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पुरुषों में बढ़ते प्रोस्टेट कैंसर को पहचानें
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 05 Mar 2013 10:17 AM IST
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उम्र बढ़ने के साथ-साथ पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के मामले दिनोंदिन बढ़ रहे हैं। अमेरिका व युरोपीय देशों के पुरुषों में बेहद तेजी से फैलने वाले प्रोस्टेट कैंसर के मामले अब हमारे देश में भी बढ़े हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में यह कैंसर भारत समेत एशियाई मूल के पुरुषों में तेजी से बढ़ा है।
ऐसे में इससे बचाव व जानकारी के महत्व को समझते हुए मार्च के महीने को 'प्रोस्टेट कैंसर जागरूकता माह' के रूप में मनाया जा रहा है। आइए जानें, इससे जुड़े कुछ अहम पहलू।
क्या है प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट कैंसर 60 से अधिक उम्र वाले पुरुषों के प्रोस्टेट ग्लैंड में होने वाला कैंसर है। इस कैंसर के लक्षणों का अगर शुरुआती दौर में ही पता चल जाए तो इसकी रोकथाम में आसानी होकी है। प्रोस्टेट ग्लैंड अखरोट के आकार की एक ऐसी ग्रंथि है जो युरेथरा (पेशाब की नली) के चारों ओर होती है। इसका काम काम वीर्य में मौजूद एक द्रव पदार्थ का निर्माण करना है। आमतौर बहुत कम उम्र के पुरुषों में इस कैंसर की आशंका कम रहती है।
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इनमें है अधिक आशंका
- 60 साल से अधिक उम्र के पुरुष।
- जिन पुरुषों के परिवार में भाई या पिता को भी यह कैंसर रहा हो।
- बहुत अधिक नशा करने वाले पुरुष।
- गलत जीवनशैली वाले पुरुष।
ये हो सकते हैं प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण
- युरीन न रोक पाना और दिक्कत के साथ या रुक-रुककर होना।
- तेज दर्द या जलन के साथ युरीन।
- युरीन में रक्त या सीमन आना।
- कमर के नीचे के हिस्से में बहुत दर्द होना।
परीक्षण की विधियां
प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी टेस्ट जरूरी है। बायोप्सी से यह पता लगाया जा सकता है कि प्रोस्टेट कैंसर कितनी तेजी से शरीर में फैल रहा है। पीएसए व रेक्टल परीक्षण के आधार पर डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं। यह शरीर के दूसरे हिस्सों को तो प्रभावित नहीं कर रहा, यह जानने के लिए सीटी स्कैन व बोन स्कैन करवाया जा सकता है।
ऐसे होता है इलाज
प्रोस्टैट कैंसर का शुरुआती दौर में पता चल जाए तो इसका उपचार संभव है। उपचार के दौरान शरीर से टेस्टोरोन का स्तल कम किया जाता है जिसके लिए सर्जरी, कीमोग्राफी या हार्मोनल थेरेपी का उपयोग करते हैं। कई बार सर्जरी के बाद भी रेडियेशन थेरेपी व दवाओं से इसकी रोकथाम करनी पड़ती है। इसके बाद साल भर हर तीन माह में पीएसए ब्लड टेस्ट व अन्य परीक्षणों से इसकी स्थिति की जांच की जाती है।
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ऐसे में इससे बचाव व जानकारी के महत्व को समझते हुए मार्च के महीने को 'प्रोस्टेट कैंसर जागरूकता माह' के रूप में मनाया जा रहा है। आइए जानें, इससे जुड़े कुछ अहम पहलू।
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क्या है प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट कैंसर 60 से अधिक उम्र वाले पुरुषों के प्रोस्टेट ग्लैंड में होने वाला कैंसर है। इस कैंसर के लक्षणों का अगर शुरुआती दौर में ही पता चल जाए तो इसकी रोकथाम में आसानी होकी है। प्रोस्टेट ग्लैंड अखरोट के आकार की एक ऐसी ग्रंथि है जो युरेथरा (पेशाब की नली) के चारों ओर होती है। इसका काम काम वीर्य में मौजूद एक द्रव पदार्थ का निर्माण करना है। आमतौर बहुत कम उम्र के पुरुषों में इस कैंसर की आशंका कम रहती है।
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इनमें है अधिक आशंका
- 60 साल से अधिक उम्र के पुरुष।
- जिन पुरुषों के परिवार में भाई या पिता को भी यह कैंसर रहा हो।
- बहुत अधिक नशा करने वाले पुरुष।
- गलत जीवनशैली वाले पुरुष।
ये हो सकते हैं प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण
- युरीन न रोक पाना और दिक्कत के साथ या रुक-रुककर होना।
- तेज दर्द या जलन के साथ युरीन।
- युरीन में रक्त या सीमन आना।
- कमर के नीचे के हिस्से में बहुत दर्द होना।
परीक्षण की विधियां
प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी टेस्ट जरूरी है। बायोप्सी से यह पता लगाया जा सकता है कि प्रोस्टेट कैंसर कितनी तेजी से शरीर में फैल रहा है। पीएसए व रेक्टल परीक्षण के आधार पर डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं। यह शरीर के दूसरे हिस्सों को तो प्रभावित नहीं कर रहा, यह जानने के लिए सीटी स्कैन व बोन स्कैन करवाया जा सकता है।
ऐसे होता है इलाज
प्रोस्टैट कैंसर का शुरुआती दौर में पता चल जाए तो इसका उपचार संभव है। उपचार के दौरान शरीर से टेस्टोरोन का स्तल कम किया जाता है जिसके लिए सर्जरी, कीमोग्राफी या हार्मोनल थेरेपी का उपयोग करते हैं। कई बार सर्जरी के बाद भी रेडियेशन थेरेपी व दवाओं से इसकी रोकथाम करनी पड़ती है। इसके बाद साल भर हर तीन माह में पीएसए ब्लड टेस्ट व अन्य परीक्षणों से इसकी स्थिति की जांच की जाती है।