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भारत के शानदार मठों में से एक है ये मठ, आध्यात्मिक शांति का होता है अनुभव
Wed, 29 Apr 2020 08:55 AM IST
योगेश जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Wed, 29 Apr 2020 08:55 AM IST
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सिक्किम और लेह-लद्दाख की पहाड़ियों में कई ऐसे मठ हैं, जहां पर्यटन के साथ स्प्रिचुअल टूरिज्म देखने को मिलता है। शुद्ध हवा के बीच यहां आनंद का एहसास होता है। सिक्किम की राजधानी गंगटाेक के समीप स्थित यह मठ प्राकृतिक खूबसूरती के साथ स्प्रिचुअल टूरिज्म के लिए बेहद ही खास जगह है।
thicksey monastry
थिकसे मोनेस्ट्री
- थिकसे मठ में कई इमारतों को उनके महत्व और आकार के आरोही क्रम में पहाड़ी-ढलान के ऊपर से व्यवस्थित किया गया है। पूरी व्यवस्था ग्रीस के एक टुकड़े की याद दिलाती है, जिसमें सफेद रंग की इमारतों का समूह है। 49 फीट ऊंची मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा यहां के आकर्षण का केंद्र है। थिकसे पूरी शिद्दत के साथ लेह और आसपास के शानदार इलाकों पर अपनी नजर रखता है। जब मौसम बादलों से भरा होता है, तो इस मठ से लेह बादलों से पूरी तरह घिरा हुआ दिखता है। यहां कि हवा बिलकुल साफ और जादुई है और भिक्षुओं के साथ यहां रुकना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।
रुमटेक मठ
- इस मठ में सुबह के वक्त में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा की जाने वाली प्रार्थना बहुत मनमोहक होती है। सिक्किम में सबसे सुंदर और सबसे बड़े मठों में से एक है रुमटेक मठ। इसका मुख्य आकर्षण गंगटोक के पूरे शहर का दृश्य है, जो यहां से खूबसूरत दिखाई देता है। इस मठ में विभिन्न थांगका पेंटिंग, दुर्लभ बौद्ध कलाकृतियां, भगवान बुद्ध के 1001 लघु सोने के मॉडल और ऐसी कई आकर्षक चीजें हैं। मठ में बहुत सारी गतिविधियां, अनुष्ठान सेवाएं हैं, जिनमें सुबह और शाम का जप शामिल है। यह मठ धर्म चक्र के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। तिब्बत के बाहर काग्यू वंश के महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक रुमटेक मठ तिब्बत के सुरफू मठ के जैसा ही बनावाया गया है।
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चार मंजिला है यह मठ
- यह चार-मंजिला मठ पूरे सिक्किम में सबसे बड़ा मठ है। तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद, तिब्बत के 16वें ग्यालवा करमापा के अवतार कुछ भिक्षुओं के साथ रुमटेक आए थे। तब के चोग्याल ने मठ का निर्माण करने, धार्मिक अध्ययन के लिए एक केंद्र खोलने के उद्देश्य से उनको रुमटेक का एक क्षेत्र तोहफे में दिया था।
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अक्टूबर माह में होता है फेस्टिवल
- मठ के मुख्य ढांचे के पीछे, बहुत अधिक सजा हुआ और सुंदर कर्मा नालंदा इंस्टिट्यूट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज है, जहां दुनियाभर के छात्र हैं। वहां एक छोटा सा हॉल भी है, जहां सोने का स्तूप है। रुमटक धर्म चक्र केंद्र मठ से करीब 2 किमी दूर है। यहां अक्टूबर में वार्षिक नृत्य के रंगारंग कार्यक्रम होते हैं। 300 वर्ष पुराना माना जाता है सिक्किम का रुमटेक मठ। 1960 के दशक में करवाया गया था इस मठ का पुनर्निर्माण।