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घर बैठे लीजिए कश्मीरी खानपान की खुशबू, ऐसे-ऐसे पकवान दिल रोमांचित हो जाएगा

Tue, 05 Dec 2017 09:20 AM IST
पुष्पेश पंत
पुष्पेश पंत Updated Tue, 05 Dec 2017 09:20 AM IST
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Recipe of aromatic Kashmiri cuisine Rogan josh
कश्मीरी खानपान का एक दिलचस्प पहलू यह है कि उसकी दो मुख्य धाराएं हैं। पेशेवर बावर्ची 'वाजा' कहलाते हैं और जो कुछ वह पकाते या परोसते हैं, उसे 'वाजवान' का नाम दिया जाता है। हिंदू ब्राह्मण और मुसलमान आबादी के व्यंजनों में कुछ समानता भी दिखाई देती है और फर्क भी साफ नजर आता है। 'दुंबा' यानी भेड़ का चरबीदार गोश्त दोनों समुदायों को समान रूप से प्रिय है और सौंफ, सौंठ जैसे मसाले भी। वहीं, शोरबेदार मांस में दही का प्रयोग आम है और जो बड़ा अंतर है, वह प्याज को लेकर है।
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पंडित पाक विधि में लहसुन एवं प्याज वर्जित है। लहसुन की महक और स्वाद का पुट देने के लिए हींग का इस्तेमाल करते हैं। मांस को सरसों के तेल में पकाया जाता है। अनेक ऐसे व्यंजन हैं, जो देखने में एक जैसे लगते हैं, पर जिनके नाम ही नहीं स्वाद और रंगत भी अलग होती है- जैसे गुश्ताबा, रिस्ता, तबक माज, कबरगाह आदि। जो मांसाहारी व्यंजन सबसे मशहूर है, वह 'रोगन जोश' है। 
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Recipe of aromatic Kashmiri cuisine Rogan josh
विडंबना यह है कि इस नाम से जो कुछ अधिकांश दुकानों में बेचा जा रहा है, उसका दूर का भी रिश्ता कश्मीरी खानपान की परंपरा से नहीं है। ढाबों और रेस्तरां में जो रोगन जोश मिलता है, वह इसका पंजाबी संस्करण है- टमाटर तथा प्याज वाला। जैसा इसके नाम से संकेत मिलता है, इसका शोरबा सुर्ख होता है। रोगन यानी चिकनाई की लाली, जोश की कुदरती करामात समझी जाती रही है। वास्तव में, इस रंग के लिए रतनजोत या मौवाल के सूखे फूलों का इस्तेमाल पारंपरिक है। हां, कुछ योगदान कश्मीरी लाल मिर्च का भी रहता है। हल्की सी खटास दही से ही आ जाती है- टमाटर गैर जरूरी लगता है। कई आलसी खाना पकाने वालों को यह पाक विधि इसलिए अच्छी लगती है, क्योंकि इसमें प्याज छीलने-काटने के झंझट से छुटकारा मिल जाता है।

कश्मीरी गरम मसाले की टिकिया 'बड़ी' कहलाती है और उसका जरा-सा टुकड़ा सोने पर सुहागे का काम करता है। कश्मीरी वाजवान में अवधी, रामपुरी, हैदराबादी या दिल्ली के कोरमे जहांगीरी या शाहजहांनी नदारद हैं। इनकी जगह स्थानीय व्यंजनों की भरमार है। धानीवाल कोरमा धनिए और मिर्च का लालन है, तो कलिया पतली दूधिया तरी वाला गोश्त है। आब गोश्त और आलूबुखारा गोश्त भी कहीं और चखने को नहीं मिलते। शबदेग धीमी आंच पर रात भर पकाया जाता है और इसमें मांस के साथ-साथ शलगम और राजमा भी डलते हैं।

Recipe of aromatic Kashmiri cuisine Rogan josh
कीमे से कोफ्ते और गोलियां खट्टी और टमाटर वाली बनाई जाती हैं। सबसे ऊंची पायदान पर गुश्ताबा और रिस्ता रखे जाते हैं, जो दावत के अंत में परोसे जाते हैं। इन्हें बनाना कष्टसाध्य है। कीमे को कूट कर नहीं, बल्कि हड्डी रहित मांस की बोटियों को लकड़ी के हथौड़े से घंटों चरबी के साथ कूट कर इन कोफ्तों को रसगुल्ले सरीखा स्पंज वाला बनाया जाता है। गुश्ताबा सफेद होता है इलायची से सुवासित, तो रिस्ता लाल रंग का तीखे मिजाज का होता है।

तबक माज और कबरगाह पसली के चरबीदार हिस्से को देर तक दूध में उबालने के बाद तल कर पेश किए जाते हैं। कश्मीरी मांसाहार में मुर्गी का खास स्थान नहीं होता। हां, मछली बहुत चाव से खाई जाती है। कुछ पाक विधियां बड़ी अनोखी हैं मसलन मूज-गाड (मछली-मूली)। चूंकि, कश्मीरियों का मूल भोजन चावल है, इसलिए उनके वाजवान में अधिकतर व्यंजन शोरबेदार रहते हैं। कबाब के नाम पर सीक ही प्रमुख है। 
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