MP Assembly Session 2026 : भागीरथपुरा मुद्दे पर सदन में नहीं होगी चर्चा, विधानसभा अध्यक्ष ने बताया ये कारण
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में जमकर हंगामा हुआ। भागीरथपुरा के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष में गतिरोध बना रहा। विपक्ष सदन में चर्चा की मांग करता रहा। फिर कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि नियमों के अनुसार जो मुद्दा चर्चा में एक बार आ चुका है उसे स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा में दोबारा नहीं लाया जा सकता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लाइव अपडेट
विधानसभा में भागीरथपुरा पर आया स्थगन प्रस्ताव खारिज, नहीं होगी चर्चा
विधानसभा में भागीरथपुरा पर आए स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा की मांग पर व्यवस्था देते हुए कहा कि विधानसभा की नियमावली के नियम 55 के उपखंड 5 के अनुसार सत्र में लाए गए स्थगन प्रस्ताव में उस विषय की चर्चा नहीं हो सकती है जिस पर सदन के उसी सत्र में चर्चा हो चुकी है। उन्होंने व्यवस्था देते हुए कहा कि 19 फरवरी 2026 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का प्रश्न इसी विषय पर चर्चा में था जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं उत्तर दिया था। इसके अलाव अन्य सदस्य भी इस विषय पर प्रश्न कर चुके हैं। इन सभी के उत्तर सदन में पटल पर हैं। उन्होंने कहा कि उपखंड 7 के अनुसार सदन में उस विषय पर भी चर्चा नहीं हो सकती है जो किसी जांच आयोग के समक्ष है या न्यायालय में विचारधीन है। उन्होंने कहा कि इस घटना पर स्वयं न्यायालय ने संज्ञान लिया है। न्यायालय ने इस पर आयोग बनाया है। आयोग को सिविल कोर्ट के अधिकार दिए गए हैं। आयोग ने अपनी सुनवाई शुरु कर दी है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भागीरथपुरा के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा नहीं हो सकती है।धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू
मध्यप्रदेश सरकार ने नशामुक्ति के संकल्प को साकार करते हुए प्रदेश के सभी धार्मिक नगरों में शराबबंदी लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। साथ ही, मादक पदार्थों एवं सभी प्रकार के ड्रग्स के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए राज्य सरकार, केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित करलोगों को गुमराह कर रही सरकार
कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने बजट पर सदन में कहा कि 22 लाख 35 हजार प्रतिव्यक्ति आय 2047 का दावा किया जा रहा है। लोगों को गुमराह करने का काम सरकार कर रही है। वित्तीय प्रबंधन में 33 हजार करोड़ का ब्याज दे रहे हैं। आउट सोर्स कर्मचारियों को चार से पांच हजार रुपये सैलरी दी जा रही है। डिंडोरी में लगे पेड़ो को देखो, क्या हाल है, छह साल हो गए हैं लगे हुए। उत्कृष्ट विद्यालयों में संसाधनों की कमी है। सीएम राइस स्कूल बदनाम हुए तो संदीपिनी विद्यालय पर आ गए, अब कुछ और नाम रखेंगे। आज स्कूलों की हालत देखें पीने का पानी नहीं है, खेल मैदान नहीं है। किसान के साथ इंसाफ नहीं कर पा रहे हैंं।
MP: बजट पर कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने वित्तीय प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल
अमरपाटन से कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने राज्य के हालिया बजट पर चर्चा करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों और वित्तीय प्रबंधन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बजट का आकार भले ही 9 प्रतिशत बढ़ाया गया हो, लेकिन यही वास्तविक विकास दर नहीं कहलाती।
सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में राजस्व व्यय का अनुपात अत्यधिक है। उनके अनुसार कुल बजट का लगभग 78 प्रतिशत हिस्सा राजस्व व्यय में जा रहा है, जबकि पूंजीगत व्यय केवल 22 प्रतिशत है। उन्होंने इसे चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यह संतुलित और दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन का संकेत नहीं है।
उन्होंने वित्तीय जिम्मेदारी एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM) का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार 3 प्रतिशत की सीमा के आधार पर कर्ज ले रही है, जबकि केंद्र की अनुमति से इसे 3.5 से 4 प्रतिशत तक बढ़ाया जा रहा है। सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कर्ज लेने की होड़ मची है और इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल की तुलना भी की।
राष्ट्रीय राजनीति का संदर्भ देते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा कि वर्ष 2014 में “हर-हर मोदी, घर-घर मोदी” का नारा था, लेकिन 2025 के बाद परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा शुरू किए गए गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में भारत की वैश्विक साख अलग थी।
उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी का उदाहरण देते हुए कहा कि संवाद और समन्वय की राजनीति ही वैश्विक नेतृत्व की पहचान होती है। वर्तमान परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश की विरासत को मिटाने का प्रयास हो रहा है। सिंह ने महात्मा गांधी के विचारों पर कथित हमलों और मनरेगा जैसी योजनाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई।
श्रीराम को लेकर भाजपा विधायक सीताशरण शर्मा ने आपत्ति ली। कहा तमीज से बात करें। आपत्तिजनक शब्द न बोले। मामले को लेकर हंगामा विलोपित करने की मांग। मनरेगा का नाम जीरामजी को लेकर कांग्रेस विधायक ने कहा था। वहीं, सत्ता पक्ष के विधायकों ने कहा कि राम का अपमान हमेशा कांग्रेस ने किया। हंगामा जारी है।
भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपनी सरकार पर उठाए सवाल..
ग्वालियर जिले के राजमाता विजय राधे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का ध्यानाकर्षण लगाया गया। तत्काल जांच कर भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की गई। कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कहा कि किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है। विज्ञापन जारी कर साक्षात्कार किए गए हैं। बैठकों में भी किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं ली गई। अब मामले के सभी कागजात हाई कोर्ट में पेश किए गए हैं। मामला विचाराधीन है। कई नियमों में हमने संशोधन किए हैं। वहीं नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि चार साल बाद भर्ती क्यों की। शासन से क्यों अनुमति नहीं ली गई। मैं भी college की समिति का सदस्य हूं। इस कांड में हम क्यों फंसे। यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है? हम तीन-तीन विधानसभा के सदस्यों ने आपत्ति की थी। 26 पद कैसे भर लिए गए ? यह पूरी भर्ती निरस्त होनी चाहिए। कृषि मंत्री कंसाना ने कहा कि भर्ती नियम से हुई है। कोई अनियमितता नहीं हुई। कुशवाहा ने कहा कि2022 में भर्ती करनी थी। 2026 में कैसे की गई भर्ती। कोई अनुमति नहीं ली गई है।
भागीरथपुरा पर चर्चा नहीं होने के कारण कांग्रेस का सदन से वॉकआउट
भागीरथपुरा मुद्दे पर कांग्रेस चर्चा की मांग कर रही है। इस पर सदन में हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित होने के बाद फिर शुरु हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा नहीं करना चाहती है। सदन की कार्यवाही शुरु होने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भागीरथपुरा पर चर्चा होनी चाहिए। क्या सरकार पूरे मध्य प्रदेश को भागीरथपुरा बनाना चाहती है। भागीरथपुरा के मुद्दे पर चर्चा न होने के कारण कांग्रेस ने सदन से वॉकआफट किया।नेता प्रतिपक्ष ने उठाए स्वच्छ पानी और मुआवजे पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि क्या मध्य प्रदेश में स्वच्छ पानी देने, मृत्यु पर मुआवजा बढ़ाने और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट पर चर्चा नहीं की जा सकती। अध्यक्ष ने जवाब दिया कि इन मामलों में कार्यवाही पहले ही शुरू हो चुकी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नगरी प्रशासन और संबंधित मंत्री की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मध्य प्रदेश की जनता को शुद्ध पानी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंदौर में भ्रष्टाचार हो रहा है। सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है, यह समझ से परे है। इस मुद्दे पर सदन में हंगामा हुआ, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा कि पूर्व घटनाओं में छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े अधिकारियों को बचा लिया जाता है। उन्होंने पूछा कि जब महापौर कहते हैं कि अधिकारी उनके फोन नहीं उठाते, तो ऐसे में उनका पद पर बने रहने का अधिकार ही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सात बड़े टेंडर पूरे नहीं हुए और इस पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, यह स्पष्ट नहीं है। अगर कार्रवाई नहीं हुई है, तो आज इस व्यवस्था को सुधारना जरूरी है। इसलिए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा होना चाहिए। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि भागीरथपुरा मामले में न्यायालय में आयोग बनाया गया है और आयोग को अपना काम शुरू करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा करने से इनकार कर दिया।
लखन गंगोरिया ने कहा- भागीरथपुरा सिर्फ इंदौर का नहीं, पूरे प्रदेश का मामला
कांग्रेस विधायक लखन गंगोरिया ने कहा कि यह सिर्फ इंदौर का भागीरथपुरा मामला नहीं है, यह पूरे प्रदेश का गंभीर मुद्दा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस पर चर्चा क्यों नहीं हो रही और सरकार गोल-गोल जवाब देकर चर्चा से क्यों बच रही है। उन्होंने बताया कि जबलपुर में भी दूषित पानी सप्लाई की शिकायतें आई हैं। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह व्यवस्था का मामला है और चर्चा सिर्फ भागीरथपुरा के कांड पर हो रही है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कैलाश जी, आप पूरे प्रदेश के मंत्री हैं, केवल भागीरथपुरा के नहीं। उन्होंने कहा कि हमने कई जगहों पर लोगों को दूषित पानी पीते देखा है, यह सिर्फ इंदौर का मुद्दा नहीं है।
कांग्रेस विधायक ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की जरूरत जताई
कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि इंदौर को अब तक आठ बार स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है, जो सभी के लिए गर्व की बात है। लेकिन भागीरथपुरा की घटना ने शहर के नाम पर कलंक लगा दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिकारी, महापौर और मंत्री दिल्ली जाकर पुरस्कार लेते हैं, तो भागीरथपुरा कांड के बाद महापौर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मंत्री ने जिम्मेदारी क्यों नहीं ली?
विधायक ने आगे कहा कि कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पुरस्कार लेने के लिए वे भी गए थे। गोवर्धन सिंह ने कहा कि जब पुरस्कार लेने की बारी आती है, तो मंत्री और महापौर आगे आते हैं, जबकि कार्रवाई सिर्फ अधिकारियों पर होती है।
जयवर्धन सिंह ने बताया कि उनके सवाल में 20 मौतों की जानकारी दी गई, जबकि परिषद में 32 मौतों की जानकारी मिली। उन्होंने पूछा कि बाकी मृतकों के परिवारों को मुआवजा कब मिलेगा। इसके लिए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री ने अमृत योजना के लिए बड़ी राशि खर्च करने की बात कही है, लेकिन हादसे के बाद क्या किया जाएगा, इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
