जानिए क्यों, लखनऊ में अटक गए हजारों गरीबों के घर
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रायबरेली रोड स्थित हाइटेक टाउनशिप डीएलएफ गार्डन सिटी में 1264 गरीब आवासों का आवंटन अब तक शुरू नहीं हुआ है, जबकि कंपनी इंटरनेट और अपने एजेंटों के माध्यम से धड़ल्ले से महंगे प्लॉटों की बिक्री कर रही है।
यहां तक कि विभूतिखंड में माई पैड नाम से दूसरी योजना भी लॉन्च कर दी गई है। गार्डन सिटी आवास विकास परिषद की एकमात्र हाइटेक टाउनशिप है।
शासकीय प्रावधानों के मुताबिक, इंटीग्रेटेड और हाइटेक टाउनशिप में 10 फीसदी एलआईजी और 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस मकानों का निर्माण अनिवार्य है।
पिछले दिनों एलडीए के दबाव के बाद एपीआई अंसल ने करीब 3200 और एल्डिको ने 360 ऐसे फ्लैटों का लॉटरी के जरिये आवंटन कर दिया।
अब आवास विकास परिषद ने भी डीएलएफ पर गार्डेन सिटी में 632 ईडब्ल्यूएस और 632 एलआईजी आवासों के आवंटन को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। परिषद की ओर कंपनी से कहा गया है कि वह आवंटन जल्द शुरू करें, अन्यथा कार्रवाई को तैयार रहे।
एलडीए जल्द ही शुरू करेगा कार्रवाई
एलडीए से लाइसेंस पाई कई कंपनियों ने भी अब तक आवंटन नहीं शुरू किए हैं। विराज कंस्ट्रक्शन की बीबीडी ग्रीन सिटी, ओमैक्स की इंटरगेटेड टाउनशिप, एएनएस और ईमार एजीएफ की ओर से करीब तीन हजार गरीब आवासों का आवंटन बाकी है। इसको लेकर अब एलडीए कार्रवाई शुरू करने जा रहा है।
2500 एकड़ में टाउनशिप, पर गरीब आवास की नहीं करते बात
डीएलएफ की टाउनशिप में गरीब आवास का कोई जिक्र ही नहीं किया गया है। कंपनी लाइसेंस मिलने के बाद चार साल से इस टाउनशिप में प्लॉट बेच रही है, मगर 1264 गरीब आवास कब लॉन्च होंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
अब आवास विकास परिषद के जवाब मांगने के बाद कंपनी कह रही है कि वह बहुत जल्द ही प्रक्रिया पूरा कर के गरीब आवासों का पंजीकरण और आवंटन शुरू कर देगी। मगर कब तक, इसका कोई जवाब नहीं है। डीएलएफ की टाउनशिप में 632 यूनिट ईडब्ल्यूएस और 632 यूनिट ही एलआईजी भवनों का प्रावधान है। इनका लेआउट प्लान और फायर एनओसी भी हो चुकी है।