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दिल के मरीज हैं तो जरूर पढ़ें यह खबर

Thu, 22 May 2014 08:24 AM IST
Updated Thu, 22 May 2014 08:24 AM IST
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wireless pace maker for heart patient

अमरीकी शोध वैज्ञानिकों ने एक आधुनिकतम वायरलेस पेसमेकर विकसित किया है।

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इसका आकार महज़ एक चावल के दाने जितना यानी करीब तीन मिलीमीटर है। इसे एक खरगोश के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया है।

शोध वैज्ञानिकों ने खरगोश की छाती से कुछ सेंटीमीटर उपर एक मेटल प्लेट लगया है जिसके सहारे खरगोश की हृदय गति को नियंत्रित रखना संभव होगा।

अगर यह प्रत्यारोपण मानव शरीर में कामयाब होता है तो आकार में छोटा होने के चलते इसे प्रत्यारोपित करना आसान होगा।

यह शोध अमरीकी जर्नल 'प्रॉसिडिंग ऑफ़ द नेशनल अकादमी ऑफ़ साइंस' में प्रकाशित हुआ है।

स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि नए उपकरण से अभीक्लिक करें इस्तेमाल हो रहे पेसमेकर के अंदर मौजूद भारी भरकम बैटरी और उसे रिचार्ज करने की व्यवस्था से छुटकारा मिलेगा।

माना जा रहा है कि नया पेस मेकर उतने ही ऊर्जा में संचालित होगा, जितनी ऊर्जा में एक सेलफोन काम करता है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और शोध के सह लेखक डॉ एडा पून ने कहा, "हमें इस तरह के उपकरण को सूक्ष्म से सूक्ष्म बनाए जाने की जरूरत है ताकि उसे शरीर के अंदर आसानी से प्रत्यारोपित किया जा सके।"
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डॉ. एडा पून, शोध अध्ययन के सह लेखक, स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार, "हमें इस तरह के उपकरण को सूक्ष्म से सूक्ष्म बनाए जाने की जरूरत है ताकि उसे शरीर के अंदर आसानी से प्रत्यारोपित किया जा सके।"
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अभी तक मौटे तौर पर दो तरह की विद्युतचुंबकीय तरंगों का इस्तेमाल होता है- एक तो वैसी तरंगे जो लंबी दूरी तय कर सकें और दूसरी जो कम दूरी तय कर सकें।

लंबी दूरी तय करने वाली तरंगों को रेडिया टॉवर से प्रसारित किया जाता है, जो काफी दूर तक पहुंचता है। इससे मानव शरीर का या तो कोई नुकसान नहीं होता या फिर शरीर इसे उष्मा के तौर पर अवशोषित करता है।

नज़दीकी दूरी तय करने वाली तरंगें सुरक्षित ढंग से इस्तेमाल होती हैं लेकिन इससे उर्जा कम ही दूरी तक पहुंच पाती है।

शोधवैज्ञानिक अब ऐसे उपकरण को विकसित करने में जुटे हैं जिसमें सुरक्षा तो नज़दीकी दूरी वाले तरंगों जैसी हो लेकिन वह लंबी दूरी भी तय कर सके।

डॉ. पून की प्रयोगशाला के शोध छात्र जॉन हो बताते हैं, "इस तरीके से हम हृदय या मस्तिष्क में प्रत्यारोपित उपकरण को सुरक्षित ढंग से चार्ज़ कर सकेंगे।"

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