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सुहागिनों ने की पति के दीर्घायु होने की कामना
Updated Tue, 15 May 2018 11:49 PM IST
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रायबरेली। जिस तरह सावित्री ने अपने तप और साहस से पति और धन वैभव को दोबारा हासिल कर लिया था, उसी प्रकार मंगलवार को वट सावित्री अमावस्था पर सुहागिनों ने व्रत रखा। वट वृक्ष की पूजा-अर्चना व फेरे लगाकर पतियों की दीर्घायु और धन वैभव की कामना की। किसी ने घर तो किसी ने वट वृक्ष के पास पहुंचकर पूजन अर्चना की। जिले भर में वट सावित्री अमावस्या धूमधाम से मनाया गया।
बताया जाता है कि सावित्री ने जंगल में लकड़ी काट रहे सत्यवान को मन ही मन अपना पति मान लिया था। ज्योतिषियों के बताने के बाद भी सावित्री ने सत्यवान से शादी कर ली थी। शादी के ठीक एक साल बाद यमराज सत्यवान के प्राणों को लेकर जाने लगे तो सावित्री ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। सावित्री ने बारी-बारी से अपने सास ससुर की आंखों, उनका खोया हुआ राज्य और अपने को पुत्रवती होने का वरदान मांग लिया। यमराज ने वरदान दे दिया। सावित्री ने कहा कि बिना पति के वह पुत्रवती कैसे बन सकती है। इस पर यमराज ने सत्यवान के प्राणों को छोड़ दिया था। इसी बाद से वट सावत्री अमावस्था पर सुहागिनें पतियों के दीर्घायु व धन वैभव के लिए पूजा अर्चना करती हैं। मंगलवार को जिले भर में सुबह से ही पूजन अर्चन शुरू हुआ। पकवान बनाकर सुहागिनें वट वृक्ष के पास पहुंची और पूजन अर्चन के बाद पतियों के दीर्घायु व धन वैभव की कामना की। बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना की और फल चढ़ाए।
सलोन तहसील क्षेत्र में भी कच्चे सूत को वटवृक्ष पर लपेटकर हर फेरे में पति की लंबी आयु और उनका जन्म-जन्म का साथ निभाने मंगलवार को सुहागिन महिलाओं ने वटसावित्री व्रत पर पूजा-अर्चना की। सुबह से भीषण गर्मी में बेहाल महिलाओं ने निर्जला उपवास कर इस सुहाग पर्व को उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया। दुल्हन के परिधान में सोलह श्रृंगार कर क्षेत्र के अलग-अलग मंदिर पहुंची महिलाओं ने विधि विधान के साथ इस व्रत को पूरा किया। पूजा के बाद सुहागिनों ने सत्यवान और सावित्री की कथा भी सुनी। सलोन कस्बे और ग्रामीण अंचलों के मंदिरों और वट वृक्ष के नीचे सुबह से ही सुहागिनों की भीड़ लगी रही। पूजा के बाद सुहागिनों ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर वट सावित्री की पूजा की।
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बताया जाता है कि सावित्री ने जंगल में लकड़ी काट रहे सत्यवान को मन ही मन अपना पति मान लिया था। ज्योतिषियों के बताने के बाद भी सावित्री ने सत्यवान से शादी कर ली थी। शादी के ठीक एक साल बाद यमराज सत्यवान के प्राणों को लेकर जाने लगे तो सावित्री ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। सावित्री ने बारी-बारी से अपने सास ससुर की आंखों, उनका खोया हुआ राज्य और अपने को पुत्रवती होने का वरदान मांग लिया। यमराज ने वरदान दे दिया। सावित्री ने कहा कि बिना पति के वह पुत्रवती कैसे बन सकती है। इस पर यमराज ने सत्यवान के प्राणों को छोड़ दिया था। इसी बाद से वट सावत्री अमावस्था पर सुहागिनें पतियों के दीर्घायु व धन वैभव के लिए पूजा अर्चना करती हैं। मंगलवार को जिले भर में सुबह से ही पूजन अर्चन शुरू हुआ। पकवान बनाकर सुहागिनें वट वृक्ष के पास पहुंची और पूजन अर्चन के बाद पतियों के दीर्घायु व धन वैभव की कामना की। बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना की और फल चढ़ाए।
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सलोन तहसील क्षेत्र में भी कच्चे सूत को वटवृक्ष पर लपेटकर हर फेरे में पति की लंबी आयु और उनका जन्म-जन्म का साथ निभाने मंगलवार को सुहागिन महिलाओं ने वटसावित्री व्रत पर पूजा-अर्चना की। सुबह से भीषण गर्मी में बेहाल महिलाओं ने निर्जला उपवास कर इस सुहाग पर्व को उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया। दुल्हन के परिधान में सोलह श्रृंगार कर क्षेत्र के अलग-अलग मंदिर पहुंची महिलाओं ने विधि विधान के साथ इस व्रत को पूरा किया। पूजा के बाद सुहागिनों ने सत्यवान और सावित्री की कथा भी सुनी। सलोन कस्बे और ग्रामीण अंचलों के मंदिरों और वट वृक्ष के नीचे सुबह से ही सुहागिनों की भीड़ लगी रही। पूजा के बाद सुहागिनों ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर वट सावित्री की पूजा की।
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