महिलाओं में सबसे अधिक होता है यह संक्रमण
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यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) मूत्र मार्ग में होने वाले संक्रमण की बीमारी है। यूटीआई के लिए बड़ी आंत का बैक्टीरिया ईकोलाई जिम्मेदार होता है। यह मूत्रमार्ग के हिस्से को प्रभावित करता है। हालांकि ईकोलाई के अलावा कई अन्य बैक्टीरिया, फंगस के कारण भी यूटीआई की समस्या होती है।
यूरिनरी सिस्टम के अंग जैसे किडनी, यूरिनरी ब्लैडर और यूरेथ्रा में से कोई भी अंग जब संक्रमित हो जाए तो उसे यूटीआई संक्रमण कहते हैं। हालांकि इसमें यूरिनरी ट्रैक्ट का निचला हिस्सा प्रभावित होता है और यह संक्रमण यूरेथ्रा तक फैल जाता है। लेकिन समय रहते इलाज न करवाने से यह ब्लैडर और किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
आमतौर पर बच्चों से लेकर बुजुर्ग किसी को भी यूटीआई हो सकता है, लेकिन सबसे ज्यादा यूटीआई से प्रभावित महिलाएं ही होती हैं। बच्चों में यूटीआई की समस्या कन्जेनाइटल प्रॉब्लम यानी पेशाब की थैली या गुर्दे में किसी भी तरह की समस्या होने से ही होता है।
20 से 45 वर्ष की उम्र की महिलाओं में इसकी समस्या ज्यादा होती है। मेनोपॉज के बाद भी बुजुर्ग महिलाएं यूटीआई से प्रभावित होती हैं, क्योंकि इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हॉरमोन का निर्माण कम होता है। मूत्र-मार्ग (यूरेथ्रा) के कमजोर होने या सिकुड़ने से भी यूटीआई संक्रमण होता है।
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यूरेथ्रा छोटा होता है। इससे बैक्टीरिया ब्लैडर को जल्दी प्रभावित करते हैं। 50 साल से कम आयु के पुरुषों में यह बीमारी बहुत कम होती है। ज्यादा उम्र के पुरुषों को यह बीमारी प्रोस्टेट ग्रंथि के बड़ा होने, डायबिटीज, एचआईवी या फिर यूरिनरी ट्रैक्ट में स्टोन होने के कारण होती है।
यूटीआई महिलाओं में इतनी आम बीमारी है कि लगभग 40-50 प्रतिशत महिलाओं को जीवन में कभी न कभी इसका इलाज करवाना पड़ता है।
वजह ऐर लक्षण
यूटीआई होने का मुख्य कारण है पेशाब लगने पर भी देर तक शौचालय नहीं जाना। शौच के बाद सही तरीके से सफाई न करना। निजी अंगों की साफ-सफाई पर ध्यान न देने से भी कई बार यह संक्रमण होता है। किडनी स्टोन और डायबिटीज के मरीजों को भी यूटीआई होने की आशंका रहती है।
लक्षण
पेशाब करते समय जलन महसूस होना
पेट के निचले हिस्से में दबाव
बार-बार पेशाब लगना
पेशाब का रंग गाढ़ा होना
पेट और कमर में दर्द, भारीपन सा महसूस करना
पेशाब से दुर्गंध और खून आना
बुखार और कंपकंपी होना
उल्टी होना
थकान महसूस करना।
जांच और बचाव
आप यूटीआई संक्रमण से प्रभावित हैं या नहीं इसकी पुष्टि करने के लिए डॉक्टर यूरीन कल्चर और अल्ट्रासाउंड के जरिए इस समस्या का पता लगाते हैं।
चांज में यूटीआई होने की पुष्टि होती है, तो एंटी-बायोटिक दवाइयों से इसे दूर किया जाता है। आपको अधिक से अधिक पानी पीने की सलाह भी दी जाती है।
ऐसे बचें
नित्य कि्रया के बाद शारीरिक साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। दिन भर में 10 गिलास पानी अवश्य पिएं। अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें और पेशाब देर तक रोक कर ना रखें। यूटीआई होने पर सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल के वक्त सावधानी बरतें।
शौच करने से पहले व बाद में फ्लश का इस्तेमाल करें। घर पर भी टॉयलेट की साफ-सफाई का ध्यान रखें। यूटीआई होने पर पर्याप्त चिकित्सकीय देखभाल और दवाइयों को सेवन समय पर करें। कोर्स पूरा किए बिना दवाइयों का सेवन बंद न करें। दोबारा होेने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
20 से 45 वर्ष की महिलाएं यूटीआई से ज्यादा प्रभावित होती हैं। इसके लिए ‘ईकोलाई’ नामक बैक्टीरिया जिम्मेदार होता है। इसे नजरअंदाज करना किडनी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।