{"_id":"6ee2b4cde61067955964b1fffbd6f6cf","slug":"world-stroke-day-stroke-related-facts","type":"story","status":"publish","title_hn":"वर्ल्ड स्ट्रोक डे : स्ट्रोक के निशाने पर हैं युवा","category":{"title":"Healthy Food ","title_hn":"हेल्दी फूड","slug":"healthy-food"}}
वर्ल्ड स्ट्रोक डे : स्ट्रोक के निशाने पर हैं युवा
पवन कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 29 Oct 2013 11:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदलती जीवनशैली के साथ अब युवाओं में स्ट्रोक यानी लकवा का रिस्क तेजी से बढ़ रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से किए गए सर्वे में ये तथ्य सामने आए हैं। स्ट्रोक के 20 फीसदी ऐसे मरीजों की मौत हुई है जिनकी उम्र 40 वर्ष से भी कम है।
विज्ञापन
ऐसे 5 सवाल जिन्हें आप डॉक्टर से नहीं पूछते, गूगल पर खोजते हैं
विज्ञापन
मानसिक तनाव, अल्कोहल, धूम्रपान और गुस्सा स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। सबसे ज्यादा स्ट्रोक मानसिक तनाव और अल्कोहल की वजह से होता है।
मेट्रो शहरों में स्ट्रोक के मामले ज्यादा होते हैं। प्रति वर्ष भारत में स्ट्रोक के करीब 16 लाख मामले आते हैं, जिसमें एक तिहाई की मौत हो जाती है।
जानिए सेक्स की इच्छा और दिल के रोगों का क्या है कनेक्शन
विज्ञापन
एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों की ओर से एम्स में इलाज के लिए मार्च-2012 से जून-2013 के बीच आए मरीजों पर यह सर्वे किया गया है। सर्वे के मुताबिक सबसे अधिक 17.6 प्रतिशत स्ट्रोक के मामले मानसिक तनाव की वजह से हुए। इसके बाद स्ट्रोक के लिए अल्कोहल और धूम्रपान जिम्मेवार माना गया है। 4.1 फीसदी मरीजों में स्ट्रोक का कारण गुस्सा बना है। अहम है कि गुस्से की वजह से महिलाओं में स्ट्रोक के मामले ज्यादा सामने आए हैं।
एम्स न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने बताया कि ज्यादा अल्कोहल और धूम्रपान की वजह से कम उम्र में भी लोग स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं। वहीं न्यूरोलॉजी विभाग के एडिश्नल प्रोफेसर डॉ. रोहित भाटिया ने बताया कि देश में प्रति वर्ष करीब 16 लाख लोगों को स्ट्रोक होता है। इसमें एक तिहाई मरीज की मौत हो जाती है। एक तिहाई मरीज इलाज के बाद पूरी तरह से ठीक हो पाते हैं जबकि एक तिहाई मरीज किसी न किसी प्रकार के शारीरिक अक्षमता के शिकार हो जाते हैं।
इस बारे में डॉ. दिप्ती ने बताया कि 15 फीसदी लोगों में स्ट्रोक के पहले वार्निंग अटैक आता है। अगर उस अटैक को पहचान लिया जाये तो भविष्य में स्ट्रोक से बचा जा सकता है।
इनको आ सकता है स्ट्रोक
- उच्च रक्तचाप
- मधुमेह
- खून में चर्बी बढ़ना
- तनाव
-जीवनशैली में आया बदलाव
-धूम्रपान
- मोटापा
स्ट्रोक के लिए खतरे की घंटी
शरीर के किसी भाग का अचानक काम करना बंद कर दे और कुछ मिनटों के बाद या घंटे भर में अपने आप ठीक हो जाये। अचानक से बहुत तेज दर्द होना। आंख के आगे कुछ पल के अंधेरा छा जाना, बोलने में कभी अचानक से लड़खड़ा जाना, सुबह जागने के बाद अचानक ऐसा लगे की हाथ काम नहीं कर रहा।
स्ट्रोक (लकवा) क्या है?
लकवा मस्तिष्क की बीमारी है। ऐसी बीमारी जो ब्रेन में खून की नलियों में खराबी आने से होती है। मस्तिष्क में शरीर के अन्य भागों की तरह दो नलियां होती है।
एक जो हृदय से मस्तिष्क की ओर जाती है और खून लाती है, जबकि दूसरी मस्तिष्क से खून को हृदय की ओर लाती है। जो नलियां खून लाती है, उसे धमनी कहते हैं और जो लौटा कर ले जाती है उसे शिरा कहते हैं।
खून लाने और ले जाने वाली नलियों में रक्त का थक्का जमने अथवा नस के फटने से रक्तस्राव होने की स्थिति में शरीर में लकवा मार जाता है।
बचाव के उपाय
- अल्कोहल का सेवन न करें।
- धूम्रपान से बचाव।
- संतुलित आहार।
- शारीरिक क्रियाशीलता बढ़ाना।
- रक्तचाप को नियंत्रित रखना।
- एक सीमा से ज्यादा वजन न बढ़ने देना।