किशोरावस्था में लड़कों को अधिक है यह खतरा
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हाल में हुए शोध में किशोरावस्था के दौरान दक्षिण एशियाई देशों के लड़कों के लिए सेहत से जुड़े गंभीर खतरे का रिस्क पता चला है।
कनाडा के टोरंटो शहर के वुमेन्स कॉलेज अस्पताल के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में माना है कि दक्षिण एशियाई देशों के किशोरों को मोटापे और इससे जुड़े खतरों का रिस्क सामान्य किशोरों की अपेक्षा तीन गुना अधिक हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने माना है कि इस कारण नि देशों के किशोरों को आगे चलकर डायबिटीज व दिल की बीमारी का खतरा भी अधिक होता है।
शारीरिक श्रम के आधार पर दावा
शोधकर्ताओं ने 10 से 12 साल की उम्र के 734 छात्रों पर अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है। इस दौरान उन्होंने करीब सात दिनों तक प्रतिभागियों की शारीरिक गतिविधियों का भी निरीक्षण किया है।
शोधकर्ताओं का दावा है कि दक्षिण एशियाई देशों में मोटापे के शिकार किशोरों की संख्या 36.9 प्रतिशत है जबकि अन्य देशों में यह रेशियो 23 प्रतिशत तक है।
यह शोध जर्नल ऑफ रेशियल एंड एथिनिक हेल्थ डिस्पेरिटीज में प्रकाशित हुआ है।