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पूर्व विधायक जलील खां की हार्ट अटैक से हुई मौत
Updated Thu, 14 Jun 2018 10:48 PM IST
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गोेंडा। मिलनसार व्यक्तित्व और विधायक बनने के बावजूद पांच साल तक ठेके-पट्टों से दूरी बनाए रखने वाले हर दिल अजीज नेता मो. जलील खां का बुधवार देर रात निधन हो गया। बताया जाता है कि रात में जलील खां इशा की नमाज अदा करने मस्जिद गए थे, जहां उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई। इस पर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से रेफर किए जाने के बाद घर वाले उन्हें लेकर एक नर्सिंग होम पहुंचे ही थे कि देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। पूर्व विधायक के निधन की खबर मिलते ही पूरा जिला शोक में डूब गया। जबकि जमुनियाबाग में पूर्व विधायक के घर से लेकर फैजाबाद रोड पर उमड़ी भीड़ उनके सुपुर्देखाक होने के बाद ही खत्म हुई।
वर्ष 2002 में बसपा से राजनीतिक कॅरियर की शुरूआत करने वाले बसपा नेता जलील खां की लोकप्रियता लोगों के लिए शुरू से एक मिसाल रही। 2002 में बसपा के टिकट पर सदर सीट से चुनाव लड़े जलील खां भले ही अपना पहला चुनाव हार गए होें, लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में लोगोें ने उनकी सादगी को इस कदर हाथोंहाथ लिया कि वह दूसरी बार में ही विधायक बन गए। वे मायावती के बेहद करीबी रहे। हालांकि वर्ष 2012 के चुनाव में ऐन मौके पर बसपा ने उनका टिकट काट दिया, जिस पर मजबूरन उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा। जबकि वर्ष 2017 के चुनाव में मोदी लहर उन पर हावी रही और जीते जी दोबारा विधायक की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए। मो. जलील खां को श्रद्धांजलि देने बसपा के नेता सदन व विधायक लालजी के साथ पूर्व मंत्री/सांसद लालमणि प्रसाद भी पहुंचे।
...बहुत याद आएगा वह गाड़ी में सिलेंडर ढोना
यह बात कोई 10 साल पुरानी होगी। जब जिले भर के लोग एक-एक सिलेंडर के लिए सड़क पर उतर आते थे। जमुनिया बाग हो या फिर सदर क्षेत्र का कोई भी गांव। जैसे ही सदर विधायक गांव में पहुंचते, लोग उनसे शादी-ब्याह या फिर अन्य किसी कार्यक्रम के लिए सीधे सिलेंडर की डिमांड कर देते। लेकिन सादगी ऐसी कि जलील खां खुद ही बोल उठते कि चलो सिलेंडर गाड़ी में लाद दो, आएंगे तो भरा हुआ सिलेंडर ले लेना।
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वर्ष 2002 में बसपा से राजनीतिक कॅरियर की शुरूआत करने वाले बसपा नेता जलील खां की लोकप्रियता लोगों के लिए शुरू से एक मिसाल रही। 2002 में बसपा के टिकट पर सदर सीट से चुनाव लड़े जलील खां भले ही अपना पहला चुनाव हार गए होें, लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में लोगोें ने उनकी सादगी को इस कदर हाथोंहाथ लिया कि वह दूसरी बार में ही विधायक बन गए। वे मायावती के बेहद करीबी रहे। हालांकि वर्ष 2012 के चुनाव में ऐन मौके पर बसपा ने उनका टिकट काट दिया, जिस पर मजबूरन उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा। जबकि वर्ष 2017 के चुनाव में मोदी लहर उन पर हावी रही और जीते जी दोबारा विधायक की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए। मो. जलील खां को श्रद्धांजलि देने बसपा के नेता सदन व विधायक लालजी के साथ पूर्व मंत्री/सांसद लालमणि प्रसाद भी पहुंचे।
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...बहुत याद आएगा वह गाड़ी में सिलेंडर ढोना
यह बात कोई 10 साल पुरानी होगी। जब जिले भर के लोग एक-एक सिलेंडर के लिए सड़क पर उतर आते थे। जमुनिया बाग हो या फिर सदर क्षेत्र का कोई भी गांव। जैसे ही सदर विधायक गांव में पहुंचते, लोग उनसे शादी-ब्याह या फिर अन्य किसी कार्यक्रम के लिए सीधे सिलेंडर की डिमांड कर देते। लेकिन सादगी ऐसी कि जलील खां खुद ही बोल उठते कि चलो सिलेंडर गाड़ी में लाद दो, आएंगे तो भरा हुआ सिलेंडर ले लेना।
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