Jaipur SMS Hospital Fire : मृतकों के परिवार वालों की न्यायिक जांच की मांग,आठ की मौत पर शुरू हुई सियासत
Jaipur SMS Hospital Fire: राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आग लगने से आठ मरीजों की मौत हो गई। मृतकों को शव परिवार वालों को सौंप दिए गए हैं। वहीं परिवार के लोग न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। इन सब के बीच सियासत भी शुरू हो गई है।
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एसएमएस अस्पताल में मरीजों की मौत के बाद परिवार वाले न्यायिक जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इन्हें पुलिस ने मौके से हटा दिया है। इसके अलावा कुछ युवा नेता भी अस्पताल में प्रदर्शन करने पहुंचे थे। फिलहाल पुलिस ने सभी को प्रदर्शन स्थल से हिरासत में ले लिया है। यहां पर सुरक्षा बल बढ़ा दिया गया है।
सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के जरिए नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि इस घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति नहीं हो। इसलिए हाईकोर्ट के सीटिंग अथवा रिटायर्ड जज की मॉनिटरिंग में एक आयोग बनाकर इस पूरे मामले की न्यायिक जांच करवाई जाए। साथ ही राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा और आपात प्रबंधन प्रणाली की तुरंत समीक्षा करवाई जाए। इस आगजनी की घटना में दिवंगत हुए नागरिकों के परिजनों को एक- एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी जाए। जो गंभीर रूप से झुलसे हैं, उनका बेहतर से बेहतर इलाज करवाया जाए।
बंद कमरे में बातचीत से मना कर रहे परिजनों को मनाने अस्पताल प्रशासन उनके बीच पहुंचा। प्रशासन का कहना है उपमुख्यमंत्री, कलेक्टर, जिला प्रशासन और अन्य लोग अस्पताल में मौजूद हैं। मृतकों के परिजनों में से कोई भी प्रतिनिधि अपनी समस्याओं पर उनसे बैठकर बात करें।
अस्पताल प्रशासन और परिजनों के बीच काफी जद्दोजहद के बाद बंद कमरे में आपसी बातचीत पर सहमति बन गई है और परिजनों के प्रतिनिधि सरकार से बात करने को राजी हो गए हैं।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म और उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने एसएमएस के ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर मृतकों के परिजनों से बातचीत की। परिजनों ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों मंत्रियों का कहना है कि सरकार की संवेदनशीलता पीड़ितों के साथ है। मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर मंत्रियों और परिजनों के बीच क्या बातचीत हुई इस बारे में पूछे जाने पर एक परिजन ने बताया कि सरकार में बात करना चाहती है।
रात में भी मुख्यमंत्री अस्पताल पहुंचे लेकिन किसी भी परिजन से बात नहीं की। सरकार की ओर से मंत्री आ-जा रहे हैं लेकिन परिजनों से कोई मुलाकात नहीं कर रहा। उल्टे मृतकों के घर जाकर उनके परिजनों को धमकाया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एसएमएस अस्पताल पहुंचकर ट्रॉमा सेंटर ICU में हुए अग्निकांड की जानकारी ली और हादसे में जान गंवाने वाले मरीजों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हिम्मत बंधाई।
उन्होंने कहा कि यह बेहद अफसोसजनक है कि इन परिजनों में राज्य सरकार द्वारा इनके साथ किए गए व्यवहार के प्रति रोष है क्योंकि सरकार ने इनके प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई है। परिजनों ने बताया कि उनसे अभी तक सरकार के किसी प्रतिनिधि ने बात नहीं की है।
गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को अविलंब मृतकों के परिजनों से बात करते हुए इन्हें संतुष्ट करना चाहिए एवं पीड़ितों को न्याय के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन करना चाहिए।
एसएमएस अस्पताल में हुए अग्निकांड को लेकर एनएसयूआई ने हादसे केा सरकारी तंत्र की लापरवाही बताते हुए कहा है कि जब जीवन रक्षक संस्थान ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता सुरक्षा कैसे हो? हादसे को लेकर एनएसयूआई सदस्य आज शहीद स्मारक पर एकत्र होकर मृतकों को श्रद्धांजलि देंगे।
इतने बड़े हादसे के मृतकों का आंकड़ा अभी तक स्पष्ट नहीं है और न ही घायलों की कोई जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता मृतकों के परिजनों से उनके घर जाकर न्याय मिलने की उम्मीद के बयान ले रहे हैं। पुलिस यहां मौजूद परिजनों को खदेड़ रही है।
धरने पर बैठे परिजनों को पुलिस ने खदेड़ा
हादसे में मृतकों के परिजनों का आरोप है कि उनके घरों पर पुलिस भेजी जा रही है और उन्हें दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी बीच अस्पताल परिसर में धरना देकर नारेबाजी कर रहे लोगों को पुलिस ने खदेड़ दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी अस्पताल पहुंचकर मरीजों के साथ बातचीत की।
एसएमएस हादसे में मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। मरने वालों में पिंटू निवासी सीकर, दिलीप निवासी आंधी जयपुर, श्रीनाथ निवासी भरतपुर, रुकमणि निवासी भरतपुर, खुरमा निवासी भरतपुर, बहादुर निवासी सांगानेर जयपुर, सर्वेश देवी और दिगंबर वर्मा के नाम शामिल हैं।