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यूपी में बाढ़ से 110 मौतें, 300 करोड़ की फसल चौपट होने से किसानों की कमर टूटी

Mon, 11 Sep 2017 09:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 11 Sep 2017 09:15 AM IST
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110 deaths because of flood in Uttar Pradesh.
file foto - फोटो : amar ujala

यूपी में बाढ़ का कहर 24 जिलों से घटकर अब चार तक सीमित रह गया है। बाढ़ से नुकसान की वास्तविक तस्वीर तो बाढ़ के पूरी तरह खत्म होने के बाद धीरे-धीरे ही सामने आएगी, लेकिन बाढ़ प्रभावित जिलों ने नुकसान का जो शुरुआती अनुमान लगाया है, उसमें जन-धन की बड़े पैमाने पर हानि और किसानों की कमर टूटने की कहानी बयां हो रही है।

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बाढ़ राहत से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि पूर्वांचल और तराई के 24 जिलों ने वर्षों बाद बाढ़ का ऐसा तांडव झेला है। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे नागरिकों को अपने परिवार के110 सदस्यों की मौत से दोहरा दु:ख का सामना करना पड़ा।
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पिछले कई वर्षों से दैवी आपदा का सामना कर रहे किसानों को इस बार बेहतर फसल की उम्मीद थी। फसल अच्छी थी भी, लेकिन बाढ़ ने किसानों की कमर ही तोड़ दी। तीन लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई और इसमें सवा दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा बोई फसल बर्बाद हो गई।
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जानकार बताते हैं कि एक हेक्टेयर फसल की बर्बादी का मतलब 40 से 50 हजार रुपये की फसल का चौपट होना है। हालांकि जिलाधिकारियों की छह सितंबर की रिपोर्ट में 306 करोड़ रुपये से अधिक की फसल बर्बाद होने की ही जानकारी दी गई है। अधिकारी कहते हैं कि यह शुरुआती अनुमान है। वास्तविक नुकसान की जानकारी बाढ़ पूरी तरह खत्म होने के बाद सर्वे से ही सामने आएगी। इसमें नुकसान के आंकड़े बढ़ने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा निजी व सरकारी परिसंपत्तियों के अंतर्गत मकान, दुकान, चौपाल, स्कूल, अस्पताल, पंचायत भवन अैर सड़क आदि को कितना नुकसान हुआ, यह भी इसमें शामिल नहीं है। इनकेआंकड़े भी जुड़ेंगे, तभी पूरी तरह से तस्वीर साफ हो पाएगी।

ये देखें, फैक्टफाइल

110 deaths because of flood in Uttar Pradesh.
बाढ़ से नुकसान
बाढ़ प्रभावित जिले--24
बाढ़ प्रभावित गांव--3133
प्रभावित जनसंख्या--29.22 लाख
जनहानि--110
पशुहानि--92

प्रभावित कृषि क्षेत्र--3,13,997.03 हेक्टेयर
बोया गया प्रभावित क्षेत्र--2,34,614.26 हेक्टेयर
फसल नुकसान--306.72 करोड़ रुपये
 
परिसंपत्तियों का नुकसान
पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के मकान--325
पूरी तरह क्षतिग्रस्त कच्चे मकान--857
आंशिक क्षतिग्रस्त पक्के मकान--621
आंशिक क्षतिग्रस्त कच्चे मकान --9,161            
क्षतिग्रस्त झोपड़ियां--13,036
क्षतिग्रस्त सार्वजनिक परिसंपत्तियां--161
 
राहत कार्यों की सीएम ने खुद की अगुवाई
अधिकारी बताते हैं कि बाढ़ प्रदेश का स्थायी संताप है। हर दूसरे-तीसरे साल कुछ कम-ज्यादा बाढ़ आती ही रहती है, लेकिन इस बार जिस तरह बाढ़ विकराल रूप में सामने आई, उसी तरह सरकार भी राहत व बचाव में उतरी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद बाढ़ राहत कार्यों का नेतृत्व किया। ज्यादातर बाढ़ प्रभावित जिलों का उन्होंने हवाई सर्वेक्षण किया और एक-एक हफ्ते के लिए राहत सामग्री बांटी। बाढ़ व सिंचाई मंत्री के साथ ही सरकार के अन्य मंत्रियों और सांसद-विधायकों का इस काम में भरपूर सहयोग मिला। शासन के कई अफसरों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाला और राहत कार्यों को नेतृत्व दिया।

बाढ़ राहत मेमारेंडम के लिए नुकसान का ब्योरा तलब

110 deaths because of flood in Uttar Pradesh.

राहत आयुक्त ने अब बाढ़ प्रभावित 24 जिलों के डीएम से नुकसान की वास्तविक जानकारी मांगी है। इनसे 25 सितंबर तक जनहानि, पशुहानि, फसल से नुकसान और संपत्ति हानि की विस्तार से जानकारी मांगी गई है। बाढ़ से नुकसान की वास्तविक जानकारी सामने आने पर सरकार केंद्र से बाढ़ राहत का मेमोरेंडम भेजेगी।

बाढ़ राहत के लिए 16.75 करोड़ और जारी
अधिकारी ने बताया कि जिलों को राहत कार्यों के लिए अब तक करीब 100 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा जैसे-जैसे डिमांड मिल रही है, अतिरिक्त राशि जारी की जा रही है। बहराइच, महराजगंज और सिद्धार्थनगर को 5-5 करोड़, आजमगढ़, जौनपुर व अमेठी को 50-50 लाख और हमीरपुर को 25 लाख रुपये और जारी किए गए हैं।

गंगा से बाढ़ की आशंका बरकरार
बाहरी नदियों के पानी से बाढ़ की चुनौती कमजोर पड़ने से राहत से जुड़े लोगों ने भी राहत महसूस की है, लेकिन गंगा नदी से हर साल आने वाली बाढ़ की आशंका से इनकी बेचैनी महसूस की जा सकती है। राहत से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि गंगा से बाढ़ सितंबर के आसपास आती है। गंगा नदी से जुड़े जिलों के डीएम को संभावित बाढ़ के मद्देनजर सतर्क रहने और गंगा के जल स्तर पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। कई स्थानों पर गंगा का जलस्तर बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं।

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