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सालाना साठ करोड़ खर्च फिर नहीं मिल रहा पीने को साफ पानी
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बीमार करने पर तुला जलनिगम, पानी का संकट भी पैदा कर रहा
- सीवेज पंपिंग स्टेशन के पंप लगातार न चलने से गोमती में जा रहा सीवर, बढ़ रही अमोनिया
- समस्या दूर करने को खोलना पड़ रहा बैराज का गेट, पानी कम होने से 10 फीसदी घटी आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। गोमती में सीवर न गिरे और शहरवासियों को पीने का साफ पानी मिले, इसके लिए एसटीपी संचालन पर सालाना करीब 60 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन इसका फायदा नहीं मिल रहा है। जल निगम की लापरवाही से सीवेज पंपिंग स्टेशन खराब पड़े हैं और सीवर एसटीपी में जाने के बजाय नदी में जा रहा है। इससे पानी में अमोनिया और गंदगी बढ़ रही है। इसका असर अब पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा है और करीब 10 प्रतिशत सप्लाई कम हो गई है।
जलकल के अधिशासी अभियंता ओपी बताते हैं कि शहर को पीने के लिए जलकल विभाग जो पानी सप्लाई करता है वह अमोनिया फ्री होना चाहिए। लेकिन पिछले कई दिनों से गऊघाट पर गोमती के पानी में इसका लेवल पांच पीपीएम तक पहुंच जा रहा है। इसके कारण जलकल विभाग को हर दिन सुबह और शाम सिंचाई विभाग से मिलकर डाउन स्ट्रीम पर बैराज का गेट खुलवाना पड़ रहा है, ताकि अमोनिया लेवल गऊघाट अपस्ट्रीम पर जीरो हो सके। गेट खोले जाने के कारण अमोनिया लेवल तो जीरो हो जा रहा है, लेकिन उससे पानी पूरा नहीं मिल पा रहा है। गऊघाट से ऐशबाग और बालागंज जलकल को रोजाना 300 एमएलडी कच्चा पानी नदी से पंप कर दिया जाता है जो पूरा नहीं मिल पा रहा है। जलस्तर गिरने से 270 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है।
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जीएम जलकल ने कहा- जल निगम की लापरवाही से बढ़ी समस्या
गऊघाट पर अमोनिया का लेवल बढ़ने के बाद जलकल महाप्रबंधक एसके वर्मा ने जल निगम के महाप्रबंधक को पत्र लिखा है। नगरिया नाले पर स्थित सीवरेज पंपिंग स्टेशन पर लगे सभी पंप लगातार नहीं चल रहे हैं। इसकी जानकारी आपको बार-बार दी जा चुकी है। इसके बाद भी पंप नंबर दो और पांच बंद हैं। इससे नगरिया नाले का पानी ओवरफ्लो होकर सीधे गोमती नदी में जा रहा है और कच्चे पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है। इससे गत पांच जून को अमोनिया का स्तर पांच पीपीएम तक पहुंच गया। इसको कम करने के लिए बैराज के गेट खुलवाकर फ्लशिंग कराई गई। इससे नदी का जलस्तर बहुत कम हो गया।
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सीवर रोकने को हर साल करीब साठ करोड़ का खर्च
गोमती में सीधे सीवर और नालों का गंदा पानी न जाए इसके लिए शहर में दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं। एसटीपी और उनसे जुड़े सीवेज पंपिंग स्टेशन के संचालन पर जल निगम हर साल 60 करोड़ खर्च करता है। उसके बाद भी सीवर नदी में जा रहा है और पानी प्रदूषित हो रहा है। अप स्ट्रीम पर अमोनिया बढ़ने की समस्या पिछले एक माह में दूसरी बार हुई है।
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कोट
खोलना पड़ रहा बैराज का गेट
नदी में अमोनिया का स्तर पर बढ़ने से पेयजल का संकट हो गया है। नगरिया नाले का सीवेज पंपिंग स्टेशन ठीक से काम नहीं कर रहा है। इस कारण सीवर नदी में जा रहा है। इसको लेकर जल निगम से शिकायत की गई है। इस समय अमोनिया कम करने को सुबह-शाम बैराज का गेट खोलकर फ्लशिंग कराई जा रही है।
ओपी सिंह, अधिशासी अभियंता जलकल विभाग
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कोट
जल्द ही करेंगे स्थायी समाधान
सिल्ट भर जाने से नगरिया नाला ओवरफ्लो कर रहा है। पहले नाले में रोक लगाई गई थी ताकि पानी ओवरफ्लो कर नदी में न जाए, लेकिन वह हट गई है। अब उसे फिर से लगाया जा रहा है और जल्द ही इसका स्थायी समाधान किया जाएगा।
एसके गुप्ता, जीएम जल निगम
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- सीवेज पंपिंग स्टेशन के पंप लगातार न चलने से गोमती में जा रहा सीवर, बढ़ रही अमोनिया
- समस्या दूर करने को खोलना पड़ रहा बैराज का गेट, पानी कम होने से 10 फीसदी घटी आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। गोमती में सीवर न गिरे और शहरवासियों को पीने का साफ पानी मिले, इसके लिए एसटीपी संचालन पर सालाना करीब 60 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन इसका फायदा नहीं मिल रहा है। जल निगम की लापरवाही से सीवेज पंपिंग स्टेशन खराब पड़े हैं और सीवर एसटीपी में जाने के बजाय नदी में जा रहा है। इससे पानी में अमोनिया और गंदगी बढ़ रही है। इसका असर अब पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा है और करीब 10 प्रतिशत सप्लाई कम हो गई है।
जलकल के अधिशासी अभियंता ओपी बताते हैं कि शहर को पीने के लिए जलकल विभाग जो पानी सप्लाई करता है वह अमोनिया फ्री होना चाहिए। लेकिन पिछले कई दिनों से गऊघाट पर गोमती के पानी में इसका लेवल पांच पीपीएम तक पहुंच जा रहा है। इसके कारण जलकल विभाग को हर दिन सुबह और शाम सिंचाई विभाग से मिलकर डाउन स्ट्रीम पर बैराज का गेट खुलवाना पड़ रहा है, ताकि अमोनिया लेवल गऊघाट अपस्ट्रीम पर जीरो हो सके। गेट खोले जाने के कारण अमोनिया लेवल तो जीरो हो जा रहा है, लेकिन उससे पानी पूरा नहीं मिल पा रहा है। गऊघाट से ऐशबाग और बालागंज जलकल को रोजाना 300 एमएलडी कच्चा पानी नदी से पंप कर दिया जाता है जो पूरा नहीं मिल पा रहा है। जलस्तर गिरने से 270 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है।
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जीएम जलकल ने कहा- जल निगम की लापरवाही से बढ़ी समस्या
गऊघाट पर अमोनिया का लेवल बढ़ने के बाद जलकल महाप्रबंधक एसके वर्मा ने जल निगम के महाप्रबंधक को पत्र लिखा है। नगरिया नाले पर स्थित सीवरेज पंपिंग स्टेशन पर लगे सभी पंप लगातार नहीं चल रहे हैं। इसकी जानकारी आपको बार-बार दी जा चुकी है। इसके बाद भी पंप नंबर दो और पांच बंद हैं। इससे नगरिया नाले का पानी ओवरफ्लो होकर सीधे गोमती नदी में जा रहा है और कच्चे पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है। इससे गत पांच जून को अमोनिया का स्तर पांच पीपीएम तक पहुंच गया। इसको कम करने के लिए बैराज के गेट खुलवाकर फ्लशिंग कराई गई। इससे नदी का जलस्तर बहुत कम हो गया।
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सीवर रोकने को हर साल करीब साठ करोड़ का खर्च
गोमती में सीधे सीवर और नालों का गंदा पानी न जाए इसके लिए शहर में दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं। एसटीपी और उनसे जुड़े सीवेज पंपिंग स्टेशन के संचालन पर जल निगम हर साल 60 करोड़ खर्च करता है। उसके बाद भी सीवर नदी में जा रहा है और पानी प्रदूषित हो रहा है। अप स्ट्रीम पर अमोनिया बढ़ने की समस्या पिछले एक माह में दूसरी बार हुई है।
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कोट
खोलना पड़ रहा बैराज का गेट
नदी में अमोनिया का स्तर पर बढ़ने से पेयजल का संकट हो गया है। नगरिया नाले का सीवेज पंपिंग स्टेशन ठीक से काम नहीं कर रहा है। इस कारण सीवर नदी में जा रहा है। इसको लेकर जल निगम से शिकायत की गई है। इस समय अमोनिया कम करने को सुबह-शाम बैराज का गेट खोलकर फ्लशिंग कराई जा रही है।
ओपी सिंह, अधिशासी अभियंता जलकल विभाग
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कोट
जल्द ही करेंगे स्थायी समाधान
सिल्ट भर जाने से नगरिया नाला ओवरफ्लो कर रहा है। पहले नाले में रोक लगाई गई थी ताकि पानी ओवरफ्लो कर नदी में न जाए, लेकिन वह हट गई है। अब उसे फिर से लगाया जा रहा है और जल्द ही इसका स्थायी समाधान किया जाएगा।
एसके गुप्ता, जीएम जल निगम