{"_id":"5d07fc1a8ebc3e50954c1e9c","slug":"156080436414-lucknow-news15","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी कंपनियां संभालेंगी लखनऊ सहित चार शहरों का सीवर सिस्टम व एसटीपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजी कंपनियां संभालेंगी लखनऊ सहित चार शहरों का सीवर सिस्टम व एसटीपी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निजी कंपनी संभालेगी राजधानी के सीवर सिस्टम-एसटीपी का संचालन
टेंडर से किया हरियाणा की कंपनी का चयन, दस साल का होगा अनुबंध
प्रवेंद्र गुप्ता
लखनऊ। राजधानी का पूरा सीवर सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन और रखरखाव अब हरियाणा की निजी कंपनी मेसर्स शुएज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड करेगी। कंपनी का चयन टेंडर से कर लिया गया है। अब उसके साथ दस साल का अनुबंध होगा। इसे लेकर तीन सप्ताह का समय तय किया गया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव नगर विकास ने आदेश भी जारी कर दिया है। नई व्यवस्था से गोमती के प्रदूषण की समस्या भी छह महीने में दूर करने का दावा किया जा रहा है।
प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने बताया कि गोमती में गिरने वाले नालों और सीवर से बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए अब ‘वन सिटी वन आपरेटर’ की योजना काम होगा। लखनऊ के अलावा गाजियाबाद, आगरा और गोरखपुर में इसी योजना पर काम होगा। करीब आठ महीने से चल रही उच्चस्तरीय बैठकों के बाद योजना को लागू किया जा रहा है। प्रमुख सचिव ने कहा कि कंपनी ने दावा किया है वह छह महीने में गोमती में गिरने वाले नालों और सीवर की समस्या मौजूदा संसाधनों से ही दूर कर देगी। उनका कहना है कि जब एसटीपी का संचालन बेहतर तरीके से होगा तो सीवर और नाले ओवरफ्लो होकर नदी में नहीं गिरेंगे।
----
किस शहर में कौन कंपनी करेगी काम
लखनऊ- मेसर्स शुएज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा
गोरखपुर- मेसर्स तोशीबा वाटर सल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा
आगरा- मेसर्स वी. ए. टेक वैग लिमिटेड चेन्नई
गाजियाबाद- मेसर्स वी. ए. टेक वैग लिमिटेड चेन्नई
-----
लखनऊ में 77 करोड़ 50 में ठेका
शासन को सबसे अधिक पैसा गाजियाबाद की कंपनी को देना होगा। यहां 104 करोड़ 92 लाख, लखनऊ में 77 करोड़ 50 लाख, गोरखपुर में 13 करोड़ 32 लाख और आगरा में 42 करोड़ 80 लाख रुपये में ठेका दिया गया है।
विज्ञापन
---------
बनाया जा रहा स्टेट लेवल फंड
नई व्यवस्था को बेहतर तरीके से चलाने के लिए स्टेट लेवल फंड बनाया जाएगा। इसके लिए सभी 652 निकायों से पैसा लिया जाएगा, क्योंकि नदियों में प्रदूषण कम होने का फायदा सभी को मिलेगा। उदाहरण के लिए लखनऊ में गोमती साफ होगी तो उसका फायदा जौनपुर को भी मिलेगा। फंड के लिए निकायों को आवंटित किए जाने वाले बजट से लिया जाएगा। उसी फंड से निजी कंपनी को सीवर लाइन से लेकर एसटीपी संचालन का तक भुगतान किया जाएगा। इससे एसटीपी संचालन पर आने वाले खर्च के भुगतान को लेकर विवाद भी नहीं होगा।
----
आधा हो जाएगा निकायों का भार
प्रमुख सचिव नगर विकास का कहना है कि नई व्यवस्था में जो फंड बनाया जाएगा उससे निकायों का भार आधा हो जाएगा। उदाहरण केलिए अभी लखनऊ नगर निगम को एसटीपी संचालन पर सालाना करीब 101 करोड़ खर्च करने पड़ते हैं। बाद में यह खर्च करीब 40 करोड़ रुपये हो जाएगा। इसी तरह अन्य निकायों का भी खर्च कम हो जाएगा।
-----
प्रदेश में 58 एसटीपी और लगेंगे
प्रमुख सचिव नगर विकास ने बताया कि अभी पूरे प्रदेश में 99 एसटीपी लगे हैं। अब 58 नए लगने वाले हैं। लखनऊ में ही तीन एसटीपी हैं। इनमें एक भरवारा, दूसरा दौलतगंज और तीसरा वृंदावन योजना में है। जिस हिसाब से एसटीपी बन रहे हैं उसको लेकर एक नीति संचालन को लेकर बनाना जरूरी हो गया था।
---
दो से तीन महीने मेें कंपनियां संभाल लेंगी पूरा काम
प्रमुख सचिव नगर विकास का कहना है कि अनुबंध के साथ कंपनियों से बैंक गारंटी ली जाएगी। इसके बाद एसटीपी, सीवेज पंपिंग स्टेशन और सीवर लाइनों की व्यवस्था को हैंडओवर का काम होगा। इसमें दो-तीन महीने लग सकते हैं।
------
बदलाव के बाद ये होंगे काम
कंपनियां सीवर से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए कंट्रोल रूम बनाएंगी, जो 24 घंटे सातोें दिन चलेंगे।
कंट्रोल रूम का नम्बर जारी करेंगे, जिससे लोग शिकायत कर सकें।
सीवर कनेक्शन का काम भी निजी कंपनियां करेंगी।
----
कोट
दूर होगा नदियों का प्रदूषण
नई व्यवस्था से नदियों को प्रदूषण दूर होगा और एसटीपी का संचालन बेहतर तरीके से होगा। एक शहर एक कंपनी होने से जिम्मेदारी भी तय करना आसान होगा। निकायों का एसटीपी संचालन का खर्च भी आधा हो जाएगा। अनुबंध की कार्यवाही निजी कंपनी, संबंधित निकाय और जल निगम के बीच होगी।
मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव नगर विकास
विज्ञापन
टेंडर से किया हरियाणा की कंपनी का चयन, दस साल का होगा अनुबंध
प्रवेंद्र गुप्ता
लखनऊ। राजधानी का पूरा सीवर सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन और रखरखाव अब हरियाणा की निजी कंपनी मेसर्स शुएज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड करेगी। कंपनी का चयन टेंडर से कर लिया गया है। अब उसके साथ दस साल का अनुबंध होगा। इसे लेकर तीन सप्ताह का समय तय किया गया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव नगर विकास ने आदेश भी जारी कर दिया है। नई व्यवस्था से गोमती के प्रदूषण की समस्या भी छह महीने में दूर करने का दावा किया जा रहा है।
प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह ने बताया कि गोमती में गिरने वाले नालों और सीवर से बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए अब ‘वन सिटी वन आपरेटर’ की योजना काम होगा। लखनऊ के अलावा गाजियाबाद, आगरा और गोरखपुर में इसी योजना पर काम होगा। करीब आठ महीने से चल रही उच्चस्तरीय बैठकों के बाद योजना को लागू किया जा रहा है। प्रमुख सचिव ने कहा कि कंपनी ने दावा किया है वह छह महीने में गोमती में गिरने वाले नालों और सीवर की समस्या मौजूदा संसाधनों से ही दूर कर देगी। उनका कहना है कि जब एसटीपी का संचालन बेहतर तरीके से होगा तो सीवर और नाले ओवरफ्लो होकर नदी में नहीं गिरेंगे।
विज्ञापन
----
किस शहर में कौन कंपनी करेगी काम
लखनऊ- मेसर्स शुएज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा
गोरखपुर- मेसर्स तोशीबा वाटर सल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा
आगरा- मेसर्स वी. ए. टेक वैग लिमिटेड चेन्नई
गाजियाबाद- मेसर्स वी. ए. टेक वैग लिमिटेड चेन्नई
-----
लखनऊ में 77 करोड़ 50 में ठेका
शासन को सबसे अधिक पैसा गाजियाबाद की कंपनी को देना होगा। यहां 104 करोड़ 92 लाख, लखनऊ में 77 करोड़ 50 लाख, गोरखपुर में 13 करोड़ 32 लाख और आगरा में 42 करोड़ 80 लाख रुपये में ठेका दिया गया है।
विज्ञापन
---------
बनाया जा रहा स्टेट लेवल फंड
नई व्यवस्था को बेहतर तरीके से चलाने के लिए स्टेट लेवल फंड बनाया जाएगा। इसके लिए सभी 652 निकायों से पैसा लिया जाएगा, क्योंकि नदियों में प्रदूषण कम होने का फायदा सभी को मिलेगा। उदाहरण के लिए लखनऊ में गोमती साफ होगी तो उसका फायदा जौनपुर को भी मिलेगा। फंड के लिए निकायों को आवंटित किए जाने वाले बजट से लिया जाएगा। उसी फंड से निजी कंपनी को सीवर लाइन से लेकर एसटीपी संचालन का तक भुगतान किया जाएगा। इससे एसटीपी संचालन पर आने वाले खर्च के भुगतान को लेकर विवाद भी नहीं होगा।
----
आधा हो जाएगा निकायों का भार
प्रमुख सचिव नगर विकास का कहना है कि नई व्यवस्था में जो फंड बनाया जाएगा उससे निकायों का भार आधा हो जाएगा। उदाहरण केलिए अभी लखनऊ नगर निगम को एसटीपी संचालन पर सालाना करीब 101 करोड़ खर्च करने पड़ते हैं। बाद में यह खर्च करीब 40 करोड़ रुपये हो जाएगा। इसी तरह अन्य निकायों का भी खर्च कम हो जाएगा।
-----
प्रदेश में 58 एसटीपी और लगेंगे
प्रमुख सचिव नगर विकास ने बताया कि अभी पूरे प्रदेश में 99 एसटीपी लगे हैं। अब 58 नए लगने वाले हैं। लखनऊ में ही तीन एसटीपी हैं। इनमें एक भरवारा, दूसरा दौलतगंज और तीसरा वृंदावन योजना में है। जिस हिसाब से एसटीपी बन रहे हैं उसको लेकर एक नीति संचालन को लेकर बनाना जरूरी हो गया था।
---
दो से तीन महीने मेें कंपनियां संभाल लेंगी पूरा काम
प्रमुख सचिव नगर विकास का कहना है कि अनुबंध के साथ कंपनियों से बैंक गारंटी ली जाएगी। इसके बाद एसटीपी, सीवेज पंपिंग स्टेशन और सीवर लाइनों की व्यवस्था को हैंडओवर का काम होगा। इसमें दो-तीन महीने लग सकते हैं।
------
बदलाव के बाद ये होंगे काम
कंपनियां सीवर से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए कंट्रोल रूम बनाएंगी, जो 24 घंटे सातोें दिन चलेंगे।
कंट्रोल रूम का नम्बर जारी करेंगे, जिससे लोग शिकायत कर सकें।
सीवर कनेक्शन का काम भी निजी कंपनियां करेंगी।
----
कोट
दूर होगा नदियों का प्रदूषण
नई व्यवस्था से नदियों को प्रदूषण दूर होगा और एसटीपी का संचालन बेहतर तरीके से होगा। एक शहर एक कंपनी होने से जिम्मेदारी भी तय करना आसान होगा। निकायों का एसटीपी संचालन का खर्च भी आधा हो जाएगा। अनुबंध की कार्यवाही निजी कंपनी, संबंधित निकाय और जल निगम के बीच होगी।
मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव नगर विकास