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यूपी में 10 लाख ओबीसी छात्रों से 'धोखा'
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 16 Jan 2014 01:11 PM IST
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अन्य पिछड़ा वर्ग के आधे से ज्यादा छात्रों को इस बार शुल्क की प्रतिपूर्ति नहीं हो पाएगी।
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सभी छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए विभाग को करीब दो हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी, मगर उसके पास सिर्फ 862 करोड़ रुपये ही हैं।
पिछले साल के मुकाबले सात लाख छात्र बढ़े हैं, लेकिन बजट में मामूली 24 करोड़ रुपये की ही वृद्धि की गई है।
NIC वेबसाइट पर आवेदन
शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए इस बार एनआईसी की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन लिया जा रहा है। वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 21 लाख 57 हजार छात्रों के फॉर्म विभिन्न शिक्षण संस्थानों ने स्वीकार कर लिए हैं।
छात्रों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद शिक्षण संस्थान अपनी स्वीकृति देते हैं। इसके बाद वे अपनी रिपोर्ट शिक्षा अधिकारियों को अग्रसारित करते हैं।
संस्थानों को यह रिपोर्ट अग्रसारित करने के लिए 20 जनवरी तक समय दिया गया है।
अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक 16 लाख 60 हजार फॉर्म संस्थानों ने अग्रसारित कर दिए हैं। 20 जनवरी तक यह आंकड़ा बीस लाख तक पहुंचेगा।
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डेढ़ लाख फॉर्म होंगे कैंसिल!
जांच में ज्यादा से ज्यादा डेढ़ लाख फॉर्म ही किन्हीं वजहों से कैंसिल होने की उम्मीद है। अमूमन ऐसा तब होता है, जब एक ही छात्र दो बार आवेदन कर देता है। बीस लाख छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए विभाग को दो हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी।
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बता दें कि पिछले साल 13 लाख 55 हजार छात्र शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए पात्र पाए गए थे, जिसके लिए कुल 1355 करोड़ रुपये की जरूरत थी।
लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को इस मद में 838 करोड़ रुपये ही मिले थे। नतीजतन 38 फीसदी छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं की जा सकी थी।
इस बार स्थिति और भी खराब रहेगी। उम्मीद थी कि केंद्र सरकार ज्यादा बजट देगी, मगर उसने मात्र 149 करोड़ रुपये ही दिए।
12 करोड़ राशि कम
पिछले साल के मुकाबले यह राशि 12 करोड़ रुपये कम है। इस तरह से केंद्र और राज्य सरकार से विभाग को कुल 862 करोड़ रुपये ही मिले हैं। यानी 57 फीसदी छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं हो पाएगी।