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निजी सचिव कांड के बाद मंत्रियों व अफसरों के स्टाफ पर बढ़ी निगहबानी
Sat, 29 Dec 2018 12:49 AM IST
MANISH sachan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: MANISH sachan
Updated Sat, 29 Dec 2018 12:49 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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मंत्रियों के निजी सचिवों की कारस्तानी से दो-चार हो रही सरकार सचिवालय प्रशासन की कार्यप्रणाली की तह तक पहुंचने की तैयारी में है। संवेदनशील स्थानों पर खराब छवि के लोगों की तैनाती कैसे हो जाती है, यह समझने के लिए केंद्रीय अनुभाग से लेकर विभाग के वरिष्ठ अफसरों तक की भूमिका के बारे में जानकारी ली जा रही है। उधर, मंत्रियों से अफसरों तक के स्टाफ में काफी सतर्कता रही।
सूत्रों ने बताया कि बृहस्पतिवार और शुक्रवार को कई अपरिचित लोगों ने निजी बातचीत में सचिवालय की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली है।
अलग-अलग लोगों से एक जैसे सवाल करते नजर आए। माना जा रहा है कि ये खुफिया कर्मी हो सकते हैं। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि अन्य स्थानों पर भी भ्रष्टाचार की कोशिश तो नहीं चल रही है? मंत्रियों, अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों से लेकर विशेष सचिवों के निजी सचिवों व अपर निजी सचिवों की भूमिका व कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी की।
सचिवालय संघ के एक नेता ने ऐसे ही कर्मी से मुलाकात के बारे में बताया कि इन कर्मियों की रुचि यह भी जानने की रही कि सचिवालय में जिम्मेदार कर्मी फर्जी पास का प्रयोग करने का दुस्साहस कैसे कर लेते हैं? खराब छवि के सरकारी कर्मी मंत्रियों के पास पैठ कैसे बढ़ा लेते हैं?
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निलंबित निजी सचिवों के स्थान पर अभी तैनाती नहीं
दूसरी ओर सचिवालय प्रशासन विभाग मंत्रियों के यहां से निलंबित किए गए तीन निजी सचिवों के स्थान पर नई तैनाती नहीं कर पाया है। अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि जल्द ही तैनाती कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कोई विभागीय जांच भी नहीं शुरू कराई गई है। एसआईटी जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जाएगा।
सचिवालय में गड़बड़ियों के मुख्य कारण
सचिवालय संघ के एक नेता बताते हैं कि सचिवालय प्रशासन की कार्यप्रणाली ही इसके लिए जिम्मेदार है। सचिवालय सेवा के करीब आठ हजार कर्मी सचिवालय प्रशासन विभाग के अंतर्गत आते हैं। इनकी नियुक्ति, पदोन्नति, तबादले जैसे सारे काम यही विभाग करता है। यहां के कर्मी सीधे शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के मंत्रियों के निर्देशन में काम करते हैं। मंत्री के साथ शासन व जिलों के पूरे प्रशासन तक उनका नाम चलता है। इसके बावजूद यहां के कर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, पदोन्नति व कार्रवाई के आदेश छुपाए जाते हैं। ऐसे आदेश न तो शासनादेश पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं, न ही विभागीय वेबसाइट पर। ऐसा तब है जब योगी सरकार आने के बाद सभी विभागों के तबादले, जांच और कार्रवाई से जुड़े आदेश ऑनलाइन शासनादेश पोर्टल पर जारी किए जाने लगे।
अपर निजी सचिव संघ के एक नेता बताते हैं कि पब्लिक डोमेन में आदेश न आने से यह पता नहीं चल पाता कि कौन कर्मी कल कहां-कहां था और हटाया गया तो क्या वजह थी? इसका फायदा जुगाड़ व सिफारिश वाले कर्मी व ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े वरिष्ठ अफसर उठाते हैं। किसी भी सरकार के आने पर ऐसे लोग छाए रहते हैं और अपनी ड्यूटी तक सीमित कर्मी हतोत्साहित होते हैं।
एक अन्य कर्मचारी नेता बताते हैं कि भ्रष्ट आचरण के आरोपी तीन निजी सचिवों के पहले मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक के दफ्तर से निजी सचिव व अन्य कर्मी हटाए जा चुके हैं। इस नेता के मुताबिक ऐसे ही जुगाड़ू कर्मी सरकार की गोपनीयता भंग करते हैं। तमाम निर्णय सरकार में विचार के स्तर पर ही रहता है, विपक्ष से उस पर प्रतिक्रिया आने लगती है। सचिवालय सेवा के एक विशेष सचिव बताते हैं कि कई मंत्रियों के दफ्तर से कैंप तक ऐसे समीक्षा अधिकारी से निजी सचिव तक तैनात हैं जो पूर्व की सरकारों में तैनात रहे हैं।
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सूत्रों ने बताया कि बृहस्पतिवार और शुक्रवार को कई अपरिचित लोगों ने निजी बातचीत में सचिवालय की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली है।
अलग-अलग लोगों से एक जैसे सवाल करते नजर आए। माना जा रहा है कि ये खुफिया कर्मी हो सकते हैं। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि अन्य स्थानों पर भी भ्रष्टाचार की कोशिश तो नहीं चल रही है? मंत्रियों, अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों से लेकर विशेष सचिवों के निजी सचिवों व अपर निजी सचिवों की भूमिका व कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी की।
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सचिवालय संघ के एक नेता ने ऐसे ही कर्मी से मुलाकात के बारे में बताया कि इन कर्मियों की रुचि यह भी जानने की रही कि सचिवालय में जिम्मेदार कर्मी फर्जी पास का प्रयोग करने का दुस्साहस कैसे कर लेते हैं? खराब छवि के सरकारी कर्मी मंत्रियों के पास पैठ कैसे बढ़ा लेते हैं?
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निलंबित निजी सचिवों के स्थान पर अभी तैनाती नहीं
दूसरी ओर सचिवालय प्रशासन विभाग मंत्रियों के यहां से निलंबित किए गए तीन निजी सचिवों के स्थान पर नई तैनाती नहीं कर पाया है। अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि जल्द ही तैनाती कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि कोई विभागीय जांच भी नहीं शुरू कराई गई है। एसआईटी जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जाएगा।
सचिवालय में गड़बड़ियों के मुख्य कारण
सचिवालय संघ के एक नेता बताते हैं कि सचिवालय प्रशासन की कार्यप्रणाली ही इसके लिए जिम्मेदार है। सचिवालय सेवा के करीब आठ हजार कर्मी सचिवालय प्रशासन विभाग के अंतर्गत आते हैं। इनकी नियुक्ति, पदोन्नति, तबादले जैसे सारे काम यही विभाग करता है। यहां के कर्मी सीधे शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के मंत्रियों के निर्देशन में काम करते हैं। मंत्री के साथ शासन व जिलों के पूरे प्रशासन तक उनका नाम चलता है। इसके बावजूद यहां के कर्मियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, पदोन्नति व कार्रवाई के आदेश छुपाए जाते हैं। ऐसे आदेश न तो शासनादेश पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं, न ही विभागीय वेबसाइट पर। ऐसा तब है जब योगी सरकार आने के बाद सभी विभागों के तबादले, जांच और कार्रवाई से जुड़े आदेश ऑनलाइन शासनादेश पोर्टल पर जारी किए जाने लगे।
अपर निजी सचिव संघ के एक नेता बताते हैं कि पब्लिक डोमेन में आदेश न आने से यह पता नहीं चल पाता कि कौन कर्मी कल कहां-कहां था और हटाया गया तो क्या वजह थी? इसका फायदा जुगाड़ व सिफारिश वाले कर्मी व ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े वरिष्ठ अफसर उठाते हैं। किसी भी सरकार के आने पर ऐसे लोग छाए रहते हैं और अपनी ड्यूटी तक सीमित कर्मी हतोत्साहित होते हैं।
एक अन्य कर्मचारी नेता बताते हैं कि भ्रष्ट आचरण के आरोपी तीन निजी सचिवों के पहले मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक के दफ्तर से निजी सचिव व अन्य कर्मी हटाए जा चुके हैं। इस नेता के मुताबिक ऐसे ही जुगाड़ू कर्मी सरकार की गोपनीयता भंग करते हैं। तमाम निर्णय सरकार में विचार के स्तर पर ही रहता है, विपक्ष से उस पर प्रतिक्रिया आने लगती है। सचिवालय सेवा के एक विशेष सचिव बताते हैं कि कई मंत्रियों के दफ्तर से कैंप तक ऐसे समीक्षा अधिकारी से निजी सचिव तक तैनात हैं जो पूर्व की सरकारों में तैनात रहे हैं।