फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

वक्त के साथ बदला अचार का स्वाद, जानें कितना पुराना है इसका खट्टा- मीठा मसालेदार इतिहास

Sat, 14 Jul 2018 04:48 PM IST
रेणु जैन
रेणु जैन Updated Sat, 14 Jul 2018 04:48 PM IST
विज्ञापन
History in a Jar: Know the  fascinating facts about pickles

अपने भारत में आम हो या खास, अचार सबकी पहली पसंद है। अंग्रेजी शब्द ‘पिकल’ मध्य इंग्लैंड में सर्वप्रथम वर्ष 1400 में अस्तित्व में आया। बाद में हरी सब्जियों से लेकर फल तक, सभी के अचार बनाए जाने लगे। जमाना बदल रहा है और इसी के साथ खानपान की आदतों में भी परिवर्तन आया है। लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनकी लज्जत किसी भी दौर में कम नहीं होती। इनका जायका हमेशा एक-सा ही बना रहता है। नाम लो और मुंह में पानी।



अब आप को ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप भी इसे खाने में शायद रोज इस्तेमाल करते हों। इसका नाम है अचार। कई परिवारों में तो 17 तरह के पकवान सजे होते हैं, लेकिन अचार न हो, तो थाली सुनी लगती है। अचार यानी सब्जियों और फलों को अम्लीय पदार्थों में पकाए जाने की प्रक्रिया। इसमें दो राय नहीं है कि इस प्रकार तैयार की गई सामग्री में हमें स्वाद के साथ अनेक पौष्टिक तत्व भी मिल जाते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आप अचार नामक इस प्रक्रिया से टमाटर, प्याज, खीरे से लेकर आम-आंवला और करेले जैसी कई सब्जियां बचाकर रख सकते हैं और कई महीनों तक इनका लाजवाब स्वाद चखा जा सकता है।

History in a Jar: Know the  fascinating facts about pickles

प्राचीन ऐतिहासिक लेखों से पता चलता है कि 2030 ईसा पूर्व मेसोपोटामिया के लोग खीरे के अचार का उपयोग करते थे। कहा जाता है कि उस समय उत्तर भारत से कुछ लोग टिगरिस घाटी में खीरे के बीज लेकर गए थे। इसके अलावा क्लियोपेट्रा जहां खीरे के अचार की दीवानी थी, वहीं सुप्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू ने अपनी कृतियों में कहीं-कहीं खीरे के प्रभावकारी असर की तारीफ भी की है।

रोमवासियों ने जिस-जिस देश में विजय हासिल की, वहां से वे कई तरह के खाद्य-पदार्थ भी साथ लेते चले आए। सिरका, तेल और शहद तो वे विशेष तौर पर पसंद करते थे। एशिया में अचार को काफी पसंद किया जाता है। कोरिया में अचार का इतिहास करीब 3000 पूर्व माना गया है। कोरियाई चीन से अचार के कई तरीके लेकर आए और उन्हें उन्होंने अपने तरीके से बनाना आरंभ किया।

History in a Jar: Know the  fascinating facts about pickles

16वीं शताब्दी में यूरोप में खाद्य-पदार्थ को प्रसंस्कृत करने की एक नई मुहिम चल पड़ी थी। कई नए भोज्य-पदार्थ चलन में आ चुके थे। जल्द ही केचअप, विभिन्न प्रकार की चटनियां और मुरब्बे भी प्रचलन में आने लगे। जूलियस सीजर, सम्राट जॉन, महारानी एलिजाबेथ, सैमुअल पेपिस, नेपोलियन बोनापार्ट, जॉर्ज वाशिंगटन, थॉमस जेफर्सन आदि तो विशेष रूप से अचार के दीवाने रहे हैं।

भारत में आम हो या खास, अचार सबकी पहली पसंद है। अंग्रेजी शब्द पिकल मध्य इंग्लैंड में सर्वप्रथम वर्ष 1400 में अस्तित्व में आया। शब्दकोश में जिसका अर्थ दिया गया है, स्पाइसी सॉस या ग्रेवी, जिसे मीट के साथ परोसा जाता था। दरअसल, अचार डालने की प्रक्रिया में भोज्य पदार्थ में पहले से ही उपस्थित सूक्ष्म कीटाणु विकसित नहीं होते।

विज्ञापन
विज्ञापन
History in a Jar: Know the  fascinating facts about pickles

अचार में शामिल किया गया खट्टापन विषाणुओं को नष्ट करता है। यदि अचार बनाते समय सब चीजें समुचित उपयोग में न लाई जाएं, तो इसमें अम्लीय स्तर बढ़ सकता है, जो हानि पहुंचा सकता है। अचार डालने के दो तरीके हैं। एक में अचार को कई सप्ताह तक कमरे के तापमान में रखा जाता है। इस दौरान खाद्य-पदार्थ के रंग और स्वाद में अभूतपूर्व परिवर्तन आ जाता है।

नमक, हल्दी, तेल और अम्लीय पदार्थ से नुकसानदेह बैक्टीरिया जन्म नहीं ले पाते और अचार महीनों तक तरोताजा रहता है। इमली के रस और सिरके से कुछ अचार जल्दी तैयार होते हैं और इन्हें जल्दी ही खाकर खत्म भी किया जाना चाहिए।

 

विज्ञापन
History in a Jar: Know the  fascinating facts about pickles
हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं है कि मसाले या तेल खाना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, लेकिन अच्छी गुणवत्ता के खाद्य तेलों का सीमित सेवन करने से कोई खतरा नहीं है। हां, अधिक मात्रा में कोई भी चीज कभी भी नुकसान पहुंचा सकती है। जहां तक अचार का सवाल है, इसमें शामिल नमक, तेल और मसालों का मिला-जुला रूप आपको अपनी छोटी-सी जिंदगी में स्वाद का भरपूर आनंद तो देता ही है, कुछ हद तक पौष्टिक तत्व भी प्रदान करता है।

विकासशील देशों के बारे में तो कहा जाता है कि यहां की अर्थव्यवस्था और मौसम के अनुकूल है अचार। विशेषकर सर्दियों में तो अचार में शामिल मसाला और तेल गर्मी पैदा करते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि अचार के सेवन से पाचन क्रिया भी बेहतर होती है। हर प्रांत के अचार में कुछ अलग, कुछ नया और खास होता है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक अचार के कई प्रकार हैं। हरी सब्जियों से लेकर फल तक, सभी के अचार बनाए जाते हैं।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed