नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो गई है। देशभर में शारदीय नवरात्रि की धूम मची हुई है। इस साल 17 अक्तूबर से 24 अक्तूबर तक शारदीय नवरात्रि हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में मां के 9 रूपों की पूजा की जाती है। इन दिनों मां को तरह- तरह की चीजों का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों मां धरती में रहती हैं। आज हम आपको मां के एक ऐसी मंदिर के बारे में बताएंगे जहां पर मां को शराब का भोग लगाया जाता है। इस पावन मंदिर में काली मां शराब का प्रसाद ग्रहण करती हैं। अगली स्लाइड्स में जानिए इस मंदिर के बारे में सबकुछ...
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Navratri 2020: मां के इस पावन मंदिर में लगता है शराब का भोग, डाकूओं द्वारा बनाया गया माता का ये धाम
Sat, 24 Oct 2020 06:02 AM IST
योगेश जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश जोशी
Updated Sat, 24 Oct 2020 06:02 AM IST
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नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो गई है
- फोटो : social media
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राजस्थान के नागौर जिले में मां भुवाल काली माता का मंदिर है
- फोटो : social media
मां भुवाल काली माता का मंदिर
- राजस्थान के नागौर जिले में मां भुवाल काली माता का मंदिर है। मां के इस पावन मंदिर में मां को शराब का भोग लगाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस पावन मंदिर में मां ढाई प्याला शराब ग्रहण करती हैं।
शराब का भोग भैरव बाबा को लगाया जाता है
- फोटो : अमर उजाला
भैरव बाबा को भी लगता है शराब का भोग
- मान्यताओं के अनुसार मां के इस पावन धाम में मां को सिर्फ ढाई प्याला शराब का भोग लगाया जाता है। बाकी बची शराब का भोग भैरव बाबा को लगाया जाता है। मां के इस पावन मंदिर का निर्माम डाकूओं ने करवाया था।
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मां काली को शराब को भोग लगता है और मां ब्राह्मणी को मिठाई का भोग लगाया जाता है
- फोटो : social media
मां काली और ब्राह्मणी स्वरूप में होती है मां की पूजा
- इस पावन मंदिर में मां की पूजा काली और ब्राह्मणी स्वरूप में होती है। मां काली को शराब को भोग लगता है और मां ब्राह्मणी को मिठाई का भोग लगाया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार माता का ये मंदिर बेहद चमत्कारिक है।
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इस मंदिर में काली मां को शराब का भोग चांदी के प्याले में लगाया जाता है
- फोटो : social media
मां करती हैं शराब ग्रहण
- इस मंदिर में काली मां को शराब का भोग चांदी के प्याले में लगाया जाता है। मंदिर के पुजारी शराब से ढाई प्याला भरते हैं और प्याले को मां के होठों तक ले जाते हैं। मां को शराब का भोग लगाते समय मां को देखना मना होता है। पुजारी जी भी इस समय मां को नहीं देखते हैं। मां शराब के भोग को ग्रहण करती हैं। प्याले में एक बूंद भी शराब शेष नहीं रहती है।