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छठी मइया से पुकार, चमकै अंचरा सेंदुरवा...
Updated Thu, 26 Oct 2017 10:35 PM IST
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बहराइच। डालाछठ के अवसर पर गुरुवार को महिलाएं तालाब और नदी के तट पर एकत्रित हुईं। महिलाओं ने अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को नमन करते हुए अर्घ्य दिया। पुत्रों के दीर्घायु होने के साथ ही परिवार के सुख समृद्धि की भी कामना करते हुए लोकगीतों के माध्यम सूर्य की उपासना करते हुए परंपरा का निर्वहन किया। छठी मइया से पुकार, चमकै अंचरा सेंदुरवा, छठी मइया नीके राखेव, हमरा घर और दुअरवा लोकगीतों से नदी, तालाब और नहरों के तट गूंजते रहे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शहर, कस्बों व ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह भगवान सूर्य की पूजा की गई। अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना के कारण पूजा स्थलों पर मेले सा माहौल रहा।
डाला छठ को सूर्य षष्ठी का पर्व भी कहा जाता है। गुरुवार को पर्व के तीसरे दिन शाम ढलते ही शहर, गांव और कस्बो में पूजित तालाब, नदियों व नहर के तट पर महिलाएं पूजा का थाल सजाकर पहुंच गईं। महिलाआें ने ओम भाष्करायनम: का जप करते हुए भगवान सूर्य को नमन कर घुटने पर पानी में खड़े होकर जल का तर्पण किया। इसके बाद बांस के सूप में रखे फल, सब्जी और गन्ने का अर्पण कर भगवान सूर्य से अक्षय सुहाग के साथ पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की। सुख समृद्धि का भी वरदान मांगा। शहर के छोटी बेरिया समय माता मंदिर स्थित तालाब व झिंगहाघाट स्थित सरयू तट पर भगवान सूर्य की आराधना के लिए महिलाओं की भीड़ रह-रह कर उमड़ती रही। जबकि रुपईडीहा में हनुमंत सरोवर व नेपालगंज में बागेश्वरी मंदिर के सामने स्थित सरोवर में महिलाओं ने परंपरागत तरीके से भगवान सूर्य की आराधना करते हुए मन्नत मांगी। उर्रा में सोतिया नाला के तट पर अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना की गई। नानपारा में कालीकुंडा सरोवर व मिहींपुरवा में गोपिया गांव के निकट सरयू नदी के तट पर महिलाओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर परंपरा का निर्वहन किया। इस मौके पर हर जगह मेले सा माहौल रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह पुलिस के जवान भी मुस्तैद रहे।
गुरुवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महिलाओं ने पूरी रात जागरण कर भगवान सूर्य की आराधना की। शुक्रवार सुबह उदीयमान सूर्य को जल का तर्पण कर महिलाओं ने व्रत तोड़ा। इसके लिए भी पूजा स्थलों पर पूजा समितियों की ओर से स्टाल लगाए गए हैं।
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गुरुवार शाम को छठ पूजा की धूम रही। महिलाओं ने समूह में छठ मइया के गीत गाए। फल और पूजा सामग्री के साथ गंगा में दीप जलाया। वहीं कुछ महिलाओं के बीमार होने पर उनके पतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। मिहींपुरवा, उर्रा, कैलाशपुरी, रिसिया के सहनवाजपुर, रुपईडीहा में महिला के अशक्त होने पर उनके पति ने सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर सुख समृद्धि का वरदान मांगा।
कुछ महिलाओं ने मन्नत पूरी होने पर घरों में कोसी भरने की परंपरा का निर्वहन किया। इस मौके पर जरही नहर पुल पर मेला जैसा दृश्य रहा। बच्चे व महिलाओं तथा पुरुषों ने अपने माथे पर बास की टोकरी रखकर घाट तक पहुंचे।
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डाला छठ को सूर्य षष्ठी का पर्व भी कहा जाता है। गुरुवार को पर्व के तीसरे दिन शाम ढलते ही शहर, गांव और कस्बो में पूजित तालाब, नदियों व नहर के तट पर महिलाएं पूजा का थाल सजाकर पहुंच गईं। महिलाआें ने ओम भाष्करायनम: का जप करते हुए भगवान सूर्य को नमन कर घुटने पर पानी में खड़े होकर जल का तर्पण किया। इसके बाद बांस के सूप में रखे फल, सब्जी और गन्ने का अर्पण कर भगवान सूर्य से अक्षय सुहाग के साथ पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की। सुख समृद्धि का भी वरदान मांगा। शहर के छोटी बेरिया समय माता मंदिर स्थित तालाब व झिंगहाघाट स्थित सरयू तट पर भगवान सूर्य की आराधना के लिए महिलाओं की भीड़ रह-रह कर उमड़ती रही। जबकि रुपईडीहा में हनुमंत सरोवर व नेपालगंज में बागेश्वरी मंदिर के सामने स्थित सरोवर में महिलाओं ने परंपरागत तरीके से भगवान सूर्य की आराधना करते हुए मन्नत मांगी। उर्रा में सोतिया नाला के तट पर अस्ताचलगामी सूर्य की उपासना की गई। नानपारा में कालीकुंडा सरोवर व मिहींपुरवा में गोपिया गांव के निकट सरयू नदी के तट पर महिलाओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर परंपरा का निर्वहन किया। इस मौके पर हर जगह मेले सा माहौल रहा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह पुलिस के जवान भी मुस्तैद रहे।
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गुरुवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद महिलाओं ने पूरी रात जागरण कर भगवान सूर्य की आराधना की। शुक्रवार सुबह उदीयमान सूर्य को जल का तर्पण कर महिलाओं ने व्रत तोड़ा। इसके लिए भी पूजा स्थलों पर पूजा समितियों की ओर से स्टाल लगाए गए हैं।
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गुरुवार शाम को छठ पूजा की धूम रही। महिलाओं ने समूह में छठ मइया के गीत गाए। फल और पूजा सामग्री के साथ गंगा में दीप जलाया। वहीं कुछ महिलाओं के बीमार होने पर उनके पतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। मिहींपुरवा, उर्रा, कैलाशपुरी, रिसिया के सहनवाजपुर, रुपईडीहा में महिला के अशक्त होने पर उनके पति ने सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर सुख समृद्धि का वरदान मांगा।
कुछ महिलाओं ने मन्नत पूरी होने पर घरों में कोसी भरने की परंपरा का निर्वहन किया। इस मौके पर जरही नहर पुल पर मेला जैसा दृश्य रहा। बच्चे व महिलाओं तथा पुरुषों ने अपने माथे पर बास की टोकरी रखकर घाट तक पहुंचे।