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विश्व पर्यावरण दिवस 2019: इन सामानों को रोजाना इस्तेमाल करके आप बिगाड़ रहे हैं पर्यावरण की स्थिति
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Wed, 05 Jun 2019 10:22 AM IST
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5 जून को हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे प्रकृति और पर्यावरण के बीच वृहद मनुष्य समाज के संबंध रहे हैं। इनमें प्रकृति के प्रति चिंता और उसके सरंक्षण की भावना निहित है। विश्व में लगातार बढ़ते प्रदूषण और बढ़ती ग्लोबलवार्मिंग की चिंताओं के चलते विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत की गई। हालांकि ये चिंता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और आपको बता दें कि इस चिंता को बढ़ाने के पीछे कुछ चीजें ऐसी भी हैं जिनका हम रोजाना इस्तेमाल करते हैं।
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प्रकृति को रोजाना नुकसान पहुंचा रहे सामानों में से एक ऐसी चीज है जिसे लोग रोजाना इस्तेमाल करते हैं। जी हां, कई टूथपेस्ट ब्रांड में प्लास्टिक माइक्रोबीड्स पाए गए हैं। ये रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली उन चीजों में से एक है जिसका 80 लाख टन प्लास्टिक हर साल समुद्र में जाता है, जो समुद्र के वातावरण और समुद्री जीवों को बेहद नुकसान पहुंचाता है।
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सुशी हो या चीन का कोई भी पारंपरिक पकवान उसके साथ अनिवार्य रूप से इस्तेमाल होने वाली चॉपस्टिक भी प्रकृति की बहुत बड़ी दुश्मन है। जिसके कारण एशिया के कई जंगल साफ होते जा रहे हैं। आपको जानकार हैरानी होगी लेकिन हर साल 5 हजार 7 सौ करोड़ डिस्पोजेबल चॉपस्टिक के जोड़े बनाने के लिए 40 लाख पेड़ों की बली दी जाती है। ग्रीनपीस के अनुसार, उन चॉपस्टिक में ऐसे केमिकल मिलाए जाते हैं जिससे श्वसन संबंधी विकार हो सकते हैं।
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मनुष्यों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कंपनियां आए दिन नए उत्पाद बाजार में उतारती हैं। जिनमें से एक 'वेट वाइप्स' है। ऐसा कहा जाता है कि वाइप्स को टिशू की तरह फ्लश किया जा सकता है लेकिन उनमें भी प्लास्टिक होता है जो आसानी से नहीं गलता। इसकी वजह से ब्लॉकेज जैसी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है और फ्लश किये हुए वाइप्स सीवर से होते हुए समुद्री बीच तक पहुंचकर गंदगी फैलाते हैं।
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- फोटो : social media
प्लास्टिक बैग के विषय में सभी जानते हैं कि उनका वातावरण को प्रदूषित करने में कितना बड़ा हाथ है। रिपोर्ट के अनुसार 1 लाख करोड़ गैर बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बैग हर साल फेंके जाते हैं, जो कई हजार साल के बाद भी मिट्टी में नहीं मिलते।
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