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अंतिम संस्कार मुश्किल, प्रवाहित कर रहे शव
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:47 PM IST
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बहराइच। बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात बेकाबू हैं। गांव के गांव पानी में डूबे हुए हैं। जिंदगी दुश्वार हो गई है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों मेें दम तोड़ने वाले लोगों के अंतिम संस्कार में दुश्वारियों बढ़ गई हैं। चारो तरफ पानी ही पानी हैँ। जगह ही नहीं बची है कि शव को कहां दफनाएं या जलाएं। मजबूरी ऐसी है कि अंतिम यात्रा में भी लोग शामिल नहीं हो पा रहे हैं। वहीं लकड़ियां गीली होने से शवों का दाह करने में मुसीबत है। इससे बचने के लिए लाशों को नदियों में ही प्रवाहित किया जा रहा है।
जिले में छह दिन सये बाढ़ की विभीषिका लोगों को बेहाल किए हुए है। अचानक आयी बाढ़ में शुरुआती दौर में साढ़े नौ सौ गांव चपेट में आए। पांचवें दिन कुछ पानी खिसका है लेकिन अभी भी 694 गांवों में बाढ़ बरकरार है। अभी भी चार लाख की आबादी बाढ़ के संकट का सामना कर रही है। इस बाढ़ की त्रासदी में ही सात लोगों की मौत हुई। इनमें तीन बच्चे हैं। एक बच्चे के शव को तो शुरुआती दौर में परिवारीजनों ने तटबंध के निकट जमीन खोजकर दफना दिया। लेकिन अन्य को दफनाने के लिए जमीन न मिलने पर उनके शव को आंसुओं के बीच नदी में प्रवाहित कर दिया गया। यही हाल अन्य दो ग्रामीणों की लाशों का भी हुआ। हालात यह हैं कि लोग अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। चारों तरफ पानी है न तो खाली जमीन मिल रही है न ही सूखी लकड़ियां ऐसे में लोग जैसे तैसे जिंदगी से समझौता करने को मजबूर हैं।
केस नं.-01
नहीं मिली जमीन तो किया प्रवाहित
महसी तहसील के धोबिनपुरवा गांव निवासी रामकुमार का चार वर्षीय पुत्र मुन्ने तीन दिन पूर्व अचानक आढ़ आने पर आंगन में खेलते समय डूब गया था। इससे घर में कोहराम मच गया था। बेटे की लाश के साथ परिवार के लोग आठ घंटे छप्पर पर बैठे रहे। बाद में नाव की व्यस्था होने पर रामकुमार ने बेटे के शव को घाघरा नदी में प्रवाहित कर दिया।
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केस नंबर-02
घाघरा मैया को सौंप दिया बेटा
महसी निवासी 16 वर्षीय शिवकुमार की मौत भी दो दिन पूर्व बाढ़ में डूबकर हुई। लेकिन शव दफनाने की जगह न मिलने पर पिता रामकुमार ने परिवारीजनों के साथ नाव पर बैठकर बेटे के शव को आंसुओं के बीच घाघरा नदी में प्रवाहित कर दिया। बोले घाघरा मैया ने खुशियां छीन लीं ऐसे में बेटे को उन्ही की गोदी में दे दिया।
केस नं. -03
लाश को दफनाया
नानपारा तहसील अंतर्गत खैराकलां गांव निवासी शफीक पुत्र मूसे की भी डूबकर मौत हुई। लेकिन परिवार के लोगों ने किसी तरह नाव का इंतजाम कर शव को बेलहा बेहरौली तटबंध के निकट पहुंचाकर दफनाया। लेकिन रिश्तेदार ही अंतिम संस्कार में नहीं शामिल हो सके।
बाढ़ से हैं दिक्कतें खाली जमीन में करें अंतिम संस्कार
बाढ़ के चलते दिक्कतें अधिक हैं। न जमीन है न सूखी लकड़ी ऐसे में दम तोड़ने वालों का अंतिम संस्कार खाली जमीन मेें परिवारीजन कर सकते हैं। कोई बंदिश नहीं है। नदी में शव प्रवाहित करना जुर्म जरूर है लेकिन बाढ़ की आपदा में पीड़ित कहां जाएं।
नरेंद्र कुमार, उपजिलाधिकारी महसी
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जिले में छह दिन सये बाढ़ की विभीषिका लोगों को बेहाल किए हुए है। अचानक आयी बाढ़ में शुरुआती दौर में साढ़े नौ सौ गांव चपेट में आए। पांचवें दिन कुछ पानी खिसका है लेकिन अभी भी 694 गांवों में बाढ़ बरकरार है। अभी भी चार लाख की आबादी बाढ़ के संकट का सामना कर रही है। इस बाढ़ की त्रासदी में ही सात लोगों की मौत हुई। इनमें तीन बच्चे हैं। एक बच्चे के शव को तो शुरुआती दौर में परिवारीजनों ने तटबंध के निकट जमीन खोजकर दफना दिया। लेकिन अन्य को दफनाने के लिए जमीन न मिलने पर उनके शव को आंसुओं के बीच नदी में प्रवाहित कर दिया गया। यही हाल अन्य दो ग्रामीणों की लाशों का भी हुआ। हालात यह हैं कि लोग अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। चारों तरफ पानी है न तो खाली जमीन मिल रही है न ही सूखी लकड़ियां ऐसे में लोग जैसे तैसे जिंदगी से समझौता करने को मजबूर हैं।
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केस नं.-01
नहीं मिली जमीन तो किया प्रवाहित
महसी तहसील के धोबिनपुरवा गांव निवासी रामकुमार का चार वर्षीय पुत्र मुन्ने तीन दिन पूर्व अचानक आढ़ आने पर आंगन में खेलते समय डूब गया था। इससे घर में कोहराम मच गया था। बेटे की लाश के साथ परिवार के लोग आठ घंटे छप्पर पर बैठे रहे। बाद में नाव की व्यस्था होने पर रामकुमार ने बेटे के शव को घाघरा नदी में प्रवाहित कर दिया।
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केस नंबर-02
घाघरा मैया को सौंप दिया बेटा
महसी निवासी 16 वर्षीय शिवकुमार की मौत भी दो दिन पूर्व बाढ़ में डूबकर हुई। लेकिन शव दफनाने की जगह न मिलने पर पिता रामकुमार ने परिवारीजनों के साथ नाव पर बैठकर बेटे के शव को आंसुओं के बीच घाघरा नदी में प्रवाहित कर दिया। बोले घाघरा मैया ने खुशियां छीन लीं ऐसे में बेटे को उन्ही की गोदी में दे दिया।
केस नं. -03
लाश को दफनाया
नानपारा तहसील अंतर्गत खैराकलां गांव निवासी शफीक पुत्र मूसे की भी डूबकर मौत हुई। लेकिन परिवार के लोगों ने किसी तरह नाव का इंतजाम कर शव को बेलहा बेहरौली तटबंध के निकट पहुंचाकर दफनाया। लेकिन रिश्तेदार ही अंतिम संस्कार में नहीं शामिल हो सके।
बाढ़ से हैं दिक्कतें खाली जमीन में करें अंतिम संस्कार
बाढ़ के चलते दिक्कतें अधिक हैं। न जमीन है न सूखी लकड़ी ऐसे में दम तोड़ने वालों का अंतिम संस्कार खाली जमीन मेें परिवारीजन कर सकते हैं। कोई बंदिश नहीं है। नदी में शव प्रवाहित करना जुर्म जरूर है लेकिन बाढ़ की आपदा में पीड़ित कहां जाएं।
नरेंद्र कुमार, उपजिलाधिकारी महसी