फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Food ›   Khichadi which missed the national dish

खिचड़ी जो राष्ट्रीय व्यंजन बनने से चूक गई

Wed, 16 Jan 2019 03:35 PM IST
कशिश मिश्रा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: कशिश मिश्रा Updated Wed, 16 Jan 2019 03:35 PM IST
विज्ञापन
Khichadi which missed the national dish
चारी खिचड़ी भारत का राष्ट्रीय व्यंजन बनने से भले ही चूक गयी - फोटो : social media

बेचारी खिचड़ी भारत का राष्ट्रीय व्यंजन बनने से भले ही चूक गयी हो पर मकर संक्रांति के पर्व पर वह मूर्धन्य बनी रहती है।इस अवसर पर माश (उड़द की दाल) और चावल की खिचड़ी प्रसाद के समान मानी जाती है और कोई आस्थावान उसके चार यारों को साथ बिठाने का हठ पालने का दुस्साहस नहीं कर सकता घी में भुनी यह खिचड़ी खुद ही इतना स्वादिष्ट होती है कि 'दही, पापड़, मूली, अचार' आसानी से बिसराए जा सकते हैं। इसका मजा दुर्गा पूजा के पंडालों में बंटने वाली बंगाली खिचुड़ी से कम नहीं होता पर यह सब समझ हमें जरा देर से आई बचपन में मां यह कह कर डराती थीं कि अगर आज के दिन स्नान नहीं किया और माश की खिचड़ी नहीं खाई तो अगले जन्म में घोंघा बनोगे।

विज्ञापन

Khichadi which missed the national dish
बीरबल की खिचड़ी को कोई कैसे भूल सकता है - फोटो : social media

उस पहाड़ी कस्बे में जहां हम रहते थे, कड़ाके की ठंड पड़ती थी। पर्व वाले स्नान के दिन भी पांच प्रतीकात्मक छींटों से काम चल जाता था, खिचड़ी की चुनौती विकट थी। हमारे दिमाग में खिचड़ी एक ऐसा बेस्वाद पथ्य थी जो बीमार को या कमजोर हाजमे वाले बुजुर्ग की ही खुराक हो सकती थी। धुली मूंग की पतली खिचड़ी दिखते ही पेट की ख़राबी का लक्षण लगती थी,जब इतिहास पढ़ना शुरू किया तब पता चला कि आज से कोई हजार साल पहले जब अल बरूनी ने भारत की यात्रा की थी तब यह देखा था कि खिचड़ी ही आम किसान का रोजमर्रा का भोजन थी दाल-चावल को एक साथ उबाल दलियानुमा खिचड़ी खाई जाती थी। कुछ विद्वानों का मत है कि वेदों में जिस 'क्षिरिका' का ज़िक्र मिलता है। वह खिचड़ी का ही पुरखा है और भला बीरबल की खिचड़ी को कोई कैसे भूल सकता है जिसे पकने में घंटों लग गए थे?

विज्ञापन
विज्ञापन

दिलचस्प बात यह है कि जब शहजादा सलीम गुजरात को फ़तह कर लौटे तो उनके पिता ने उनके स्वागत भोज में 'लज़ीज़ा' नामक सामिष (मांसाहारी) खिचड़ी पकवाई थी। शायद इस खुशी में कि सलीम ने उस गुजरात को निगल लिया है जहां का प्रिय भोजन खिचड़ी है यह सर्व विदित है कि गुजरात और राजस्थान में बाजरे की खिचड़ी बड़े चाव से खाई जाती है, जब अंग्रेज़ भारत पहुंचे तो उनको भी खिचड़ी का चस्का लग गया वह नाश्ते के वक्त जो 'केजरी' शौक से खाते-खिलाते थे, उसमें बीती रात की बची मछली, अंडे वगैरह बेहिचक शामिल कर लिए जाते थे। करी पाउडर वाला मसाला इसका कायाकल्प कर देता था। हौब्सन जौब्सन की एंग्लो इंडियन डिक्शनरी में इसका वर्णन किया गया है।

विज्ञापन

तामिलनाडु का 'पोंगल' सात्विक खिचड़ी का दाक्षिणात्य अवतार ही तो है जिसने जीरे और काली मिर्च की जुगलबंदी से अपना जादू जगाया है,हाल में कुछ दिलेर प्रयोगातुर शैफों ने 'मशरूम खिचड़ी' तथा 'राजमा खिचड़ी' को भी मंच पर उतारा है, पर यह पारंपरिक व्यंजन को पछाड़ने में कामयाब नहीं हो सकी है। महाराष्ट्र की साबूदाना खिचड़ी नाम की ही खिचड़ी है, उसमें न तो दाल रहती है और न चावल।हैदराबाद, दिल्ली और भोपाल में खिचड़ा पकाया जाता है जिसमें गेहूं तथा दाल के अलावा बोटी रहित मांस पड़ता है। कुछ लोग इसी का नामभेद शोला खिचड़ी बताते हैं जो किसी पुलाव से कमतर नहीं समझा जा सकता.बुरा हो खिचड़ी सरकारों का जिन्होंने बेमेल भानुमति के अवसरवादी राजनीतिक कुनबे को ही खिचड़ी का पर्याय बना दिया। चलिए मकर संक्रांति के बहाने ही सही, घोंघा बनने के डर से ही सही माष की खिचड़ी की याद तो आई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed