Navratri 2023: नवरात्रि पर जरूर करें दुर्गा सप्तशती का पाठ, प्रवेश द्वार पर क्यों बांधा जाता है बंदनवार
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Sun, 15 Oct 2023 02:08 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 15 Oct 2023 02:08 PM IST
खास बातें
Navratri 2023 1st Day Colour Kalash Sthapana Time in Hindi: रविवार, 15 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गए हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर देवी आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ हो जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना होती है और मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है।
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शारदीय नवरात्रि 2023
- फोटो : अमर उजाला
लाइव अपडेट
02:01 PM, 15-Oct-2023
जानिए नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती पाठ करने के फायदे
नवरात्रि पर मां की पूजा-आराधना 9 दिनों तक लगातार होती है। नवरात्रि पर्व सुबह और शाम को मां दुर्गा की विधि-विधान के साथ पूजा, भोग, आरती और मंत्रोचार करने का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि में दुर्गासप्तशी का पाठ करना बहुत ही लाभदायक माना जाता है। इसके पाठ से कई तरह के फायदे मिलते हैं। सप्तशती में कुल 13 अध्याय हैं जिन्हें 3 हिस्सों में बांटा गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शांति, धन, सुख- समृद्धि, यश और मान- सम्मान की प्राप्ति होती है। सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्तोत्र और मंत्र हैं, जिनके विधिवत पाठ से वांछित फल की प्राप्ति होती है।
सर्वकल्याण के लिए
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।
बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।
आरोग्य और सौभाग्य प्राप्ति के लिए
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजही ||
सर्वकल्याण के लिए
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।
बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।
आरोग्य और सौभाग्य प्राप्ति के लिए
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजही ||
01:46 PM, 15-Oct-2023
नवरात्रि का पर्व शक्ति का आराधना और साधना का पर्व माना गया है। धार्मिक मान्याताओं के अनुसार मां दुर्गा को लाल रंग बहुत ही प्रिय होता है। लाल रंग को वास्तु में भी शक्ति और शौर्य का प्रतीक माना गया है इसलिए देवी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, श्रृंगार की वस्तुएं और फूल यथासंभव लाल रंग के ही होने चाहिए।
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01:25 PM, 15-Oct-2023
Navratri 2023: नवरात्रि पर प्रवेश द्वार पर क्यों बांधा जाता है बंदनवार ?
हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा की उपासना का समय होता है। नवरात्रि के पहले दिन घर की साफ-सफाई और मुख्य द्वार पर बंदनवार बांधा जाता है। देवी मां की पूजा-अनुष्ठान के दौरान घर के प्रवेश द्वार पर आम या अशोक के ताज़े हरे पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है। क्या आपको पता है आखिर क्यों यह बंदनवार बांधा जाता है। दरअसल इससे घर में नकारात्मक या बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। माना जाता है कि देवी माँ की पूजा के दौरान देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी घर में प्रवेश करती हैं,लेकिन मुख्यद्वार पर बंदनवार लगी होने के कारण तामसिक शक्तियां घर के बाहर ही रहती हैं।
12:56 PM, 15-Oct-2023
Navratri Ghatsthapana Importance: नवरात्रि में क्यों करते हैं कलश स्थापना ?
नवरात्रि के पहले दिन प्रदिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा के साथ-साथ नौ दिनों तक कलश स्थापना की जाती है। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि,वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह, नक्षत्रों और तीर्थों का वास होता है। इनके आलावा ब्रह्मा, विष्णु,रूद्र,सभी नदियों,सागरों,सरोवरों और 33 कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं।12:33 PM, 15-Oct-2023
Shardiya Navratri 2023 Colour: नवरात्रि की नौ देवियां और नौ रंग
मां शैलपुत्री - मां को नारंगी रंग प्रिय है।मां ब्रह्मचारिणी - मां को सफेद रंग प्रिय है।
मां चंद्रघंटा - मां को लाल रंग प्रिय है।
मां कूष्मांडा - मां को नीला रंग प्रिय है।
मां स्कंदमाता - मां को पीला रंग प्रिय है।
मां कात्यायनी - मां को हरा रंग प्रिय है।
मां कालरात्रि - मां को स्लेटी रंग प्रिय है।
मां महागौरी - मां को बैंगनी रंग प्रिय है।
मां सिद्धिदात्री - मां को हरा रंग प्रिय है।
12:15 PM, 15-Oct-2023
Shardiya Navratri 2023 Puja Vidhi:नवरात्रि पर क्यों जलाते हैं अखंड ज्योति
आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुके हैं। नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाई जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में महाशक्ति की आराधना करने वाले जातक अखंड ज्योति जलाकर मां दुर्गा की उपासना करते हैं। अखंड का अर्थ है जो खंडित न हो अर्थात ।जरूरी नहीं कि अखंड ज्योत पूरे नौ दिनों तक ही जलाई जाए,अष्टमी या नवमी के दिन पूजा के समय 24 घंटे के लिए भी अखंड दीपक जलाया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अखंड ज्योति जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,घर के सदस्यों को यश एवं प्रसिद्धि मिलती है। सुख-समृद्धि,आयु,आरोग्य एवं सुखमय जीवन में वृद्धि होती।
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11:47 AM, 15-Oct-2023
नवरात्रि पर जरूर होनी चाहिए घर पर ये चीजें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा 9 दिनों के लिए पृथ्वी पर वास करती हैं और अपने भक्तों आशीर्वाद प्रदान करती है। वहीं भक्त पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि पर घर पर कुछ चीजें जरूर होने चाहिए। आइए जानते हैं घर पर क्या-क्या चीजें होने चाहिए। 16 श्रृंगार की चीजें, श्रीयंत्र, दक्षिणावर्ती शंख, मोर पंख, लाल फूल, नारियल आदि।11:30 AM, 15-Oct-2023
Maa Shailputri Mantra: मां शैलपुत्री के मंत्र
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और साथ में इनसे जुड़े मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति को सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशियां, सुख-समृद्धि आती हैं। इसके अलावा वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और शांति आती है।1- ऊँ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
2- वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
3- या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
11:09 AM, 15-Oct-2023
Durga Mata Ki Aarti Jai Ambe Gauri:नवरात्रि पर जरूर करनी चाहिए मां दुर्गा की आरती
मां दुर्गाजी की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
मांग सिंदूर विराजत, टीको जगमद को।
उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
मांग सिंदूर विराजत, टीको जगमद को।
उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।
10:54 AM, 15-Oct-2023