांच करने के लिए भेजी गई टीम

189 years old cave found in Lucknow.
मरम्मत में प्रयुक्‍त हुईं 1902 की ईंटें - फोटो : amar ujala

इस पर एएसआई लखनऊ सर्किल के सुपरिंटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट नवरत्न कुमार पाठक का कहना है कि‘सुरंग को जांचने-परखने के लिए एएसआई की टीम भेजी जाएगी। यह टीम विभिन्न पक्षों की पड़ताल करेगी, उसके बाद ही इसकी ऐतिहासिकता के बारे में कुछ कहा जा सकता है।’

वहीं, पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ संजय यादव का कहना है ‘रेलवे की खुदाई के दौरान ऐसे स्ट्रक्चर मिलने की बात नई नहीं है। पुरातत्व विभाग के अफसरों को इस मामले में पूरा सहयोग दिया जाएगा।’

... तो क्या सुरंग के चलते शिफ्ट होगा ब्रॉड गेज

189 years old cave found in Lucknow.

पूर्वोत्तर रेलवे के ऐशबाग रेलखंड के आमान परिवर्तन के लिए हो रही खुदाई के दौरान मिली 189 साल पुरानी सुरंग के बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या ब्राड गेज का काम शिफ्ट किया जाएगा।

ऐशबाग सीतापुर रेलखंड पर बनी छोटी लाइन की जगह ब्रॉड गेज किया जाना है। इसके लिए स्टेशन पर खुदाई चल रही है। आशंका है कि इस ऐतिहासिक सुरंग पर रेल की पटरियां बिछाने की योजना पर अड़ंगा लग सकता है। फिलहाल इस सवाल पर रेलवे अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।

1886 में बना डालीगंज स्टेशन
भारत में रेलवे का आगमन 1853 में हुआ। जिसकेबाद इसका विस्तार निरंतर होता रहा है। जब लखनऊ से मीटरगेज ट्रेनें चलाने का रूट तय हुआ तो ऐशबाग व डालीगंज स्टेशन बनाया गया। हालांकि, रेलवे के पास इसके इतिहास से जुड़े साक्ष्य नहीं हैं। पर, स्टेशन पर तैनात पूर्व रेलवे अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन करीब 130 साल पुराना है। इसकी उम्र का अंदाजा इसी से लगाया गया कि इस स्टेशन को 1886 में मीटरगेज से जोड़ा गया था।

बदल जाएगा स्टेशन का स्वरूप
आमान परिवर्तन के दौरान स्टेशन का प्रारूप पूरी तरह बदल जाएगा। खोदाई के रास्ते में आ रहा मुख्य स्टेशन ढहा दिया जाएगा, जिसकेबाद उपकरण एवं मशीनों को नई बन रही बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा। सेकेंड एंट्री गेट मुख्य डालीगंज स्टेशन होगा और सीतापुर रोड की ओर खुलेगा। प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए कैब वे बनेगा, पाथ वे व यात्री सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा।

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