MP Assembly Session:सीएम केयर योजना में बड़ी बीमारियों का होगा इलाज, स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में दी जानकारी
MP Vidhan Sabha Session 2026: स्वास्थ्य सेवाओं पर सदन में चर्चा हुई। कांग्रेस ने अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया। इसके अलावा दवाओं की कालाबाजारी, बड़ी बीमारियों का इलाज अस्पतालों में नहीं होने की बात भी सदन में उठी। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जल्द ही सीएम केयर योजना शुरू हो रही है। इसमें सभी बड़ी बीमारियों का इलाज प्रदेश में होगा।
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विभाग ने 58 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद निकाले- स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल
स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की सदन में घोषणा
सीएम केयर योजना शुरु होगी। किसी को प्रदेश के बाहर जाने की जरूर नहीं पड़ेगी। हार्ट, लीवर, कैंसर जैसे बीमारी का इलाज प्रदेश में होगा।अंगदान से जुड़ी हुई बीमारियों पर इस योजना में फोकस किया जाएगा। विपक्षी विधायकों ने कहा कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश से भेजे गए मरीजों का अन्य राज्यों में इलाज नहीं हो रहा है। छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट और महाकौशल समेत अन्य किसी भी स्थानों से जो मरीज नागपुर, चेन्नई, बेंगलूर पहुंच जाते हैं, उनका इलाज आयुष्मान कार्ड से नहीं होता है। स्वास्थ्य मंत्री ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस मसले को देख रही है।
चूहों को कंट्रोल करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च-नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सदन में कहा कि मध्य प्रदेश में कैग की रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है। चूहों को कंट्रोल करने के लिए करोड़ों रुपए का खर्च किया जा रहा है। इसमें भी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। यदि ड्रग सेफ्टी पर खर्चा देखा जाए तो मध्य प्रदेश के प्रति व्यक्ति पर एक रुपए से अधिक खर्च आ रहा है लेकिन सरकार मामले पर कुछ नहीं करती है। प्रदेश में अवैध और प्रतिबंधित दवाओं का काला कारोबार चरम पर है। नए तरीके का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ा मुद्दा है लेकिन मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा हो रही है। युवा आत्महत्या की तरफ जा रहे हैं। 32,385 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। 42 आत्महत्या प्रतिदिन हो रही हैं।नरसिंहपुर की घटना को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को 90 दिन में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बेहतर व्यवस्था करने का निर्देश दिया था।क्या सरकार छिंदवाड़ा में 26 मासूम की मौत के बाद नहीं सीखी- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकर बार बार कहती है कि अस्पतालों के लिए भवन बन रहे हैं। इन बिल्डिंगों में डॉक्टर नहीं है। यह बिल्डिंग किनके के लिए बना रहे हैं। अस्पतालों में चूहे निकल रहे हैं। इंदौर में पेस्ट कंट्रोल पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। एयर एंबुलेंस की बात हो रही है कि कई मरीजों को हमने एयरलिफ्ट किया। सरकार बार-बार 2047 का सपना दिखाती है। क्या 2047 में उप स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की भर्ती होगी। टेलीमेडिसिन की बात हो रही है। स्वास्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर नहीं है। क्या सरकार छिंदवाड़ा में 26 मासूम की मौत के बाद नहीं सीखी है।स्वास्थ्य व्यवस्था बीमार-कांग्रेस विधायक रेवनाथ चौरे
सौंसर से कांग्रेस विधायक रेवनाथ चौरे ने कहा कि मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था बीमार है। छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से बच्चे बीमार होते हैं। उनको नागपुर इलाज के लिए भेजा जाता है। इंदौर में बड़ी-बड़ी बातें होती हैं। दूषित पानी पीने से बीमार मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। यह स्वास्थ्य विभाग की हकीकत है। 5 लाख के मुफ्त इलाज का दावा किया जाता है। कई बीमारी में 10 लख रुपए लग जाते हैं।शिवपुरी में अस्पताल हैं, लेकिन हार्ट का डॉक्टर नहीं- विधायक कैलाश कुशवाहा
पोहरी से कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाहा ने कहा कि शिवपुरी में अस्पताल हैं, लेकिन हार्ट का डॉक्टर नहीं है। कोरोना के बाद हर 7 में से एक व्यक्ति को हार्ट अटैक आ रहा है। शिवपुरी जिले के अस्पताल में हार्ट का डाक्टर होना चाहिए। महिला चिकित्सक नहीं है। नर्सिंग स्टाफ डिलीवरी करा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की स्थिति बहुत ही खराब है। एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पा रही है। कुशवाहा ने दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दवा का असर कम हो रहा है।दवा ही जहर बन रही है। ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए।कफ सिरप पर बोले शेखावत
प्रदेश में कफ सिरप से मौत के मुद्दे को उठाते हुए शेखावत ने कहा कि प्रदेश में कफ सिरप बिक रहा है इससे 25 बच्चे मर गए। हम कहते हैं मंत्री का इस्तीफा दो लेकिन मंत्री क्या करेगा, हमारी व्यवस्था कितनी चरमरा गई. कहीं ना कहीं आपके तंत्र आपकी व्यवस्था में गड़बड़ी है।स्वास्थ्य व्यवस्था पर शेखावत के तीखे सवाल
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश से एमबीबीएस कर निकलने वाले डॉक्टर विदेशों और अन्य राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में पिछले 10 वर्षों का ऑडिट किया जाना चाहिए कि कितने डॉक्टर बने और उनमें से कितने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बड़ा सवाल है कि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी क्यों बनी हुई है और गांव से आने वाले मरीजों को बार-बार रैफर क्यों किया जाता है।
शेखावत ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के प्रयासों का सम्मान करते हैं, लेकिन केवल भवन निर्माण से अस्पताल नहीं बनते। उन्होंने पिछले 10-12 वर्षों का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग की और नर्सिंग घोटाले का उल्लेख करते हुए पूछा कि उसमें क्या कार्रवाई हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह महंगी मशीनें खरीदी गईं, लेकिन उन्हें संचालित करने के लिए ऑपरेटर उपलब्ध नहीं हैं। उदाहरण देते हुए कहा कि 6 करोड़ रुपये की डायलिसिस मशीन वर्षों से जंग खा रही है, क्योंकि उसे चलाने वाला स्टाफ नहीं है। आउटसोर्सिंग की व्यवस्था होने के बावजूद भुगतान की समस्या बनी हुई है।
इंदौर में 13 वर्षों से जिला अस्पताल का भवन अधूरा होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने जवाब दिया कि उक्त भवन का लोकार्पण अप्रैल में किया जाएगा और विधायक को भी आमंत्रित किया।
शेखावत ने आयुष्मान योजना को अच्छी पहल बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर इसकी स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अस्पतालों में मरीजों से पहले पैसे जमा करने को कहा जाता है और बाद में आयुष्मान से राशि समायोजित करने की बात कही जाती है। उन्होंने व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
अनुदान मांगों पर मतदान की प्रक्रिया
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर विचार के लिए मांग प्रस्ताव और कटौती प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किए गए, जिसके बाद बजट पर चर्चा प्रारंभ हुई।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की बजट अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अर्चना चिटनीस ने कहा कि मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने देहदान करने वाले 60 लोगों को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर सम्मानित किया है, जो एक संवेदनशील और प्रेरक पहल है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में टेलीमेडिसिन की बेहतर सुविधा शुरू की गई है। इसके तहत मेडिकल कॉलेजों को जिला और दूरस्थ अस्पतालों से जोड़ा गया है, ताकि मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध कराई जा सके। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के मरीजों को राहत मिल रही है।
आयुष्मान में गड़बड़ी का मुद्दा उठा
विधानसभा में आयुष्मान योजना में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। भाजपा विधायक अर्चना चिटनीस ने एक गंभीर विषय की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आयुष्मान प्रधानमंत्री की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं।उन्होंने कहा कि एक निजी अस्पताल के खिलाफ शिकायत होने पर जांच शुरू हुई, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही उस अस्पताल का आयुष्मान योजना से निरस्त किया गया लिंकेज दोबारा बहाल कर दिया गया। उन्होंने मांग की कि ऐसी महत्वपूर्ण योजनाओं का दुरुपयोग न हो, इसके लिए कड़ी निगरानी और दोषियों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए।
वहीं कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरी की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अस्पतालों की वास्तविक स्थिति सबके सामने है और यह चिंताजनक है कि सुधार की दिशा में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।
शेखावत ने कहा कि आबादी का 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा सरकारी अस्पतालों पर निर्भर है और गरीब व्यक्ति को सस्ता व सुलभ इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी आम आदमी को उचित इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी वास्तविक स्थिति सभी जानते हैं और पारदर्शिता तथा प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है।
प्रतिवेदनों की प्रस्तुति एवं स्वीकृति
विधानसभा में प्रतिवेदनों की प्रस्तुति एवं स्वीकृति की कार्रवाई के तहत लोक लेखा समिति के सभापति भंवर सिंह शेखावत ने समिति के 28वें से 127वें प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत किए।अध्यक्ष ने भंवर सिंह शेखावत और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि लंबित प्रतिवेदनों के बैकलॉग को समाप्त करना सराहनीय कार्य है।
प्राक्कलन समिति के सभापति अजय बिश्नोई के पारिवारिक कारणों से अनुपस्थित रहने पर उनकी ओर से भंवर सिंह शेखावत ने समिति के नवम एवं दशम प्रतिवेदन भी सदन में प्रस्तुत किए।
इसके बाद वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर मतदान की प्रक्रिया शुरू की गई। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर विचार के लिए मांग प्रस्ताव और कटौती प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किए गए।
