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बिना पढ़ाए गुरूजी स्कूल से नहीं हो सकेंगे नदारद
Updated Mon, 25 Jun 2018 11:00 PM IST
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बलरामपुर। माध्यमिक शिक्षा परिषद के राजकीय व अनुदानित कॉलेजों में अब गुरूजी की मर्जी के हिसाब से नहीं बल्कि कलेंडर के हिसाब से कक्षाएं संचालित कराई जाएंगी। प्रदेश सरकार ने शिक्षकों को तय समय पर कक्षा में आकर पढ़ाने के लिए निर्धारण कर दिया है। शिक्षक अब मनमानी से क्लास बंक नहीं मार पाएंगे। कॉलेज में बिना आए फर्जी हाजिरी भी नहीं लग सकेगी। पढ़ाई को पटरी पर लाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। माध्यमिक स्कूलों का संचालन सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगा। शिक्षक और छात्र प्रतिदिन कालेज आएं इसके लिए बायोमेट्रिक सिस्टम से हाजिरी लगेगी।
जिले में 44 सरकारी स्कूलों का हो रहा संचालन
जिले में 44 सरकारी माध्यमिक स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। कक्षा छह से 12 तक के 18 हाईस्कूल स्तर के राजकीय, चार इंटरमीडिएट स्तर के राजकीय, 19 अनुदानित कालेजों तथा तीन संस्कृत विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है।
माध्यमिक स्कूलों में 81 हजार छात्रों का है दाखिला
डीआईओएस दफ्तर के वरिष्ठ सहायक प्रवीन कुमार सिंह ने बताया कि जिले के सभी माध्यमिक स्कूलों में करीब 81 हजार छात्रों का दाखिला कराया जाता है। सभी माध्यमिक स्कूलों में कक्षा छह से आठ तक के करीब 25 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। कक्षा 9 में 18 हजार छात्रों का एडमिशन अप्रैल 2018 में कराया गया है। जुलाई 2018 में कक्षा 11 में करीब 10 हजार छात्रों के दाखिले होंगे। कक्षा 10 व 12 में भी करीब 28 हजार छात्र अध्ययनरत हैं।
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सीसीटीवी कैमरों से लैस हैं मात्र 26 स्कूल
जिले के सभी 44 स्कूलों में हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लगवाए जा चुके हैं। शिक्षकों व छात्रों की हाजिरी बायोमेट्रिक सिस्टम से कराई जा रही है। जिले में 44 के सापेक्ष अभी तक मात्र 26 माध्यमिक स्कूलों में ही सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। चार इंटरमीडिएट स्तर के राजकीय, 19 अनुदानित कालेजों तथा तीन संस्कृत विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लग सके हैं। वरिष्ठ सहायक ने बताया कि 18 हाईस्कूल स्तर के राजकीय स्कूलों में बजट न होने के चलते सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवाए जा सके हैं।
शासन को भेजा गया प्रस्ताव
डीआईओएस महेन्द्र कुमार कन्नौजिया ने बताया कि हाईस्कूल स्तर के राजकीय स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से बजट मिलने के बाद तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएंगे। जिले के सभी माध्यमिक स्कूलों में शैक्षिक माहौल सुधारने के लिए शासन ने कड़े निर्देश दिए हैं। जुलाई से नियमित रूप से औचक निरीक्षण किया जाएगा तथा पूरी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाएगी। माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ाने में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को बख्शा नहीं जाएगा। पढ़ाई के माहौल में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित माध्यमिक स्कूल के प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे।
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जिले में 44 सरकारी स्कूलों का हो रहा संचालन
जिले में 44 सरकारी माध्यमिक स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। कक्षा छह से 12 तक के 18 हाईस्कूल स्तर के राजकीय, चार इंटरमीडिएट स्तर के राजकीय, 19 अनुदानित कालेजों तथा तीन संस्कृत विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है।
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माध्यमिक स्कूलों में 81 हजार छात्रों का है दाखिला
डीआईओएस दफ्तर के वरिष्ठ सहायक प्रवीन कुमार सिंह ने बताया कि जिले के सभी माध्यमिक स्कूलों में करीब 81 हजार छात्रों का दाखिला कराया जाता है। सभी माध्यमिक स्कूलों में कक्षा छह से आठ तक के करीब 25 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। कक्षा 9 में 18 हजार छात्रों का एडमिशन अप्रैल 2018 में कराया गया है। जुलाई 2018 में कक्षा 11 में करीब 10 हजार छात्रों के दाखिले होंगे। कक्षा 10 व 12 में भी करीब 28 हजार छात्र अध्ययनरत हैं।
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सीसीटीवी कैमरों से लैस हैं मात्र 26 स्कूल
जिले के सभी 44 स्कूलों में हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लगवाए जा चुके हैं। शिक्षकों व छात्रों की हाजिरी बायोमेट्रिक सिस्टम से कराई जा रही है। जिले में 44 के सापेक्ष अभी तक मात्र 26 माध्यमिक स्कूलों में ही सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। चार इंटरमीडिएट स्तर के राजकीय, 19 अनुदानित कालेजों तथा तीन संस्कृत विद्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लग सके हैं। वरिष्ठ सहायक ने बताया कि 18 हाईस्कूल स्तर के राजकीय स्कूलों में बजट न होने के चलते सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवाए जा सके हैं।
शासन को भेजा गया प्रस्ताव
डीआईओएस महेन्द्र कुमार कन्नौजिया ने बताया कि हाईस्कूल स्तर के राजकीय स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासन से बजट मिलने के बाद तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएंगे। जिले के सभी माध्यमिक स्कूलों में शैक्षिक माहौल सुधारने के लिए शासन ने कड़े निर्देश दिए हैं। जुलाई से नियमित रूप से औचक निरीक्षण किया जाएगा तथा पूरी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाएगी। माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों को पढ़ाने में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को बख्शा नहीं जाएगा। पढ़ाई के माहौल में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित माध्यमिक स्कूल के प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे।