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यूपी सरकार का बड़ा फैसला, 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित का दिया दर्जा

Fri, 23 Dec 2016 02:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 23 Dec 2016 02:31 AM IST
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 17 back castes to be in sc list.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala

यूपी विधानसभा चुनाव से ऐन पहले अखिलेश सरकार ने 17 अति पिछड़ी जातियों को लुभाने के लिए उन्हें प्रदेश में अनुसूचित जाति का दर्जा देने का दांव चला है।

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बृहस्पतिवार को  कैबिनेट की बैठक में इन जातियों को प्रदेश में एससी के रूप में परिभाषित करने की मंजूरी दे दी गई। शासनादेश जारी होने के बाद इन जातियों को प्रदेश में अनुसूचित जाति का लाभ मिलेगा। इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया है।
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चुनाव के लिहाज से इन 17 जातियों का वोट प्रदेश में चुनावी तस्वीर बदलने की स्थिति में हैं। इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल शिल्पकार, मझवार, गौड़, बलदार और तुरैया की उपजाति के रूप में परिभाषित किया गया है।
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इनकी उप‌जातियों में शामिल होने के बाद 17 जातियों को प्रदेश में अनसूचित जाति के आरक्षण का लाभ मिलेगा।

ये जातियां हुई एससी के रूप में परिभाषित

 17 back castes to be in sc list.

कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धींवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी, मछुवा।

14 फीसदी वोट पर है सबकी नजर
जिन 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल किया गया है, प्रदेश में उनकी उनकी आबादी 13.63 प्रतिशत है। विधानसभा चुनाव में इन जातियों का रुझान सत्ता की दिशा तय कर सकता है।

13 निषाद जातियों की आबादी 10.25 प्रतिशत है जबकि राजभर 1.32, कुम्हार 1.84 और गोंड़ 0.22 प्रतिशत है। लेकिन इनकी याद चुनाव के वक्त ही आती है। पिछली दो सरकारों से चुनाव के पहले इस तरह के प्रस्ताव पारित होते हैं।

2005 में मुलायम सरकार ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी तो प्रस्ताव केंद्र को भेजा। 2007 में मायावती सत्ता में आईं तो इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, बाद में खुद पत्र लिखा। बाद में अखिलेश सरकार ने लोकसभा चुनाव के पहले फिर प्रस्ताव भेजा जिसे केंद्र ने खारिज कर दिया।

एक दिन पहले कहा था- जाति नहीं, विकास ही चलेगा...

 17 back castes to be in sc list.

मुख्यमंत्री अखिलेश ने एक दिन पहले ही एक इंटरव्यू में कहा था कि यूपी में जातीय आधार पर होने वाली राजनीति का अंत हो चुका है। विधानसभा चुनाव में सपा का विकास और नोटबंदी के आधार पर ही वोट‌ मिलेगा।

माया बोलीं, राज्य सरकार को यह अधिकार नहीं
बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का कहना है कि यह निर्णय अति पिछड़ों की आखों में धूल झोंकने का प्रयास है। चुनावी हथकंडे के अलावा कुछ नहीं। फैसला कानूनी तोर पर गलत है क्योंकि एससी में किसी अन्य जाति को शामिल करने या हटाने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।

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