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8.5 डिग्री पहुंचा पारा, ठिठुरे लोग

Fri, 29 Dec 2017 12:18 AM IST
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:18 AM IST
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8.5 डिग्री पहुंचा पारा, ठिठुरे लोग
बाराबंकी। मौसम ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बृहस्पतिवार को न्यूनतम पारा साढ़े आठ डिग्री तक पहुंच गया है, जिससे गलन और बढ़ गई है इससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पूरे दिन आसमान में धुंध छाई रही, वहीं शाम होते ही फिर से तेज कोहरा गिरने लगा। जिससे इसका असर यातायात व्यवस्था पर ही नहीं, लोगों की सेहत व फसलों पर पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा ठंड से बचाव के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। गरीब सरकारी रैन बसेेेरों में पुआल के बिस्तर पर सर्द रातें गुजारने को मजबूर है। वहीं अलाव के दावे भी हकीकत से जुदा हैं। तहसीलों में कंबल पहुंच गए हैं तो उनके वितरण का काम भी शुरू हो गया। मगर, जिला मुख्यालय पर तहसील प्रशासन के अलाव व रैन बसेरा सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं।
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मौसम के तेवरों में बदलाव दिखने लगा है। गुरुवार को न्यूनतम तापमान साढ़े आठ डिग्री पहुंच जाने से गलन और बढ़ गई है। ठंड बढ़ने से ज्यादातर लोग घरों में दुबके रहे और अलाव तापते देखे गए। लेकिन प्रशासनिक इंतजाम नाकाफी दिखाई दिए। बस स्टेशन, देवा तिराहा, जिला अस्पताल, सतरिख नाका, नाका पैसार, बड़ेल तिराहा आदि प्रमुख स्थानों पर कहीं भी अलाव जलते नहीं दिखाई दिए, जिससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कृषि विभाग की मानें तो मौसम का असर दलहनी, तिलहनी फसलों पर पड़ने की बात से इन्कार नहीं किया जाता है। वहीं यह ठंड बच्चों और बुजुर्गों पर भी भारी पड़ सकती है।
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तापमान
दिन न्यूनतम अधिकतम
गुुुरुवार 8.5 21.0
बुधवार 8.4 21.8
मंगलवार 9.5 21.5
सोमवार 8.5 15.8
फसलों पर कोहरे का कहर
मौसम के बदलते मिजाज के बाद कोहरे कबढ़े े प्रकोप से जिले में बोई चना, मसूर व मटर की करीब 20316 हेक्टेयर दलहनी व तोरिया, राई व अलसी की बोई 48139 हेक्टेयर तिलहनी फसलों का नुकसान हो रहा है। कोहरे के कारण इन फसलों में धूप न निकलने से फूल नहीं निकल पा रहे हैं। ऐसे में फली कम आने से इसका असर पैदावार पर पडे़गा। कोहरे का असर आलू की फसल पर भी पडे़गा।
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पैदावार पर पड़ेगा असर
हवा की गति स्थिर होने से कोहरा छंट नहीं पा रहा है। जिसका असर आम जनजीवन के साथ दलहनी व तिलहनी फसलों में निकलने वाले फूलों पर पड़ रहा है। धूप की वजह से फूल न निकलने पर इसका असर फसलों की पैदावार पर भी पड़ेगा। आलू की फसल को भी कोहरे से नुकसान होगा। अभी ऐसे ही मौसम रहने की उम्मीद है। बूंदाबांदी हुई तो फसलों को और अधिक नुकसान होगा।
राजाराम राय, मृदा रसायनज्ञ, कृषि विभाग

हार्ट व दमा रोगी रहें सतर्क
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव वर्मा कहते हैं कि ठंड बढ़ने पर हृदय को सेहत मंद रखने के लिए विटामिन सी युक्त चीजें खाएं। मौसमी फल व बादाम का प्रयोग करे। स्मोकिंग न करें, सुबह टहलने के लिए जाने वाले बुजुर्ग धूप खिलने पर ही बाहर निकलें, चिकनाई का सेवन न करें, खाने में हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं। वहीं दमा रोगी सर्दी में बाहर कम निकलें। सिर व सीने में सर्दी न लगने दें। धूप में कड़वे तेल में लहसुन, मेंथी, नमक डालकर गर्म करें और शरीर में मालिस करें, पानी को गर्म करके पीएं, समय समय पर चिकित्सक की सलाह लेते रहें। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके सिंह कहते हैं कि बच्चों को सर्दियों में विशेष कर ध्यान दें। बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं। अदरख, कालीमिर्च, थोड़ा नमक डालकर बनी चाय दें। पैर व हाथ की हथेली में तेल की मालिस करें। सर्दी लगते ही चिकित्सक से उपचार कराएं।

आलू व सरसों की फसलों को होगा नुकसान
कृषि रक्षा अधिकारी प्रीति किरन बाजपेई कहती हैं कि कोहरा पड़ने व गलन के लगातार बने रहने पर आलू की फसल में झुलसा रोग लगने लगता है। जिससे फसल का विकास रुक जाता है और पैदावार प्रभावित हो जाती है। इसके बचाव के लिए किसान खेत में हल्की नमी बनाएं रखे, खेत के चारो ओर धुंआ करें और फसल में डायथेन एम-45 का घोल बनाकर समय समय पर छिड़काव करें। वहीं फ्लाविंग स्टेज वाली सरसों की फसलों के लिए भी कोहरा नुकसान पहुंचा सकता है। गेहूं, मटर, मसूर, समेत अन्य सब्जी की फसलों पर कोहरे का विपरीत असर नहीं पड़ता है।

इंसेट
रैन बसेरों में नहीं ठंड से बचाव के इंतजाम
पल्हरी चौराहे पर तालाब के किनारे नगर पालिका परिषद का रैन बसेरा बना है। जिसमें निकास व प्रवेश के लिए रिक्त स्थान पर तिरपाल का पर्दा डाल दिया गया तो अंदर बिस्तर के तौर पर पुआल। उसके अलाव कोई इंतजाम नहीं हैं। रैन बसेेेरे के बगल में लगा इंडिया मार्का हैंडपंप खराब हैं तो तालाब व अगल-बगल फैली गंदगी से दिन में मच्छरों की भरमार है। इसके आसपास कोई अलाव की व्यवस्था तक नहीं है।

नगर पालिका परिषद का बंकी ब्लॉक के सामने बने रैन बसेरा में भी कोई सुविधा नहीं है। पुआल के बिस्तर व तिरपाल के पर्दे के अंदर रिक्शा चालक, ठेले, खोमचे वाले ठंड की रातें काटने को मजबूर हैं। रैन बसेरे के बाहर बैठे रिक्शा चालक कल्लू व गंगाराम ने बताया कि रैन बसेरे के बाहर होटल चलाने वाले द्वारा रैन बसेरे में ठहरने के लिए होटल में खाना खाने का दबाव बनाया जाता है। तहसील प्रशासन का देवा तिराहे पर संचालित रैन बसेरा सिर्फ कागजों तक सीमित है। यह हाल तब है, जब एक लेखपाल की ड्यूटी भी यहां पर लगाई गई है। मगर, पूर्व वर्षों में तिरपाल से इस स्थान पर रैन बसेरा तैयार कर पुआल आदि डालने का काम होता था। मगर, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने इस स्थान को यात्री प्रतिक्षालय के रूप में पक्का निर्माण करा दिया। मगर, पर्दे व पुआल आदि भले न डाले गए हों कागजों पर इस रैन बसेरे के संचालन की रिपोर्ट आपदा राहत आयुक्त को भेजी जा रही है।
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