कलाई में अक्सर रहता है दर्द तो हो सकती है यह दिक्कत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अक्सर कुछ लोगों को कलाई में दर्द या सूजन की शिकायत रहती है। यह समस्या खासकर उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है, जिनके पेशे में कलाई को मोड़ने के साथ पिंचिंग या ग्रिपिंग करने की जरूरत होती है।
जैसे कि लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने वाले, घंटों सिलाई करने, गोल्फ खेलने, कारपेंटर, मजदूर, संगीतकार, मैकेनिक आदि।
कलाई में दर्द की वजह न केवल गलत मुद्रा है बल्कि और भी समस्याएं हैं।
चोट भी दे सकती है यह दिक्कत
यह समस्या कलाई पर चोट लगने के कारण भी हो सकती है। इसके लक्षणों की बात करें, तो इसमें मुख्य है- हाथों और अंगुलियों में झुनझुनाहट या सुन्न पड़ना, विशेषकर अंगूठे व मध्य अंगुलियों में, कलाई, हथेली और बाजुओं में दर्द, दिन की तुलना में रात के दौरान दर्द अधिक होना,कोई भी सामान उठाते समय परेशानी होना, अंगूठे में कमजोरी महसूस होना।
सर गंगाराम हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरो ऐंड स्पाइन सर्जन डॉ. सतनाम सिंह छाबड़ा कहते हैं कि हाथ और कलाई में होने वाला यह सामान्य दर्द और सूजन कार्पल टन्नल सिंड्रोम का लक्ष्ाण है। दरअसल, कार्पल टन्नल हड्डियों और कलाई की अन्य कोशिकाओं द्वारा बनाई गई एक संकरी नली होती है, जो हमारी मध्य नाड़ी की सुरक्षा करती है।
यह नाड़ी हमारे अंगूठे, मध्य और रिंग अंगुलियों से जुड़ी होती है। लेकिन कार्पल टन्नल में जब अन्य कोशिकाएं जैसे लिगामेंट्स और टेंडन फूल जाते हैं, तो इसका प्रभाव मध्य कोशिकाओं पर पड़ता है। इस दबाव के कारण आपका हाथ घायल या सुन्न हो जाता है।
ऐसे करें बचाव
इस समस्या से बचने के लिए आपको अपने हाथों का कैसे इस्तेमाल करना चाहिए, यह जानना जरूरी है।
यदि कार्पल टन्नल सिंड्रोम किसी प्रकार की चिकित्सकीय समस्या द्वारा उत्पन्न हुआ है, तो इस स्थिति में डॉक्टर आपको कलाई को आराम देने को कहेगा या कैसे अपने हाथ का इस्तेमाल करें, उसे बदलने के लिए कहेगा।
कलाई में स्पलिंट बांधने को भी कहा जा सकता है। साथ ही कुछ खिंचाव वाले व्यायाम की भी सलाह दी जा सकती है, क्योंकि बिना व्यायाम के आपकी कलाई कठोर हो सकती है।
जब आप लेटे हुए हों, तो अपनी बाजुओं को तकिए पर रखकर खींचें। दर्द की स्थिति में हाथों को अधिक इस्तेमाल करने से बचें। विभिन्न यंत्रों के इस्तेमाल द्वारा अपने हाथों का नए ढंग से इस्तेमाल करना सीखें। लंबे समय तक अपनी कलाई को नीचे झुका कर न रखें।